
आईपीएस स्कूल में गरबा की धूम: रंग-बिरंगे परिधानों में सजे विद्यार्थियों ने बिखेरे संस्कृति के रंग, 20 अक्टूबर को दशहरा बाल मेला
तीन दिवसीय डांडिया नाइट में उमड़ा उत्साह, नृत्य-संगीत के साथ नवरात्र की परंपराओं से जुड़ा विद्यालय परिवार
शाहपुरा। नवरात्र की भक्ति, गरबा की थिरकन और डांडिया की खनक… रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चे, उत्साह से झूमते अभिभावक और संगीत की लय पर कदमताल करता विद्यालय परिसर। इंडियन पब्लिक स्कूल (आईपीएस), शाहपुरा में इन दिनों नवरात्र का उल्लास केवल नृत्य और संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामूहिक सहभागिता का जीवंत उत्सव बनकर सामने आया है। विद्यालय में 17 से 19 अक्टूबर तक आयोजित तीन दिवसीय डांडिया नाइट ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को एक ऐसे मंच पर एकत्र किया, जहां शिक्षा के साथ संस्कार, मनोरंजन के साथ परंपरा और उत्सव के साथ आत्मीयता का संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ 17 अक्टूबर को उपखंड अधिकारी बनवारी लाल सिंसीनवार ने किया। शुभारंभ के साथ ही विद्यालय परिसर में उत्सव का रंग छा गया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतिभागियों ने गरबा और डांडिया की प्रस्तुतियों से वातावरण को उल्लासपूर्ण बना दिया। संगीत की स्वर लहरियों के बीच थिरकते कदमों और डांडिया की खनक ने उपस्थित लोगों को भी उत्सव से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
संस्कृति की लय पर थिरके कदम, परंपराओं से जुड़ी नई पीढ़ी
डांडिया नाइट की खासियत यह रही कि इसमें विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने गरबा और डांडिया के माध्यम से भारतीय लोक संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। रंगों, संगीत और सामूहिक नृत्य से सजे इस आयोजन ने विद्यालय परिसर को उत्सव स्थल में बदल दिया।
नवरात्र भारतीय संस्कृति में शक्ति की आराधना, सकारात्मकता और सामूहिक उल्लास का प्रतीक है। गरबा और डांडिया इसी सांस्कृतिक विरासत के ऐसे रंग हैं, जो पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं। आईपीएस स्कूल का यह आयोजन इसी भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास रहा। बच्चों के लिए यह केवल मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने और सामूहिक सहभागिता का महत्व सीखने का माध्यम भी बना।
शिक्षा के साथ संस्कार, विद्यालय और अभिभावकों के बीच मजबूत हुआ जुड़ाव
विद्यालय में आयोजित डांडिया नाइट का उद्देश्य विद्यार्थियों और अभिभावकों को भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ने के साथ विद्यालय और परिवार के बीच आत्मीय संबंधों को मजबूत करना भी है। ऐसे आयोजनों में बच्चों को पाठ्यपुस्तकों से बाहर निकलकर अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता और सामाजिक व्यवहार को विकसित करने का अवसर मिलता है।
जब विद्यार्थी अपने माता-पिता और शिक्षकों के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में सहभागी बनते हैं, तो विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं रह जाता, बल्कि सीखने, जुड़ने और साझा अनुभवों का ऐसा मंच बन जाता है, जहां संस्कार सहज रूप से जीवन का हिस्सा बनते हैं। डांडिया नाइट में विद्यार्थियों और अभिभावकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने इसी भावना को साकार किया।
अतिथियों का स्वागत, विद्यालय परिवार ने संभाली व्यवस्थाएं
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में बालकिशन जैन, विनीत कुमार जैन, देव देवी धाकड़ एवं धारा सिंह उपस्थित रहे। विद्यालय प्रबंधन की ओर से रामपाल बिरला, प्रदीप पारीक, साधना बिरला, सरिता पारीक तथा प्रधानाचार्या खुशनूर बानो ने अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। विद्यालय परिवार ने कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने, अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान विकसित करने का अवसर उपलब्ध कराया।
20 अक्टूबर को सजेगा दशहरा बाल मेला, बच्चों को मिलेगा मनोरंजन का मंच
डांडिया नाइट के उत्सव के बाद अब आईपीएस स्कूल में 20 अक्टूबर को दशहरा बाल मेले का आयोजन किया जाएगा। यह मेला बच्चों के लिए मनोरंजन, रचनात्मकता और आनंद से जुड़ा विशेष अवसर होगा। बाल मेले के माध्यम से विद्यालय परिसर में उत्सव की रौनक आगे भी बनी रहेगी।
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, डांडिया नाइट और दशहरा बाल मेले जैसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की भावना से जुड़े हैं। इनका उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के साथ सांस्कृतिक, सामाजिक और रचनात्मक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।
विद्यालय प्रबंधन ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले अतिथियों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।




