
जयपुर। रेगर कला, साहित्य एवं संस्कृति परिषद (पंजी.) एवं आत्मज्ञान पब्लिकेशन एण्ड फाउंडेशन, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रेगर कला, साहित्य एवं संस्कृति समागम–2026 में साहित्यकार टीकम ‘अनजाना’ को साहित्य एवं सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित “श्री जीवनराम मोहनपुरिया, श्रीमती सोनी देवी मोहनपुरिया एवं श्री अग्रलाल आर्य स्मृति साहित्य सम्मान–2026” से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें 11 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई।
आयोजकों के अनुसार टीकम ‘अनजाना’ को यह सम्मान उनके साहित्य-सृजन, समाज सेवा, सामाजिक जागरूकता तथा संस्कृति के संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों के लिए प्रदान किया गया। साहित्य और समाज के बीच संवाद स्थापित करने तथा सामाजिक विषयों को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से सामने लाने के प्रयासों को भी सम्मान के योग्य माना गया।
समारोह में साहित्य, कला एवं संस्कृति से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही। इस दौरान साहित्य को समाज की संवेदनाओं, संघर्षों और सरोकारों को अभिव्यक्त करने का प्रभावी माध्यम बताते हुए रचनाकारों की भूमिका पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने, जागरूकता पैदा करने और सांस्कृतिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण साधन है।
सम्मान को बताया सामूहिक स्नेह का प्रतिफल
सम्मान प्राप्त करने के बाद टीकम ‘अनजाना’ ने इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय अपनी सृजन-यात्रा से जुड़े सभी लोगों के स्नेह, सहयोग और विश्वास का प्रतिफल बताया। उन्होंने कहा कि साहित्य की यात्रा अकेले की यात्रा नहीं होती। पाठकों, मित्रों, शुभचिंतकों और साहित्यप्रेमियों का निरंतर प्रोत्साहन ही रचनाकार को बेहतर सृजन के लिए प्रेरित करता है।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए गौरव का विषय होने के साथ-साथ नई जिम्मेदारी और निरंतर बेहतर लिखने की प्रेरणा भी है। समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े विषयों पर आगे भी सक्रिय रूप से लेखन जारी रखने का प्रयास रहेगा।
सृजन-यात्रा को मिला नया संबल
टीकम ‘अनजाना’ ने सम्मान के लिए रेगर कला, साहित्य एवं संस्कृति परिषद तथा आत्मज्ञान पब्लिकेशन एण्ड फाउंडेशन का आभार जताते हुए कहा कि ऐसे सम्मान साहित्यकारों के उत्साह को बढ़ाते हैं और समाज में साहित्य एवं संस्कृति के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करते हैं।
उन्होंने अपनी सृजन-यात्रा में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी शुभचिंतकों, मित्रों और साहित्यप्रेमियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पाठकों का विश्वास और समाज का स्नेह ही किसी रचनाकार के लिए सबसे बड़ी पूंजी है।
साहित्य के साथ सामाजिक सरोकार
टीकम ‘अनजाना’ की यह उपलब्धि साहित्य-सृजन को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के प्रयासों को भी रेखांकित करती है। सम्मान समारोह में उन्हें मिले सम्मान को साहित्य, समाज और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय रचनात्मक योगदान की पहचान के रूप में देखा गया। ₹11 हजार की सम्मान राशि के साथ मिला यह सम्मान उनके लिए आगे की सृजनात्मक यात्रा में प्रेरणा का नया अध्याय साबित होगा।




