
जिला परिषद, पंचायत समिति, प्रधान से लेकर सरपंच-वार्ड पंच तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी
जयपुर। राजस्थान में आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अब अगले चरण में पहुंच गई हैं। पंचायती राज विभाग ने विभिन्न स्तरों पर पूरी की गई आरक्षण लॉटरी की संकलित रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दी है। रिपोर्ट मिलने के बाद अब चुनाव कार्यक्रम जारी करने की दिशा में राज्य निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पिछले दिनों जिला एवं उपखंड स्तर पर पूरी की गई। इसमें जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, प्रधान, सरपंच और वार्ड पंच पदों के आरक्षण का निर्धारण शामिल है। सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए 24 सितंबर को उपखंड स्तर पर आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद अब संबंधित सूचनाओं को संकलित कर विभाग की ओर से आयोग को भेजा गया है।
लॉटरी पूरी, अब आयोग की बारी
आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। किस ग्राम पंचायत में सरपंच का पद किस वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा, कौन सा वार्ड किस श्रेणी में आएगा और पंचायत समितियों तथा जिला परिषद में किन सीटों पर किस वर्ग का आरक्षण रहेगा—इसका निर्धारण लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है।
पंचायती राज विभाग की ओर से तैयार की गई संकलित रिपोर्ट अब राज्य निर्वाचन आयोग के पास पहुंच गई है। इसके बाद आयोग उपलब्ध प्रशासनिक एवं चुनावी तैयारियों के आधार पर चुनाव कार्यक्रम, मतदान की तारीखों और अन्य प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देगा।
राजस्थान में पंचायत चुनावों की तैयारियों को लेकर सरकार पहले ही 15 नवंबर 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का लक्ष्य न्यायालय के समक्ष रख चुकी है।
ग्रामीण राजनीति में बढ़ेगी हलचल
आरक्षण की स्थिति सामने आने के साथ ही गांवों की राजनीति में हलचल और तेज होने की संभावना है। लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवार अब अपने-अपने क्षेत्र की आरक्षित सीट की स्थिति के अनुसार आगे की रणनीति तय कर सकेंगे।
खासकर सरपंच और वार्ड पंच के आरक्षण को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा उत्सुकता रहती है। आरक्षण सूची सामने आने के बाद कई संभावित दावेदारों की राजनीतिक दिशा तय होगी, जबकि कुछ क्षेत्रों में नए चेहरों के लिए अवसर बनेंगे।
इसी तरह पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के आरक्षण से क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ेगा। प्रमुख राजनीतिक दलों के स्थानीय संगठन अब संभावित प्रत्याशियों की पहचान, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और चुनावी तैयारियों को लेकर बैठकों का सिलसिला तेज कर सकते हैं।
आचार संहिता और चुनाव घोषणा पर नजर
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आरक्षण संबंधी रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद चुनाव कार्यक्रम की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्टों में 30 सितंबर के आसपास आचार संहिता लागू होने की संभावना जताई गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से ही होगी।
चुनाव कार्यक्रम जारी होने के बाद नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी, चुनाव चिह्न आवंटन और मतदान सहित पूरी प्रक्रिया की तारीखें स्पष्ट होंगी।
राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनावों में 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों में चुनाव प्रस्तावित हैं। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनावी प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग की है।
दावेदारों की धड़कनें बढ़ीं
आरक्षण लॉटरी के बाद गांवों में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस सीट पर कौन दावेदारी करेगा? कई संभावित उम्मीदवार पहले से ही जनसंपर्क में जुटे हैं। आरक्षण बदलने से कुछ दावेदारों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है, जबकि आरक्षित वर्ग के नए चेहरों के सामने आने की संभावना भी बढ़ गई है।
अब गेंद राज्य निर्वाचन आयोग के पाले में है। आरक्षण की संकलित रिपोर्ट पहुंचने के बाद चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का इंतजार है। जैसे ही तारीखों का ऐलान होगा, राजस्थान के गांवों में चुनावी सरगर्मी पूरी तरह तेज हो जाएगी।




