जिला बहाली की जंग अब निकाय चुनाव के रण में—शाहपुरा में संघर्ष समिति ने फूंका चुनावी बिगुल

जिला बहाली की जंग अब निकाय चुनाव के रण में—शाहपुरा में संघर्ष समिति ने फूंका चुनावी बिगुल
शाहपुरा। शाहपुरा को फिर से जिले का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर पिछले एक वर्ष सात माह से लगातार आंदोलन कर रही जिला बहाल करो संघर्ष समिति ने अब अपनी लड़ाई को नया राजनीतिक मोर्चा देने का फैसला किया है। नगर निकाय चुनाव की आहट के बीच संघर्ष समिति ने साफ संकेत दे दिया है कि जिला बहाली का मुद्दा अब केवल धरना-प्रदर्शन और ज्ञापनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे सीधे चुनावी मैदान में ले जाया जाएगा। समिति आमजन के समर्थन के बूते नगर निकाय चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारकर राजनीतिक दलों के सामने सीधी चुनौती पेश करने की तैयारी में जुट गई है।
भाणा गणेश मंदिर परिसर में संघर्ष समिति की महत्वपूर्ण बैठक अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा की अध्यक्षता तथा संयोजक रामप्रसाद जाट के संचालन में हुई। बैठक में नगर निकाय चुनाव में समिति की भूमिका को लेकर सदस्यों, विभिन्न संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, अधिवक्ताओं और आमजन से सुझाव लिए गए। चर्चा के बाद प्राप्त सुझावों में संघर्ष समिति को चुनाव लड़ाने के पक्ष में बहुमत सामने आया। इसके बाद समिति ने चुनावी मैदान में उतरने का औपचारिक निर्णय लिया।

अब आंदोलन की अगली लड़ाई वोट की चौखट पर
संघर्ष समिति संयोजक रामप्रसाद जाट ने कहा कि शाहपुरा को जब तक वापस जिले का दर्जा नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि नगर निकाय चुनाव समिति के लिए केवल चुनाव नहीं, बल्कि शाहपुरा की जनभावनाओं को राजनीतिक ताकत में बदलने का अवसर है। समिति आमजन के दम पर चुनाव लड़ेगी और आवश्यकता पड़ने पर समान विचारधारा वाले लोगों व संगठनों के साथ गठबंधन भी किया जाएगा।
समिति की रणनीति का सबसे अहम पहलू यह है कि उन राजनीतिक दलों के खिलाफ प्रमुख वार्डों में संघर्ष समिति समर्थित प्रत्याशी उतारे जाएंगे, जिन्हें समिति शाहपुरा का जिला समाप्त किए जाने के लिए जिम्मेदार मानती है। समिति का लक्ष्य चुनाव जीतकर सरकार तक यह संदेश पहुंचाना है कि शाहपुरा की जनता जिला समाप्त किए जाने के फैसले से नाराज है और इस नाराजगी को अब मतदान के जरिए जाहिर करने को तैयार है।
वार्ड 20 से दुर्गालाल राजोरा की पहली ताल ठोक
बैठक में संघर्ष समिति की ओर से वार्ड नंबर 20 से अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा का पहला टिकट जारी किया गया। टिकट मिलते ही राजोरा ने वार्ड 20 से संघर्ष समिति के प्रत्याशी के रूप में चुनावी ताल ठोक दी। बैठक में विभिन्न वार्डों से चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों के आवेदन भी प्राप्त हुए। संघर्ष समिति की ओर से अन्य वार्डों में चुनाव लड़ने के इच्छुक जिला समर्थकों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
राजोरा का नाम सामने आते ही बैठक में मौजूद समर्थकों ने उनका स्वागत किया। संघर्ष समिति सदस्य एवं प्रॉपर्टी यूनियन अध्यक्ष सुरेश गुर्जर ने राजोरा को माला पहनाकर शुभकामनाएं दीं और चुनाव में संघर्ष समिति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रचार करने तथा प्रत्याशियों को जिताने का भरोसा दिलाया।
अधिवक्ताओं का समर्थन, राजनीतिक संकेत भी साफ
संघर्ष समिति अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा ने कहा कि शाहपुरा जिला बहाली की लड़ाई जनभावनाओं से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि अभिभाषक संस्था के नेतृत्व में संघर्ष समिति ने जो जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है, उसका निर्वहन पूरी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ किया जाएगा। वार्ड 20 से चुनाव लड़ते हुए वे शाहपुरा की जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए पूरी ताकत से मैदान में उतरेंगे।
अभिभाषक संस्था अध्यक्ष आशीष पालीवाल ने संघर्ष समिति को समर्थन देते हुए निकाय चुनाव में समिति के प्रत्याशियों को सहयोग देने का आश्वासन दिया। इससे संघर्ष समिति को सामाजिक समर्थन के साथ-साथ चुनावी अभियान में संगठित ताकत मिलने के संकेत मिले हैं।
भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष ने भी दिया चुनावी मंत्र
बैठक में भाजपा ग्रामीण मंडल के पूर्व अध्यक्ष मूलसिंह सोदा ने संघर्ष समिति को सभी वार्डों में प्रत्याशी उतारकर चुनाव लड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि शाहपुरा की जनता एकजुट होकर चुनाव में जिला बहाली के मुद्दे को केंद्र में रखती है तो सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाया जा सकता है और सरकार को शाहपुरा को फिर जिला बनाने के लिए मजबूर करने का संदेश दिया जा सकता है।
सोदा के इस बयान को राजनीतिक गलियारों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि संघर्ष समिति की चुनावी सक्रियता अब सीधे राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। निकाय चुनाव में समिति कितने वार्डों में प्रत्याशी उतारती है और किन दलों के सामने मुकाबला करती है, यह आने वाले दिनों में शाहपुरा की चुनावी राजनीति का सबसे बड़ा सवाल बन सकता है।
सभी समाजों की भागीदारी ने बढ़ाया समिति का उत्साह
बैठक में संघर्ष समिति के सहसंयोजक सूर्यप्रकाश ओझा, कोषाध्यक्ष उदयलाल बेरवा, सचिव दल्लीचंद खटीक, सहसचिव नूर मोहम्मद उर्फ छोटू रंगरेज सहित बड़ी संख्या में सदस्यों ने अपने विचार रखे। नरेश बुलिया, भगवान सिंह यादव, इंजीनियर शक्ति सिंह परिहार, लादूराम जड़ोतिया, रविशंकर उपाध्याय, नवल मोची, अर्पित कसेरा, पुखराज जोशी, इसाक मोहम्मद, प्रेमचंद कहार, मोहम्मद रामेश्वरलाल सोलंकी, बालमुकुंद तोषनीवाल, नमन ओझा, सत्यनारायण पाठक, हाजी उस्मान मोहम्मद छीपा, प्रवीण पारीक, प्रियेश यादववंशी, रामस्वरूप टेपन, रमेशचंद्र मालू, अंकित मालू, सुनील मिश्रा, मुबारक हुसैन सहित अनेक लोगों ने संबोधित किया।
बैठक में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी, व्यापारी, अधिवक्ता, संघर्ष समिति के कार्यकर्ता और आमजन बड़ी संख्या में मौजूद रहे। थानमल परिहार, वेदप्रकाश धाकड़, अभय गुर्जर, मदनलाल कंडारा, विनीत कुमार बुनकर, विनोद कुमार, अजय मेहता, पुष्पेंद्र खटीक, किशन तेली, प्रहलाद सिंह सिसोदिया सहित सैकड़ों लोगों की मौजूदगी ने बैठक को व्यापक जनसमर्थन का रूप दिया।
अब असली परीक्षा चुनावी मैदान में
शाहपुरा में जिला बहाली का आंदोलन पिछले एक वर्ष सात माह से लगातार चल रहा है। अब संघर्ष समिति ने आंदोलन को चुनावी राजनीति से जोड़कर मुकाबले को नया रंग दे दिया है। समिति का दावा है कि वह जनता की आवाज को चुनावी मंच तक ले जाएगी, जबकि आने वाले दिनों में विभिन्न वार्डों में प्रत्याशियों के नाम सामने आने के साथ चुनावी समीकरण और स्पष्ट होंगे।
फिलहाल शाहपुरा की राजनीति में एक सवाल तेजी से तैरने लगा है—क्या जिला बहाली का मुद्दा नगर निकाय चुनाव में वोटों का समीकरण बदल पाएगा? संघर्ष समिति ने तो अपनी तरफ से मोर्चा खोल दिया है। अब निगाहें राजनीतिक दलों की रणनीति और शाहपुरा के मतदाताओं के रुख पर टिकी हैं। निकाय चुनाव में यदि जिला बहाली का मुद्दा प्रमुख चुनावी मुद्दा बनता है, तो यह मुकाबला केवल पार्षद चुनने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शाहपुरा की राजनीतिक नाराजगी और जनभावना का बड़ा जनमत संग्रह बन सकता है।




