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एक शिक्षक एक वृक्ष शिक्षा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अभियान में गूंजा प्रकृति संरक्षण का संदेश, शिक्षकों-विद्यार्थियों ने लिया पौधों के संरक्षण का संकल्प

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य और बढ़ते जलवायु संकट के बीच जब पूरी दुनिया प्रकृति संरक्षण को लेकर गंभीर चिंतन कर रही है, ऐसे समय में शाहपुरा के श्री प्रताप सिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय परिसर से पर्यावरण संरक्षण का एक प्रेरणादायी संदेश पूरे क्षेत्र में गूंज उठा। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उच्च शिक्षा राजस्थान की शाहपुरा (भीलवाड़ा) इकाई के तत्वावधान में आयोजित ष्एक शिक्षकदृएक वृक्षष् देशव्यापी अभियान के अंतर्गत भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सरोकारों का जीवंत संदेश भी बन गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहक्षेत्र कार्यवाह (राजस्थान क्षेत्र) गेंदालाल रहे। उनके साथ विभाग प्रचारक दीपक तथा जिला प्रचारक केशव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। महाविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने इसे जनभागीदारी का स्वरूप प्रदान कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्र के अमर क्रांतिकारी, वीर शहीद कुँवर प्रताप सिंह बारहठ की प्रतिमा पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्रनायक को श्रद्धांजलि देते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प दोहराया। इसके पश्चात् अतिथियों, संगठन पदाधिकारियों एवं शिक्षकों ने महाविद्यालय परिसर में औषधीय तथा छायादार पौधों का रोपण किया। पौधारोपण के दौरान वातावरण ष्वृक्ष लगाओदृधरती बचाओष् और ष्हर शिक्षकदृएक वृक्षष् जैसे प्रेरणादायी नारों से गूंज उठा।
मुख्य अतिथि गेंदालाल ने अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण का असंतुलन केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। बढ़ता तापमान, घटते वन क्षेत्र, अनियमित वर्षा और प्रदूषण मानव जीवन के लिए गंभीर संकट पैदा कर रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का यह नैतिक दायित्व है कि वह प्रकृति के संरक्षण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।
उन्होंने कहा कि एक शिक्षक एक वृक्ष केवल किसी संगठन का औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती माँ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक पवित्र अभियान है। शिक्षक समाज का मार्गदर्शक होता है। यदि प्रत्येक शिक्षक एक पौधा लगाए और उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली, स्वच्छ वातावरण और बेहतर भविष्य की अमूल्य धरोहर छोड़ सकता है।
उन्होंने उपस्थित शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक सेवा तब होगी, जब उस पौधे की नियमित देखभाल कर उसे एक विशाल वृक्ष बनाया जाए। वृक्ष केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि जीवन, स्वास्थ्य, जल संरक्षण और जैव विविधता के सबसे बड़े आधार हैं। प्रकृति की सेवा ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र सेवा है और प्रत्येक नागरिक को इस भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उच्च शिक्षा राजस्थान के जिला अध्यक्ष एवं महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. पुष्करराज मीणा ने अपने संबोधन में कहा कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ सदैव राष्ट्रहित, समाजहित एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे जनकल्याणकारी कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। शिक्षा जगत से जुड़े होने के कारण शिक्षकों का दायित्व केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देना भी उनका नैतिक उत्तरदायित्व है।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल वृक्षारोपण की नहीं, बल्कि वृक्ष संरक्षण की है। यदि प्रत्येक शिक्षक और विद्यार्थी वर्ष में कम से कम एक पौधे को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने का संकल्प ले ले, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिल सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान भी किया।
इस अवसर पर उपस्थित विभाग प्रचारक दीपक एवं जिला प्रचारक केशव ने भी पर्यावरण संरक्षण को भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में वृक्षों को देवतुल्य माना गया है। पीपल, बरगद, नीम, तुलसी जैसे वृक्ष केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं, बल्कि मानव जीवन के रक्षक भी हैं। इसलिए वृक्षारोपण केवल पर्यावरणीय गतिविधि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का भी संरक्षण है।
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के औषधीय एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया। सभी पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण का सामूहिक संकल्प भी लिया गया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक पौधों को पानी देकर उनकी सुरक्षा का जिम्मा अपने हाथों में लेने का भरोसा दिलाया।
महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि ष्एक शिक्षकदृएक वृक्षष् अभियान का उद्देश्य प्रत्येक शिक्षक को पर्यावरण संरक्षण से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना है, ताकि शिक्षा संस्थान केवल ज्ञान के केंद्र ही नहीं, बल्कि हरित एवं स्वच्छ परिसर के आदर्श भी बन सकें। इस अभियान के माध्यम से पूरे प्रदेश में हजारों पौधे लगाए जा रहे हैं, जो भविष्य में हरियाली की नई इबारत लिखेंगे।
कार्यक्रम में सह प्रचार प्रमुख धर्मनारायण वैष्णव, महाविद्यालय के सभी संकाय सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए पौधों की नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय इकाई सचिव डॉ. रंजीत जगरिया के निर्देशन में किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पौधारोपण तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक पौधा सुरक्षित रहकर एक विशाल वृक्ष का रूप धारण करेगा। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक वृक्ष को पूर्ण विकसित करने का संकल्प अवश्य लें।
समापन अवसर पर पूरे महाविद्यालय परिसर में हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण का संदेश स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि शिक्षक समाज आगे बढ़कर पर्यावरण संरक्षण का नेतृत्व करे, तो विद्यार्थी और समाज भी उसी मार्ग पर प्रेरित होकर चल पड़ते हैं। एक शिक्षक एक वृक्ष अभियान ने शाहपुरा में न केवल पौधे रोपे, बल्कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रभक्ति के ऐसे बीज भी बो दिए, जो आने वाले समय में हरित भारत के सशक्त आधार बनेंगे।

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