साइबर फ्रॉड, क्राइम और बढ़ते साइबर स्ट्रेस पर विशेषज्ञों ने किया आगाह
मोबाइल बना जिंदगी की जरूरत, लेकिन एक क्लिक से खाली हो सकता है बैंक खाता
मोबाइल बना जिंदगी की जरूरत, लेकिन एक क्लिक से खाली हो सकता है बैंक खाता: साइबर फ्रॉड, क्राइम और बढ़ते साइबर स्ट्रेस पर विशेषज्ञों ने किया आगाह
शाहपुरा, मूलचन्द पेसवानी।
डिजिटल युग में जहां मोबाइल फोन ने इंसान की जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं यही स्मार्ट डिवाइस अब साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार भी बनता जा रहा है। एक छोटी-सी लापरवाही वर्षों की मेहनत की कमाई पर पानी फेर सकती है, निजी जानकारी चंद सेकंड में अपराधियों के हाथों पहुंच सकती है और मानसिक तनाव व्यक्ति के जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। ऐसे ही गंभीर और वर्तमान समय के सबसे संवेदनशील विषय “साइबर फ्रॉड, साइबर क्राइम एवं साइबर स्ट्रेस” पर भारत विकास परिषद, शाहपुरा शाखा की ओर से स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय में प्रभावी एवं जागरूकता से भरपूर कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस उपाधीक्षक ओपी विश्नोई थे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी जयदेव जोशी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के वरिष्ठ व्याख्याता महेश कुमार कोली तथा भारतीय स्टेट बैंक, शाहपुरा के मुख्य प्रबंधक वेदप्रकाश उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य द्वारका प्रसाद जोशी ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। वातावरण राष्ट्रभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से ओत-प्रोत नजर आया। भारत विकास परिषद के शाखाध्यक्ष पवन कुमार बांगड़ ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए परिषद की स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परिषद केवल सेवा और संस्कार का ही नहीं, बल्कि समाज को समयानुकूल चुनौतियों के प्रति जागरूक करने का भी कार्य कर रही है। वर्तमान दौर में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को डिजिटल सुरक्षा का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य अतिथि पुलिस उपाधीक्षक ओपी विश्नोई ने अपने संबोधन में कहा कि आज साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। फर्जी कॉल, ओटीपी मांगना, केवाईसी अपडेट के नाम पर लिंक भेजना, सोशल मीडिया अकाउंट हैक करना, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, फर्जी नौकरी के ऑफर, ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि अपराधी तकनीक का दुरुपयोग कर लोगों की भावनाओं और विश्वास का फायदा उठाते हैं, इसलिए किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक पर आंख बंद करके भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से बताया कि यदि किसी भी व्यक्ति के साथ साइबर फ्रॉड हो जाए तो घबराने की बजाय तुरंत भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं तथा निकटतम पुलिस थाने या साइबर सेल को तत्काल सूचना दें। समय पर शिकायत मिलने से कई मामलों में बैंक खातों में ट्रांजेक्शन को रोका जा सकता है और राशि वापस मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपने मोबाइल फोन में मजबूत पासवर्ड रखने, दो-स्तरीय सुरक्षा (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) अपनाने तथा किसी भी स्थिति में ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करने की अपील की।
भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य प्रबंधक वेदप्रकाश ने बैंकिंग सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बैंक कभी भी फोन पर ग्राहक से ओटीपी, एटीएम पिन, सीवीवी या पासवर्ड नहीं मांगता। यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी बनकर ऐसी जानकारी मांगता है तो समझ लेना चाहिए कि वह साइबर ठग है। उन्होंने मोबाइल फोन की विभिन्न सुरक्षा सेटिंग्स, ऐप डाउनलोड करते समय बरती जाने वाली सावधानियों तथा बैंकिंग एप्लिकेशन के सुरक्षित उपयोग के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी ग्राहक के साथ धोखाधड़ी हो जाए तो वह तुरंत अपने बैंक से संपर्क करे, शाखा में पहुंचकर निर्धारित आवेदन दे और खाते को सुरक्षित कराने की प्रक्रिया पूरी करे, ताकि आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ व्याख्याता महेश कुमार कोली ने अत्यंत प्रभावशाली अंदाज में कहा कि आज का व्यक्ति सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक मोबाइल पर निर्भर हो चुका है। शिक्षा, व्यापार, बैंकिंग, खरीदारी, मनोरंजन, सामाजिक संबंध और सरकारी सेवाएं—सब कुछ मोबाइल के माध्यम से संचालित हो रहा है। ऐसे में यह सुविधा जितनी उपयोगी है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी अपने साथ लेकर आती है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल में सुरक्षित रहने वाला हमारा व्यक्तिगत डेटा वास्तव में डिजिटल दुनिया में संग्रहित रहता है। यही डेटा हैकर्स और कुछ संदिग्ध एप्लिकेशन के लिए सबसे बड़ी पूंजी बन जाता है। अनजाने में डाउनलोड किए गए ऐप, फर्जी वेबसाइट और संदिग्ध लिंक के माध्यम से साइबर अपराधी लोगों की निजी जानकारी, बैंकिंग विवरण और डिजिटल पहचान चुरा लेते हैं। यही कारण है कि साइबर फ्रॉड और साइबर क्राइम की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
महेश कोली ने विशेष रूप से “साइबर स्ट्रेस” जैसे तेजी से उभरते खतरे को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लगातार मोबाइल पर बने रहना, सोशल मीडिया की तुलना, फर्जी सूचनाओं की बाढ़, हर समय ऑनलाइन रहने का दबाव और डिजिटल धोखाधड़ी का डर लोगों को मानसिक तनाव की ओर धकेल रहा है। यह तनाव धीरे-धीरे व्यक्ति की कार्यक्षमता, पारिवारिक जीवन और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल का उपयोग आवश्यकता तक सीमित रखें, समय-समय पर डिजिटल ब्रेक लें और बिना सत्यापन के किसी भी सूचना या लिंक पर प्रतिक्रिया देने से बचें।
उन्होंने कहा कि आज अधिकांश अपराध व्यक्ति की असावधानी का लाभ उठाकर किए जाते हैं। मोबाइल में मौजूद फोटो, दस्तावेज, बैंकिंग जानकारी, संपर्क सूची और सोशल मीडिया गतिविधियां अपराधियों के लिए बहुमूल्य सूचना होती हैं। यदि व्यक्ति स्वयं सतर्क रहेगा तो साइबर अपराधों का बड़ा हिस्सा स्वतः ही रोका जा सकता है। उन्होंने मजबूत पासवर्ड रखने, समय-समय पर पासवर्ड बदलने, केवल विश्वसनीय एप्लिकेशन का उपयोग करने, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट रखने तथा सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग लेन-देन नहीं करने जैसी अनेक उपयोगी जानकारियां साझा कीं।
कार्यशाला के दौरान उपस्थित सदस्यों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े अनेक सवाल पूछे, जिनका पुलिस उपाधीक्षक ओपी विश्नोई ने सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समाधान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधों से लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सजगता और जागरूकता पर भी निर्भर करती है। समाज जितना जागरूक होगा, अपराधियों के लिए ठगी करना उतना ही कठिन हो जाएगा।
पूरे कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने साइबर सुरक्षा के प्रति गहरी रुचि दिखाई और विशेषज्ञों द्वारा बताए गए सुझावों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। भारत विकास परिषद की इस पहल को समाज के लिए समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल क्रांति के इस दौर में तकनीक का सुरक्षित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग ही साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने का सबसे सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम में भारत विकास परिषद के सदस्य, गणमान्य नागरिक एवं विद्यालय परिवार की गरिमामयी उपस्थिति रही। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए समाज में साइबर जागरूकता का यह अभियान निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया। यह कार्यशाला केवल एक आयोजन नहीं रही, बल्कि डिजिटल युग में सुरक्षित जीवन जीने का एक सशक्त संदेश बनकर सामने आई।



