
मिट्टी के 108 शिवलिंग… और ऋण से मुक्ति का अनोखा दरबार!
देवपुरी में पहली बार होगा भव्य पार्थिव शिव पूजन, नर्मदा परिक्रमा कर चुके पं. जगदीशचंद्र दाधीच के सानिध्य में सजेगा शिव आराधना का महापर्व
शाहपुरा। श्रावण मास की शिवभक्ति के बीच शाहपुरा पंचायत समिति क्षेत्र का देवपुरी गांव सोमवार, 10 अगस्त को एक ऐसे अनूठे धार्मिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है, जिसमें आस्था, साधना और शिव आराधना का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। श्री खालका के बालाजी के पावन प्रांगण में पहली बार 108 पार्थिव शिवलिंगों के पूजन एवं कछवा स्थापना महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। तेरस प्रदोष और आद्रा नक्षत्र के विशेष संयोग में होने वाले इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है।
आयोजकों के अनुसार शाहपुरा क्षेत्र में इस स्वरूप का यह पहला और एकमात्र शिव मंदिर है, जहां ऋण मुक्तेश्वर महादेव के रूप में भगवान शिव की आराधना की जाती है। मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में ऐसी मान्यता है कि यहां विधि-विधान और श्रद्धा के साथ भगवान शिव को चने की दाल अर्पित करने से कर्ज और ऋण से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। यही वजह है कि दूर-दराज से भी लोग अपनी मनोकामनाओं और ऋण मुक्ति की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं।

108 पार्थिव शिवलिंगों की पहली बार होगी पूजा
कार्यक्रम के संयोजक संजय मंत्री ने बताया कि श्रावण मास के विशेष अवसर पर देवपुरी में पहली बार 108 मिट्टी के पार्थिव शिवलिंगों का सामूहिक पूजन किया जाएगा। सोमवार को प्रातः 9 बजे से शुरू होने वाले इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालु भगवान आशुतोष की विशेष आराधना करेंगे।
आयोजन पं. जगदीशचंद्र दाधीच, शिवपुरी वाले के सानिध्य में होगा। पं. दाधीच स्वयं तीन बार नर्मदा परिक्रमा कर चुके हैं। उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शन में होने वाले इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता है। आयोजन में आचार्य अंकित दाधीच, आमलीकला तथा आचार्य अंकुश दाधीच, प्राहेड़ा-शाहपुरा का भी धार्मिक मार्गदर्शन रहेगा।
आयोजकों ने बताया कि श्रावण मास एवं नाग पंचमी के शुभ अवसर पर आयोजित यह दिव्य पार्थिव शिव पूजन महोत्सव भगवान शिव की आराधना के साथ आध्यात्मिक शांति और जनकल्याण की भावना को समर्पित रहेगा।

मिट्टी का शिवलिंग और शिवपुराण की मान्यता
आयोजन में शिवपुराण में वर्णित पार्थिव शिव पूजन की महिमा को भी प्रमुखता से बताया जाएगा। धार्मिक ग्रंथों में पार्थिव शिवलिंग पूजन को भगवान शिव की आराधना का अत्यंत पुण्यकारी माध्यम माना गया है।
आयोजकों के अनुसार शास्त्रों में कहा गया है—
“पार्थिवं पूजयेद्यस्तु श्रद्धया परमेश्वरम्।
तस्य सर्वाणि पापानि नश्यन्ति नात्र संशयः॥”
इसका भावार्थ है कि जो व्यक्ति श्रद्धा के साथ पार्थिव अर्थात मिट्टी के शिवलिंग का पूजन करता है, उसके पाप, कष्ट और विघ्न नष्ट होते हैं तथा भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है—ऐसी धार्मिक मान्यता है।
श्रावण मास को भगवान भोलेनाथ का प्रिय मास माना जाता है। इस दौरान रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और पार्थिव शिवलिंग पूजन के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। देवपुरी में होने वाला 108 पार्थिव शिवलिंग पूजन इसी धार्मिक परंपरा को सामूहिक स्वरूप प्रदान करेगा।
मनोकामना से लेकर ग्रहबाधा तक—आस्था का अपना विश्वास
पार्थिव शिव पूजन को लेकर श्रद्धालुओं में अनेक धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। आयोजकों के अनुसार इस पूजन से भगवान आशुतोष की विशेष कृपा और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है। साथ ही मनोकामना पूर्ति, कार्य सिद्धि, परिवार में सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना से भी श्रद्धालु पार्थिव शिवलिंग का पूजन करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार कालसर्प दोष, मांगलिक दोष और ग्रहबाधाओं की शांति, विवाह में आने वाली बाधाओं के निवारण तथा संतान प्राप्ति की कामना से भी शिव आराधना की जाती है। रोग, शोक, भय, ऋण और जीवन की अन्य परेशानियों से मुक्ति की कामना लेकर भी श्रद्धालु भगवान शिव की शरण में पहुंचते हैं।
आयोजकों का कहना है कि पार्थिव शिव पूजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि शिवभक्ति के माध्यम से श्रद्धालुओं को मानसिक शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ना भी है।
इस महादेव को कहते हैं ‘ऋण मुक्तेश्वर’
देवपुरी स्थित इस मंदिर की सबसे खास पहचान ऋण मुक्तेश्वर महादेव के रूप में है। मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यता इसे दूसरे शिव मंदिरों से अलग बनाती है।
श्रद्धालुओं के बीच ऐसी मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति कर्ज या ऋण से परेशान है और अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान शिव को चने की दाल की सवा मात्रा अर्पित करता है तो उसे ऋण से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है।
इसी विश्वास के चलते यहां लोग अपनी सामर्थ्य और मान्यता के अनुसार चने की दाल अर्पित करते हैं। किसी श्रद्धालु द्वारा सवा सौ ग्राम दाल चढ़ाई जाती है तो कोई बड़ी मात्रा में दाल लेकर पहुंचता है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ श्रद्धालु बड़े ऋण की मनोकामना लेकर सवा क्विंटल तक चने की दाल भी अर्पित कर चुके हैं।
हालांकि यह पूरी तरह आस्था और स्थानीय धार्मिक मान्यता का विषय है, लेकिन इस मान्यता ने ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर को क्षेत्र में एक विशिष्ट धार्मिक पहचान दी है।
श्रावण में कांवड़ियों से शिवमय हुआ देवपुरी
श्रावण मास में देवपुरी का वातावरण पहले से ही शिवभक्ति में रंगा हुआ है। क्षेत्र में कांवड़िए पहुंच रहे हैं और भगवान ऋण मुक्तेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर रहे हैं। कांवड़ियों के पहुंचने से मंदिर परिसर में भक्ति, जयकारों और धार्मिक अनुष्ठानों का माहौल बना हुआ है।
“हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष के बीच श्रद्धालु भगवान शिव का अभिषेक कर अपनी आस्था प्रकट कर रहे हैं। सोमवार को होने वाले 108 पार्थिव शिवलिंग पूजन को लेकर इस धार्मिक माहौल में और भी रंग भरने की उम्मीद है।
कछवा स्थापना भी बनेगी आकर्षण का केंद्र
आयोजन में 108 पार्थिव शिवलिंग पूजन के साथ कछवा स्थापना महोत्सव भी आयोजित किया जाएगा। धार्मिक परंपराओं में कछवे को स्थिरता, धैर्य और आध्यात्मिक प्रतीक के रूप में देखा जाता है। ऐसे में शिव आराधना के साथ कछवा स्थापना आयोजन की विशेषता को और बढ़ाएगी।
सुबह 9 बजे से शुरू होगा आयोजन
आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम 10 अगस्त 2026, सोमवार, तेरस प्रदोष के अवसर पर प्रातः 9 बजे से शुरू होगा। आयोजन स्थल श्री खालका के बालाजी, ऋण मुक्तेश्वर महादेव, खालका महादेव, देवपुरी रहेगा।
आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर पार्थिव शिव पूजन में सहभागी बनने और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया है।
देवपुरी का यह आयोजन केवल 108 मिट्टी के शिवलिंगों की पूजा तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि श्रावण की शिवभक्ति, नर्मदा परिक्रमा से अर्जित आध्यात्मिक अनुभव, स्थानीय धार्मिक परंपरा और ऋण मुक्तेश्वर महादेव से जुड़ी आस्था को एक मंच पर लाने वाला विशेष अवसर बनने जा रहा है।
श्रावण के इस पावन सोमवार को देवपुरी में मिट्टी के 108 शिवलिंग सजेंगे, मंत्र गूंजेंगे, अभिषेक होगा और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच शिवभक्ति का अनूठा दृश्य देखने को मिलेगा।




