रामस्नेही संप्रदाय के इतिहास का एक और अद्भुत अध्याय…रामचरणजी महाराज Part-3
शाहपुरा की बात, हर हफ्ते आपके साथ

शाहपुरा संवाद के विशेष साप्ताहिक इतिहास बुलेटिन “शाहपुरा की बात, हर हफ्ते आपके साथ” में आपका हार्दिक स्वागत है।
इस रविवार, 02 अगस्त 2026, सुबह 8:00 बजे, हम लेकर आ रहे हैं रामस्नेही संप्रदाय के आद्याचार्य स्वामी रामचरणजी महाराज के जीवन पर आधारित विशेष श्रृंखला की तीसरी कड़ी।
इस अंक में जानिए—कैसे चाकसू से जयपुर पहुंचे स्वामी रामचरणजी ने बढ़ती भीड़ से दूर रहकर एकांत साधना का मार्ग चुना और एक दिव्य संत के निर्देश पर मेवाड़ की ओर प्रस्थान किया। रास्ते में अपने पैतृक गांव बनवाड़ा पहुंचे, लेकिन सांसारिक पहचान से विरक्त होकर आगे बढ़ते हुए भीलवाड़ा पहुंचे।
देखिए, उस समय भीलवाड़ा में व्याप्त अंधविश्वास और पाखंड के बीच उन्होंने मियाचंद (मायाराम) जी की बावड़ी की गुफा में कठोर तपस्या, मौन साधना और अजगरी वृत्ति का पालन कर आध्यात्मिक साधना का नया अध्याय कैसे लिखा।
जानिए उनके प्रथम तीन शिष्य देवकरण, कुशलराम और नवलराम कैसे बने, निर्गुण भक्ति की धारा कैसे प्रवाहित हुई और विरोधियों ने उनके विरुद्ध षड्यंत्र क्यों रचे।
देखिए, विरोध के कारण स्वामी रामचरणजी को भीलवाड़ा छोड़कर कोठारी नदी के तट स्थित कुहाड़ा शिला पर क्यों जाना पड़ा। वहीं से प्रारंभ हुई उनकी अमूल्य वाणी का संकलन, जो आगे चलकर ‘अणभैवाणी’ के रूप में रामस्नेही संप्रदाय का प्रमुख ग्रंथ बना।
साथ ही जानिए, कैसे भीलवाड़ा में 12 बीघा भूमि पर रामद्वारे की स्थापना हुई, जो आज रामस्नेही संप्रदाय का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है।
इन सभी ऐतिहासिक तथ्यों का रोचक एवं प्रमाणिक विश्लेषण करेंगे शिक्षाविद् तेजपाल उपाध्याय।
देखना न भूलें—”शाहपुरा की बात, हर हफ्ते आपके साथ”।
📅 रविवार, 02 अगस्त 2026
🕗 सुबह 8:00 बजे
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