
शाहपुरा।मूलचन्द पेसवानी
रोज की तरह खेत पर काम करने निकली वृद्धा नंदू देवी के कदम उस दिन घर की ओर वापस नहीं लौटे। देर रात तक जब वह घर नहीं पहुंचीं तो परिजनों ने तलाश शुरू की। रात गुजर गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन नहर के पास पहुंचे परिजनों को जमीन पर खून के धब्बे दिखाई दिए। आशंका गहराई तो तलाश आगे बढ़ी और नहर के पानी में नंदू देवी का शव बरामद हुआ। हाथों में पहने चांदी के कड़े भी गायब थे।
वर्ष 2023 की इस सनसनीखेज वारदात में अब न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय शाहपुरा ने सरदारपुरा निवासी शक्ति सिंह पुत्र भगवत सिंह को वृद्धा नंदू देवी की हत्या सहित लूट और साक्ष्य मिटाने के अपराध में दोषसिद्ध ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने तीनों धाराओं में आरोपी पर कुल 50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।
खेत से शुरू हुई तलाश, नहर में खत्म हुई कहानी
अपर लोक अभियोजक हितेष शर्मा के अनुसार नंदू देवी सरदारपुरा गांव में रहती थीं और प्रतिदिन की तरह नाहरसागर बांध के पेटे में नहर के पास स्थित अपने खेत पर काम करने गई थीं। शाम बीतने के बाद भी जब वह घर नहीं लौटीं तो परिवार को चिंता हुई। परिजनों ने आसपास के इलाकों और खेतों में तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली।
अगले दिन तलाश फिर शुरू हुई। इसी दौरान नहर के पास खून के निशान मिले। इन निशानों ने पूरी घटना को रहस्यमय बना दिया। तलाश करने पर नहर में नंदू देवी का शव मिला। परिजनों ने देखा कि मृतका के हाथों में पहने चांदी के कड़े भी नहीं थे। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और हत्या का मामला दर्ज हुआ।
पुलिस जांच में आरोपी तक पहुंची कड़ी
मृतका के पौत्र भेरूलाल कीर निवासी सरदारपुरा की रिपोर्ट पर थाना फुलियाकलां में एफआईआर संख्या 39/2023 दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 एवं 201 के तहत अनुसंधान शुरू किया। जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों और परिस्थितियों को जोड़ते हुए पुलिस ने शक्ति सिंह के विरुद्ध धारा 302, 201 एवं 392 में आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया।
मामला सेशन न्यायालय से विचारणीय होने के कारण अपर जिला एवं सत्र न्यायालय शाहपुरा में इसकी सुनवाई हुई।
कोर्ट में 21 गवाह, 47 दस्तावेज बने अहम कड़ी
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए 21 गवाहों के बयान न्यायालय में करवाए। इसके साथ ही 47 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अपर लोक अभियोजक हितेष शर्मा ने अभियोजन की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के माध्यम से न्यायालय के समक्ष पूरा घटनाक्रम रखा।
न्यायालय ने अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद आरोपी शक्ति सिंह को नंदू देवी की हत्या सहित संबंधित अपराधों के लिए दोषी माना।
हत्या पर उम्रकैद, लूट में 10 साल की कठोर सजा
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सानिया हाशमी ने आरोपी शक्ति सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास एवं 25 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया।
वहीं धारा 392 के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास एवं 15 हजार रुपए अर्थदंड तथा धारा 201 के तहत 7 वर्ष के साधारण कारावास एवं 10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।
इस प्रकार न्यायालय ने हत्या, लूट और साक्ष्य मिटाने से जुड़े तीनों अपराधों में आरोपी को दोषसिद्ध कर दंडित किया।
साक्ष्यों की कड़ियों ने पहुंचाया अंजाम तक
इस मामले में अभियोजन की ओर से पेश किए गए 21 गवाह और 47 दस्तावेजी साक्ष्य महत्वपूर्ण रहे। इन्हीं मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने अभियोजन के मामले को प्रमाणित मानते हुए आरोपी को दोषसिद्ध किया।
वर्ष 2023 में सरदारपुरा के खेत और नहर के आसपास हुई इस वारदात ने गांव में चिंता पैदा कर दी थी। अब न्यायालय के फैसले के बाद हत्या के मामले में कानूनी प्रक्रिया अपने अहम पड़ाव पर पहुंची है। फैसले में न्यायालय ने अपराध की अलग-अलग धाराओं के तहत आरोपी को पृथक-पृथक दंड सुनाकर मामले में दोषसिद्धि दर्ज की है।




