संत प्रेरणा से परमार्थ की मिसाल, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में जल सेवा शुरू
परमार्थ की राह में एक और कदम संत की प्रेरणा से सेवा कार्यों का विस्तार

शाहपुरा। परमार्थ का अर्थ केवल किसी जरूरतमंद को वस्तु या सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सेवा की ऐसी भावना विकसित करना है, जिसका लाभ समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए रामस्नेही संप्रदाय के आद्याचार्य महाप्रभु स्वामी श्री रामचरणजी महाराज के 275वें दीक्षा महोत्सव के अवसर पर सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में जल सेवा की शुरुआत की गई। संत श्री गुरुमुखरामजी रामस्नेही की प्रेरणा से श्री सेवा कार्य उम्मेद समिति, रामद्वारा गंगापुर की ओर से मंदिर परिसर में वाटर कूलर स्थापित कर शुक्रवार को आमजन को समर्पित किया गया।
खानिया का बालाजी रोड स्थित सिंधी धर्मशाला के सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में हुए कार्यक्रम में कैलाशचंद्र तोषनीवाल, महावीर जागेटिया एवं जयराम नेपाली ने विधि-विधान से पूजन कर वाटर कूलर का लोकार्पण किया। इसके साथ ही मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं, दर्शनार्थियों और आम राहगीरों के लिए शीतल पेयजल की सुविधा शुरू हो गई। वाटर कूलर के संचालन और देखरेख की जिम्मेदारी पूज्य सिंधी पंचायत शाहपुरा की ओर से संभाली जाएगी।

संत की प्रेरणा से सेवा कार्यों का विस्तार
इस सेवा कार्य के पीछे संत श्री गुरुमुखरामजी रामस्नेही की प्रेरणा रही। उनका कहना है कि समाज में परमार्थ की भावना तभी मजबूत होती है, जब सेवा किसी विशेष वर्ग तक सीमित न रहकर सर्वजन के लिए हो। मंदिर जैसे सार्वजनिक स्थल पर जल सेवा इसी भावना को साकार करती है।
लोकार्पण अवसर पर संत श्री गुरुमुखरामजी रामस्नेही ने रामद्वारा से दिए आशीर्वचन में कहा कि आद्याचार्य महाप्रभु स्वामी श्री रामचरणजी महाराज के 275वें दीक्षा महोत्सव के अवसर पर जल सेवा का यह कार्य मानवता को समर्पित है। उन्होंने कहा कि जल प्रत्येक व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकता है और प्यासे व्यक्ति को शीतल जल उपलब्ध कराना सहज, सरल और प्रत्यक्ष मानव सेवा है।
उन्होंने कहा कि परमार्थ का वास्तविक भाव जरूरतमंद को राहत पहुंचाने में है। सेवा के लिए बड़े साधनों की आवश्यकता नहीं होती। व्यक्ति अपनी क्षमता और सामर्थ्य के अनुसार समाज के लिए कुछ कर सकता है। किसी राहगीर को पानी मिलना, किसी श्रद्धालु को गर्मी में राहत मिलना अथवा किसी जरूरतमंद की आवश्यकता पूरी होना भी सेवा का ही स्वरूप है।

महोत्सव की भावना को सेवा से जोड़ा
संत गुरुमुखरामजी ने कहा कि महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज का जीवन और उपदेश मानवता की सेवा की प्रेरणा देता है। उनके 275वें दीक्षा महोत्सव के अवसर पर होने वाले धार्मिक आयोजनों के साथ यदि सेवा कार्य भी जुड़ें तो महोत्सव की भावना समाज तक व्यापक रूप से पहुंचती है।
इसी सोच के साथ श्री सेवा कार्य उम्मेद समिति, रामद्वारा गंगापुर की ओर से समय-समय पर परमार्थ के कार्य किए जा रहे हैं। सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में वाटर कूलर की स्थापना भी इसी सेवा श्रृंखला की एक कड़ी है। इसका लाभ किसी एक व्यक्ति, परिवार या समाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मंदिर आने वाला प्रत्येक व्यक्ति इसका उपयोग कर सकेगा।
जल सेवा में समाज की भागीदारी
कार्यक्रम में लोकार्पणकर्ता कैलाशचंद्र तोषनीवाल, महावीर जागेटिया एवं जयराम नेपाली ने सर्वजन के मंगल की कामना करते हुए कहा कि संतों की प्रेरणा से होने वाले परमार्थ कार्य समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करते हैं। सेवा कार्य का महत्व तभी बढ़ता है, जब उसमें समाज की सहभागिता हो और उसे निरंतरता मिले।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर आमजन के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने में सामाजिक संस्थाओं और समाजजनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे कार्यों से जरूरतमंद व्यक्ति को तत्काल राहत मिलती है और समाज में सहयोग की भावना भी मजबूत होती है।
वाटर कूलर के संचालन की जिम्मेदारी सिंधी पंचायत को सौंपे जाने से सेवा कार्य को नियमित रूप से जारी रखने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। मंदिर परिसर में वाटर कूलर के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को सुविधा मिलती रहे।
पहले जल से महादेव का अभिषेक
वाटर कूलर के लोकार्पण में धार्मिक परंपरा और सेवा भावना का भी संगम देखने को मिला। मंदिर के पुजारी पं. राजेंद्र शुक्ला ने विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया। वाटर कूलर से निकले प्रथम जल को सिद्धेश्वर महादेव को अर्पित कर जलाभिषेक किया गया। इसके बाद वाटर कूलर को आमजन की जल सेवा के लिए समर्पित कर दिया गया।
धार्मिक दृष्टि से भी जल को पवित्रता और जीवन का आधार माना गया है। ऐसे में भगवान को प्रथम जल अर्पित करने के बाद उसी जल को मानव सेवा के लिए उपलब्ध कराना कार्यक्रम की मूल भावना से जुड़ा रहा।
सार्वजनिक सुविधा के साथ सामाजिक संदेश
सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में शुरू हुई यह जल सेवा केवल गर्मी में शीतल पानी उपलब्ध कराने की सुविधा नहीं है। इसके साथ सामाजिक सहभागिता और सेवा का संदेश भी जुड़ा है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ खानिया का बालाजी रोड से गुजरने वाले राहगीरों के लिए भी यह सुविधा उपयोगी रहेगी।
रामस्नेही संत परंपरा की प्रेरणा से किए गए इस कार्य में धार्मिक आस्था और सामाजिक सरोकार एक साथ दिखाई दिए। महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के दीक्षा महोत्सव के अवसर पर शुरू हुई जल सेवा उनकी सेवा-भावना को सामाजिक उपयोगिता से जोड़ने का माध्यम बनी।
कार्यक्रम में पूज्य सिंधी पंचायत की ओर से अशोक थानवानी, मूलचंद पेसवानी, सुरेश वासवानी, गोपाल सुवालका, गुलाबचंद चौधरी सहित समाजजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
परमार्थ की राह में एक और कदम
संतों की प्रेरणा से समाज में होने वाले परमार्थ कार्यों की सार्थकता उनके प्रत्यक्ष लाभ में दिखाई देती है। सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित वाटर कूलर से अब प्रतिदिन अनेक श्रद्धालुओं और राहगीरों को शीतल जल मिल सकेगा। सेवा की यह सुविधा कितने लोगों की प्यास बुझाएगी, इसका आंकड़ा भले दर्ज नहीं होगा, लेकिन हर उस व्यक्ति की राहत में इसकी सार्थकता दिखाई देगी, जो मंदिर पहुंचकर शीतल जल ग्रहण करेगा।
इसी भाव के साथ संत श्री गुरुमुखरामजी रामस्नेही की प्रेरणा से शुरू हुई यह जल सेवा परमार्थ की उस परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है, जिसमें धर्म का अर्थ केवल आस्था नहीं, बल्कि मानवता के प्रति जिम्मेदारी भी माना जाता है।




