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शाहपुरा पालिका अध्यक्ष चुनाव- दो दावेदारों के बीच सिमटी कुर्सी की जंग, सियासी समीकरणों पर नजर

शाहपुरा पालिका अध्यक्ष चुनाव- दो दावेदारों के बीच सिमटी कुर्सी की जंग, सियासी समीकरणों पर नजर

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में नामांकन प्रक्रिया के बाद मुकाबले की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। बुधवार को अध्यक्ष पद के लिए कुल चार नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। इनमें कांग्रेस के रमेश सेन, भाजपा की ललिता कहार तथा बालमुकुंद तोषनीवाल के दो नामांकनकृएक कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में और दूसरा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मेंकृशामिल थे।
गुरुवार को नामांकन पत्रों की संवीक्षा के बाद दो नामांकन खारिज होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद अध्यक्ष पद की चुनावी जंग अब कांग्रेस के रमेश सेन और निर्दलीय बालमुकुंद तोषनीवाल के बीच रह गई है। स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में तोषनीवाल के कांग्रेस से अलग होकर निर्दलीय मैदान में रहने को लेकर अलग-अलग तरह के सियासी कयास लगाए जा रहे हैं।
22 पार्षदों के साथ कांग्रेस के सामने चुनौती
शाहपुरा नगर पालिका के 35 वार्डों के चुनाव परिणाम में कांग्रेस को 22 सीटें मिली हैं, जबकि भाजपा के 8 और निर्दलीय 5 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। इस लिहाज से कांग्रेस के पास अध्यक्ष पद के लिए आवश्यक बहुमत से अधिक संख्या है।
लेकिन अध्यक्ष पद के चुनाव में अब सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस के भीतर के समीकरणों को लेकर है। रमेश सेन और बालमुकुंद तोषनीवाल दोनों कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और दोनों ही इस बार पार्षद निर्वाचित हुए हैं। उपलब्ध परिणामों के अनुसार सेन वार्ड 15 से और तोषनीवाल वार्ड 16 से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुए थे।
निर्दलीय मैदान में तोषनीवाल ने बढ़ाई हलचल
तोषनीवाल द्वारा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में बने रहने से अध्यक्ष चुनाव की राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है। हालांकि इसका अंतिम असर क्या होगा, यह चुनाव के दौरान पार्षदों के रुख और मतदान से ही स्पष्ट होगा।
वहीं भाजपा के पास 8 पार्षद हैं और पांच निर्दलीय पार्षद भी बोर्ड में मौजूद हैं। ऐसे में अध्यक्ष चुनाव के दौरान सभी पक्षों की नजर पार्षदों के समर्थन और राजनीतिक समीकरणों पर रहेगी।
अब अगला सवालकृकिसके साथ जाएंगे पार्षद?
अध्यक्ष पद का चुनाव 21 सितंबर को होना प्रस्तावित है। नाम वापसी के लिए 18 सितंबर तक का समय निर्धारित है। यदि चुनाव आवश्यक रहता है तो 21 सितंबर को मतदान होगा।
नामांकन की तस्वीर साफ होने के बाद अब शाहपुरा की सियासत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस के 22 पार्षदों में एकजुटता किस तरह कायम रहती है और निर्दलीय खेमे की भूमिका क्या रहती है।
शाहपुरा की नगर पालिका की कुर्सी अब दो चेहरों के बीच हैकृरमेश सेन बनाम बालमुकुंद तोषनीवाल। आगामी दो दिन में नाम वापसी और उसके बाद होने वाला मतदान इस सियासी मुकाबले की दिशा तय करेगा।

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