
अभिषेक-शांतिधारा, संगीतमय मंडल विधान और निर्वाण लड्डू चढ़ाने के साथ मनाया भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक पर्व
शाहपुरा। श्रावण शुक्ल सप्तमी यानी मोक्ष सप्तमी के पावन अवसर पर बुधवार को चंवलेश्वर पार्श्वनाथ देशनोदय दिगंबर जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। तेइसवें तीर्थंकर 1008 भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में पूरे चौखला क्षेत्र से आए श्रावक-श्राविकाओं ने विधि-विधान के साथ भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, मंडल विधान और निर्वाण लड्डू अर्पित किए। सुबह से ही तीर्थ क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों का सिलसिला शुरू हो गया और दिनभर मंदिर परिसर भक्तों की आस्था से सराबोर रहा।
तीर्थ क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष प्रकाश कासलीवाल एवं मंडल अध्यक्ष महेन्द्र जैन ने बताया कि मोक्ष कल्याणक पर्व पर प्रातः नित्यनियम पूजा के बाद भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। अभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य आगरा निवासी सुमेरचंद्र, सचिन, जिज्ञांश, राजुलदेवी, सोनियादेवी एवं विश्विका जैन परिवार तथा केकड़ी-उनियारा निवासी ताराचंद, विमलादेवी, आशीष, अंजलीदेवी एवं निविता जैन परिवार को प्राप्त हुआ। धार्मिक मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में श्रद्धा अर्पित की।

ध्वजा चढ़ी तो वातावरण हुआ भक्तिमय
अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद मूलनायक मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया गया। ध्वजा चढ़ाने का सौभाग्य पारोली निवासी भागचंद, संजय, मुकेश एवं श्रेयांश सौगाणी परिवार को प्राप्त हुआ। ध्वजारोहण के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के जयकारे लगाए और पूरा तीर्थ क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
इस अवसर पर दिगंबर जैन महासमिति संभाग, चंवलेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ समिति एवं महिला मंडल की ओर से लहरिया उत्सव का आयोजन भी किया गया। रंग-बिरंगे लहरिया परिधानों में सजी महिलाओं ने धार्मिक उल्लास को और बढ़ा दिया। वहीं छोटी-छोटी बालिकाओं ने भी मोक्ष सप्तमी के अवसर पर उपवास रखकर धर्म आराधना में अपनी भागीदारी निभाई।
मंडल विधान में गूंजे मंत्र, श्रद्धालुओं ने किया आत्मचिंतन
बाल ब्रह्मचारी विनोद भैया, जबलपुर एवं पंडित विपिन शास्त्री के निर्देशन में मंत्रोच्चार के साथ मंडल विधान संपन्न हुआ। विधान के दौरान धार्मिक मंत्रों और स्तुति से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
इस दौरान विनोद भैया एवं विपिन शास्त्री ने श्रद्धालुओं को माता-पिता की सेवा का संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में माता-पिता का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने कहा कि माता-पिता ही संतान को इस संसार से परिचित कराते हैं, इसलिए उनकी सेवा और सम्मान करना प्रत्येक व्यक्ति का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए। धार्मिक आयोजनों की सार्थकता तभी है, जब उनके संदेश को जीवन के व्यवहार में भी उतारा जाए।
पांडुक शिला पर विराजे भगवान, हुआ कलशाभिषेक
दोपहर में संगीतमय पार्श्वनाथ मंडल विधान का आयोजन हुआ। इस दौरान भगवान पार्श्वनाथ को पांडुक शिला पर विराजमान कराया गया। प्रथम कलशाभिषेक का सौभाग्य सुशीला देवी जैन परिवार, खटकड़ को तथा द्वितीय कलशाभिषेक का सौभाग्य राजेंद्र, निर्मल, जयन्ती, निलांशी, हर्षित एवं सारांशी बरमुड़ा जैन परिवार, कोटा को प्राप्त हुआ।
इसके बाद विधि-विधान से पार्श्वनाथ मंडल विधान संपन्न कराया गया। भगवान पार्श्वनाथ के चित्र का अनावरण करने का सौभाग्य उनियारा-केकड़ी परिवार को प्राप्त हुआ।
भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण की सुनाई गाथा
पंडित विनोद भैया एवं विपिन शास्त्री ने भगवान पार्श्वनाथ के जीवन और मोक्ष कल्याणक का धार्मिक महत्व बताते हुए कहा कि तेइसवें तीर्थंकर 1008 भगवान पार्श्वनाथ का जन्म पौष कृष्ण एकादशी को राजा अश्वसेन एवं महारानी वामादेवी के गर्भ से वाराणसी में हुआ था। उन्होंने संसार को अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाया। भगवान पार्श्वनाथ ने शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखर से श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन मोक्ष प्राप्त किया। इसी कारण जैन समाज में इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व है।
निर्वाण लड्डू चढ़ाने का उमड़ा उत्साह
मोक्ष कल्याणक के मुख्य अवसर पर भगवान पार्श्वनाथ को निर्वाण लड्डू अर्पित किया गया। मूलनायक भगवान के मोक्ष कल्याणक निर्वाण लड्डू चढ़ाने का सौभाग्य ललितकुमार, इन्द्रादेवी, अंकुश कुमार एवं सुदित सेठिया परिवार, महुआ को प्राप्त हुआ। इसके बाद उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने भी श्रद्धापूर्वक निर्वाण लड्डू अर्पित किए।
पूरे कार्यक्रम के दौरान तीर्थ क्षेत्र में धार्मिक जयकारों, मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों से वातावरण आध्यात्मिक बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के समक्ष सुख-शांति, समृद्धि और आत्मकल्याण की कामना की।
समाज के पदाधिकारी और श्रद्धालु रहे मौजूद
कार्यक्रम में तीर्थ क्षेत्र अध्यक्ष प्रकाश कासलीवाल, भागचंद बंसल, कैलाश सौगाणी, महेन्द्र जैन, प्रवीण गोधा, अमोलकचंद गोधा, कैलाशचंद्र गोधा, राजेंद्र गोधा, महेन्द्र काला, मुकेश अजमेरा, रूपचंद गोधा, चंद्रप्रकाश जैन सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे। नवयुवक मंडल एवं वामादेवी महिला मंडल के सदस्यों ने भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के समापन पर तीर्थ क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष प्रकाश कासलीवाल ने सभी श्रावक-श्राविकाओं, समाजबंधुओं, मंडल एवं महिला मंडल के सदस्यों तथा आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
मोक्ष सप्तमी का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भगवान पार्श्वनाथ के जीवन, त्याग, तप और मोक्ष के संदेश को आत्मसात करने का अवसर भी बना। चंवलेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ पर दिनभर गूंजते जयकारों ने श्रद्धा और भक्ति की ऐसी छटा बिखेरी कि पूरा तीर्थ क्षेत्र मानो अध्यात्म की रोशनी में नहा उठा।




