आसमान ने रूठकर छोड़ा, अब खेतों में जंगली सूअरों ने मचाई तबाही! फसल उजड़ी तो किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी

शाहपुरा। एक तरफ आसमान से बारिश की बेरुखी ने शाहपुरा तहसील के बोरड़ा बावरियान पंचायत क्षेत्र के काश्तकारों की चिंता बढ़ा रखी है, वहीं दूसरी ओर अब जंगली सूअरों के आतंक ने किसानों की बची-खुची उम्मीदों पर भी पानी फेरना शुरू कर दिया है। खेतों में तैयार खड़ी फसल पर जंगली सूअरों के झुंड धावा बोल रहे हैं और देखते ही देखते मेहनत से तैयार की गई फसल को तहस-नहस कर रहे हैं। खेतों में फसल के बजाय बर्बादी के निशान देखकर किसानों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही है।
हालात यह हैं कि कई किसानों को लाखों रुपए के नुकसान की आशंका है। किसान दिन-रात खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं, लेकिन झुंड में आने वाले जंगली सूअरों के सामने उनकी तमाम कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं। एक ओर बारिश की कमी और दूसरी ओर फसल पर जंगली जानवरों का हमला—किसानों के लिए यह दोहरी मार किसी मुसीबत से कम नहीं है।
20 बीघा की मक्का फसल चट कर गए जंगली सूअर
बोरड़ा बावरियान निवासी रजाक पठान ने बताया कि उन्होंने करीब 20 बीघा भूमि में मक्का की फसल बोई थी। इस बार फसल अच्छी दिखाई दे रही थी और किसान को उम्मीद थी कि मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा। लेकिन पिछले कुछ दिनों से जंगली सूअरों के झुंड लगातार खेतों में पहुंच रहे हैं।
रजाक पठान के अनुसार जंगली सूअरों ने खेत में घुसकर खड़ी मक्का की फसल को बुरी तरह नष्ट कर दिया। जिस खेत में कुछ समय पहले तक लहलहाती फसल दिखाई दे रही थी, वहां अब फसल बर्बाद नजर आ रही है। उन्होंने बताया कि इससे उन्हें काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। ऊपर से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण फसल पहले ही संकट में थी और अब जंगली सूअरों ने रही-सही उम्मीद भी खत्म कर दी।
गांव में रात की नींद हराम, खेतों की रखवाली बनी मजबूरी
जंगली सूअरों के आतंक से केवल एक किसान ही नहीं, बल्कि पूरा गांव परेशान है। गांव के उपसरपंच जगदीश जाट, सुखदेव गुर्जर, भेरूलाल बेशकी, सरदार खां पठान सहित कई काश्तकार इस समस्या से जूझ रहे हैं।
किसानों का कहना है कि जंगली सूअर समूह में खेतों में पहुंचते हैं। रात के समय उनकी संख्या अधिक होने से उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है। किसान अपने स्तर पर खेतों की रखवाली कर रहे हैं और अलग-अलग तरीके अपनाकर सूअरों को भगाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई कारगर उपाय सामने नहीं आया है।
किसानों ने बताया कि रात में खेतों की निगरानी करना उनकी मजबूरी बन गई है। कई बार किसान पूरी रात जागकर फसल बचाने का प्रयास करते हैं, लेकिन कुछ समय के लिए नजर हटते ही जंगली सूअरों का झुंड खेत में घुस जाता है।
किसानों का सवाल—फसल बचाए कौन?
किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि फसल बर्बाद होने के बाद आखिर उसकी भरपाई कैसे होगी। खेती में पहले ही लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, कीटनाशक, जुताई और मजदूरी पर खर्च करने के बाद किसान प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर रहता है। ऐसे में बारिश की कमी के बाद जंगली सूअरों से फसल को नुकसान होना किसान के लिए आर्थिक संकट को और गहरा कर रहा है।
किसानों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल प्रभाव से क्षेत्र में फसलों के नुकसान का सर्वे करवाए। कृषि एवं राजस्व विभाग की टीमों को गांव में भेजकर खेत-खेत जाकर जिंसवार फसल खराबे का आकलन कराया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार समय पर राहत और मुआवजा मिल सके।
राजनीतिक सवाल भी गरमाया—चुनाव में किसान पूछेंगे हिसाब?
शाहपुरा क्षेत्र में निकाय चुनाव का माहौल बनने के बीच किसानों की यह परेशानी राजनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और किसानों से जुड़े मुद्दे चुनावी चर्चा का हिस्सा बनते रहे हैं। ऐसे में बोरड़ा बावरियान के किसानों की फसल का नुकसान भी आने वाले दिनों में राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
किसानों का कहना है कि चुनाव के समय नेता और जनप्रतिनिधि गांव-गांव पहुंचकर समस्याएं सुनते हैं, लेकिन चुनाव के बाद वही समस्याएं सरकारी फाइलों में दब जाती हैं। अब किसान चाहते हैं कि इस बार सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन और राहत की ठोस कार्रवाई हो।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगली सूअरों के आतंक का स्थायी समाधान भी जरूरी है। केवल नुकसान का सर्वे कर मुआवजा देना समस्या का स्थायी इलाज नहीं है। वन्यजीवों से फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए संबंधित विभागों को ठोस योजना बनानी होगी।
प्रतापपुरा में भी पहले उठ चुकी है आवाज
किसानों ने बताया कि यह समस्या नई नहीं है। इससे पहले भी प्रतापपुरा क्षेत्र के काश्तकारों ने प्रशासन को जंगली सूअरों के आतंक को लेकर आगाह किया था। किसानों ने अपनी परेशानी प्रशासन तक पहुंचाई, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
ऐसे में किसानों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने समस्या को गंभीरता से लिया होता तो शायद नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था। अब हालात बिगड़ने के बाद किसान प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।
बारिश की मार के बीच सूअरों का हमला, किसान बोले—अब सरकार ही सहारा
बोरड़ा बावरियान क्षेत्र के किसानों के लिए इस समय संकट की तस्वीर साफ है। बारिश की कमी ने खेतों की नमी और फसल की उम्मीदों को प्रभावित किया, वहीं जंगली सूअरों ने खड़ी फसल को निशाना बनाकर आर्थिक नुकसान बढ़ा दिया। किसान एक तरफ आसमान की ओर देखकर बारिश की उम्मीद कर रहे हैं तो दूसरी तरफ रात-दिन खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं।
अब किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम बनाकर तत्काल सर्वे कराया जाए, फसल खराबे की जिंसवार रिपोर्ट तैयार की जाए और पात्र किसानों को नियमानुसार राहत दिलाई जाए। साथ ही जंगली सूअरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए स्थायी समाधान तलाशा जाए।
किसानों का साफ कहना है—“बारिश रूठी तो सह लिया, लेकिन खेत में खड़ी फसल भी नहीं बची तो किसान आखिर जाए कहां?” अब देखना यह है कि किसानों की इस दोहरी मार पर प्रशासन कितनी जल्दी हरकत में आता है और चुनावी मौसम में जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को कितना गंभीरता से उठाते हैं।




