
भीलवाड़ा, मूलचन्द पेसवानी।
अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत शुक्रवार से तीन दिवसीय विशेष आयोजन शुरू हुए। प्रथम दिन रामस्नेही चिकित्सालय एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के संयुक्त तत्वावधान में समारोह आयोजित किया गया। इसमें रक्तदान, नेत्रदान और मानव सेवा के क्षेत्र में प्रेरक भूमिका निभाने वाली संस्थाओं, समाजसेवियों एवं परिवारों का सम्मान किया गया।
समारोह में आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि पीड़ित मानवता की सेवा करना राष्ट्र और राम की सेवा करने के समान है। जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से मानव सेवा करता है, उसे राम की कृपा प्राप्त होती है। संसार में अधिकांश लोग लेने-देने के कार्य में लगे रहते हैं, लेकिन जो लोग रक्तदान, नेत्रदान जैसे पुनीत कार्यों के लिए अपना समय और श्रम देते हैं, वे परमात्मा की सच्ची भक्ति और सेवा करते हैं। ऐसी संस्थाएं और व्यक्ति सम्मान एवं साधुवाद के पात्र हैं।

मृत्यु के बाद भी किसी की दुनिया रोशन कर सकता है नेत्रदान
आचार्यश्री ने मृत्यु के बाद नेत्रदान कराने वाले परिजनों की सराहना करते हुए कहा कि विषम परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखते हुए उन्होंने समाज और मानवता की सेवा में अनुकरणीय योगदान दिया है। नेत्रदान करने वाला व्यक्ति भले ही हमारे बीच नहीं रहता, लेकिन अपनी आंखें किसी जरूरतमंद को देकर वह मानो उसके माध्यम से इस दुनिया को देखता रहता है।
उन्होंने कहा कि नेत्रदान और अंगदान को परिवार की परंपरा बनाना चाहिए, ताकि मृत्यु के बाद भी हमारा शरीर और अंग मानव सेवा के काम आ सकें।
87 नेत्रदान से प्रेरित परिवारों का सम्मान
रामस्नेही चिकित्सालय के प्रभारी सुरेश कोगटा ने बताया कि समारोह में नेत्रदान के लिए प्रेरक की भूमिका निभाने वाली 12 संस्थाओं के प्रतिनिधियों का सम्मान किया गया। इनमें भारत विकास परिषद, लॉयन्स क्लब भीलवाड़ा की सभी शाखाएं, सर्व सिंधी समाज, महावीर नवयुवक मंडल एवं तेरापंथ युवक परिषद सहित अन्य संस्थाएं शामिल हैं।
सर्व सिंधी समाज की प्रेरणा से अब तक 87 नेत्रदान हो चुके हैं। आई बैंक सोसायटी राजस्थान के प्रतिनिधि चेतनजी का भी सम्मान किया गया।
रामस्नेही चिकित्सालय में अब तक 76 लोगों को नेत्र प्रत्यारोपित कर नई रोशनी प्रदान की जा चुकी है। समारोह में ऐसे चार व्यक्ति भी मौजूद रहे, जिन्हें नेत्र प्रत्यारोपण के माध्यम से नई रोशनी मिली। उन्होंने उन नेत्रदानी परिवारों एवं संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके प्रयासों से उन्हें नेत्र प्राप्त हुए और वे आज इस खूबसूरत दुनिया को देख पा रहे हैं।
134 संस्थाओं के प्रतिनिधि भी सम्मानित
एक वर्ष में नेत्रदान करने वाले 87 नेत्रदानी परिवारों तथा रक्तदान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली 134 संस्थाओं के प्रतिनिधियों का भी सम्मान किया गया। आचार्यश्री ने सभी को उपरना ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।
समारोह में भीलवाड़ा के औषधि नियंत्रण अधिकारी मनीष मीणा ने रक्तदान एवं नेत्रदान के क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा का नाम रक्तदान के क्षेत्र में देशभर में अग्रणी बने, इसके लिए अधिक से अधिक लोगों को रक्तदान के लिए आगे आने की आवश्यकता है।
आयोजन को सफल बनाने में आई बैंक सोसायटी भीलवाड़ा चैप्टर के पदाधिकारी राकेश पगारिया एवं उनकी टीम का विशेष योगदान रहा।
26 को आनंदोत्सव, 27 को विराट संत सम्मेलन
आचार्य श्रीरामदयालजी महाराज का अवतरण दिवस 26 सितंबर को सुबह 9 बजे से आनंदोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। वहीं 27 सितंबर को रामद्वारा धाम में विराट संत सम्मेलन आयोजित होगा। इसी दिन दोपहर 2 बजे एक पखवाड़े तक चलने वाले वाणीजी के सामूहिक पाठ का शुभारंभ किया जाएगा। 28 सितंबर से वाणीजी का सामूहिक पाठ नियमित रूप से होगा।
समारोह में संत प्रीतमराम एवं संत रामजस ईडर ने भजनों की प्रस्तुति दी। संचालन हंसा व्यास एवं विकास उपाध्याय ने किया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। समारोह में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।




