डाइट शाहपुरा में शोध की नई दिशा: एआई और नवाचारों के साथ शिक्षकों को मिला अनुसंधान का प्रशिक्षण
तीन दिवसीय डीआरजी कार्यशाला संपन्न, भीलवाड़ा जिले के 32 शोधार्थी शिक्षकों ने लिया भाग

शाहपुरा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उदयपुर के वार्षिक पंचांग की अनुपालना में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) शाहपुरा में जिला संदर्भ समूह (डीआरजी) अनुसंधान विषय पर “अनुसंधान संबंधित जागरूकता एवं दक्षता संवर्धन” विषयक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल समापन हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों में शोध के प्रति रुचि विकसित करना, गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान की समझ बढ़ाना तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से शिक्षा में नवाचार को प्रोत्साहित करना रहा।
समापन समारोह में डाइट शाहपुरा के नव पदस्थापित प्रधानाचार्य अशोक कुमार पारीक ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में शोध की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने शोधार्थी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने अनुसंधान कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल टूल्स और आधुनिक शैक्षिक तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग करें, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में नवाचार और प्रभावशीलता लाई जा सके। उन्होंने कहा कि शोध केवल शैक्षणिक औपचारिकता नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने का सशक्त माध्यम है।
उप प्राचार्य सुश्री रश्मिपुरी गोस्वामी ने डाइट शाहपुरा की शैक्षणिक परंपराओं और उच्च गुणवत्ता के मानकों का उल्लेख करते हुए शोधार्थी शिक्षकों से सकारात्मक सोच के साथ अनुसंधान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल निष्कर्ष तक पहुंचना नहीं, बल्कि विद्यालयी शिक्षा की वास्तविक समस्याओं का समाधान तलाशना भी होना चाहिए।
प्रशिक्षण संयोजक एवं आईएफआईसी प्रभागाध्यक्ष अरविंद चौहान ने बताया कि तीन दिवसीय इस डीआरजी प्रशिक्षण में भीलवाड़ा जिले के विभिन्न ब्लॉकों—शाहपुरा, बनेड़ा, आसींद, सुवाणा, कोटड़ी, मांडलगढ़, हुरड़ा, सहाड़ा, रायपुर, करेड़ा, मांडल और जहाजपुर से आए 32 रुचिशील शोधार्थी शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को अनुसंधान की संपूर्ण प्रक्रिया, शोध विषय चयन, समस्या निर्धारण, शोध पद्धति, डेटा संकलन, विश्लेषण तथा शोध प्रतिवेदन लेखन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक जानकारी प्रदान की गई।
कार्यशाला में डॉ. विनोद कुमार श्रीवास्तव (व्याख्याता) एवं पूर्व प्रधानाचार्य जगदीश चंद्र शर्मा ने संदर्भ विशेषज्ञ के रूप में शोध के विभिन्न आयामों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। उन्होंने अनुसंधान की वैज्ञानिक पद्धति, विद्यालय आधारित शोध, नवाचारों के दस्तावेजीकरण तथा शिक्षा में अनुसंधान की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा करते हुए प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। उनके संवादात्मक एवं व्यावहारिक सत्रों ने प्रशिक्षण को अत्यंत रोचक और प्रभावी बना दिया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में डेटा आधारित निर्णय, तकनीकी संसाधनों का उपयोग और एआई आधारित विश्लेषण भविष्य की आवश्यकता हैं। शोधार्थियों को विद्यालयों में वास्तविक समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए शोध आधारित कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।
आईएफआईसी प्रभारी नितिन जावलिया ने प्रशिक्षण के समापन पर गूगल फॉर्म के माध्यम से सभी प्रतिभागियों की प्रशिक्षण पश्चात परख एवं फीडबैक लिया। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने के साथ-साथ भविष्य में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
समापन अवसर पर अरविंद चौहान ने सभी प्रतिभागी शिक्षकों, संदर्भ विशेषज्ञों एवं प्रशिक्षण से जुड़े अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डाइट शाहपुरा भविष्य में भी शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। उन्होंने सभी शोधार्थी शिक्षकों से आग्रह किया कि वे डाइट शाहपुरा के माध्यम से संचालित विभिन्न शोध परियोजनाओं एवं नवाचार गतिविधियों से निरंतर जुड़े रहें।
प्रशिक्षण में डॉ. प्रभुलाल बडार, दिनेश सिंह भाटी, डॉ. परमेश्वर प्रसाद कुमावत, प्रियव्रत वैष्णव, उग्र सेन, अशरफ शेख, बंसीलाल, लक्ष्मी तेली, प्रियंका शर्मा, भरतदेव धाभाई, हरीश छबलानी, रशीदा तबस्सुम पठान, भूमिका मिश्रा, रसप्रीत कौर, निरुपमा यादव, रामदेव बैरवा, देवलाल कुमावत, रणजीत बैरागी, घनश्याम कोली सहित अनेक शोधार्थी शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण ने स्पष्ट किया कि बदलते शैक्षिक परिवेश में अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीक का समन्वय ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नई दिशा तय करेगा। डाइट शाहपुरा का यह प्रयास जिले में शोध संस्कृति को मजबूत करने और शिक्षकों को नवाचार आधारित शिक्षा की ओर प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।




