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शाहपुरा में रामलीला का दूसरा दिन: मुनि के साथ वन गए राम-लक्ष्मण, ताड़का-मारीच-सुबाहु का वध

महलों के चौक में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, रामचरितमानस के प्रसंगों ने बांधा समां; श्रद्धालुओं ने की प्रभु श्रीराम की मंगल आरती

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी।
शाहपुरा के ऐतिहासिक महलों के चौक में इन दिनों धर्म, भक्ति और रामकथा की त्रिवेणी बह रही है। रविवार से शुरू हुई 10 दिवसीय श्रीरामलीला के दूसरे दिन सोमवार रात भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के वनगमन से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। वाराणसी के धर्म प्रचारक रामायण मंडल की ओर से शाहपुरा नगर पालिका के सहयोग से आयोजित रामलीला में जैसे ही मंच पर श्रीराम और लक्ष्मण के साथ मुनि के वन जाने का प्रसंग आया, पूरा वातावरण भक्तिभाव से भर गया।

दूसरे दिन की रामलीला में राजा दशरथ के महलों में मुनि के आगमन से लेकर श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ वन ले जाने तथा ताड़का, मारीच और सुबाहु के वध तक के प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। कलाकारों ने संवाद, अभिनय और मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से रामचरितमानस के प्रसंगों को इस तरह जीवंत किया कि दर्शक देर रात तक कथा से जुड़े रहे।

मुनि के साथ वन चले राम-लक्ष्मण

रामलीला के संचालक पंडित राघवेंद्र शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन श्रीरामचरितमानस के महत्वपूर्ण और सुंदर प्रसंगों का प्रभावी मंचन किया जा रहा है। दूसरे दिन मुनि के राजा दशरथ के दरबार में पहुंचने और असुरों से यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम एवं लक्ष्मण को साथ ले जाने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।

मंचन में राजा दशरथ के सामने मुनि द्वारा राम-लक्ष्मण को मांगने और उसके बाद दोनों भाइयों के मुनि के साथ वन की ओर प्रस्थान करने का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसके बाद वन में आतंक का पर्याय बनी ताड़का के वध तथा मारीच और सुबाहु के साथ हुए युद्ध का प्रभावी मंचन किया गया।

ताड़का वध के प्रसंग के दौरान दर्शकों में विशेष उत्साह नजर आया। वहीं मारीच और सुबाहु के प्रसंग ने रामलीला के मंच को युद्ध के रोमांच से भर दिया। कलाकारों की प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों से उत्साहवर्धन किया।

रामकथा में छिपा है जीवन का संदेश

रामलीला केवल धार्मिक कथा का मंचन नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े धर्म, मर्यादा, कर्तव्य, संयम और सत्य के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम भी है। मुनि के साथ राम-लक्ष्मण का वन जाना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि धर्म और लोककल्याण के मार्ग पर चलने के लिए व्यक्ति को अपने सुख-सुविधाओं का त्याग कर कर्तव्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।

इसी भाव को कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से दर्शकों के सामने रखा। महलों के चौक में मौजूद श्रद्धालु रामकथा के प्रत्येक प्रसंग से भावनात्मक रूप से जुड़ते नजर आए।

मंगल आरती में उमड़ा श्रद्धाभाव

रामलीला के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम में शिक्षक संघ शाहपुरा खंड अध्यक्ष नयन बुला, मंत्री संजय कुमार त्रिपाठी, जिला मंत्री अमर सिंह, सीताराम चौधरी, मुकेश कुमार कुमावत, उप कारागृह के जेलर किशन लाल मीणा, विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय पदाधिकारी रामेश्वर लाल धाकड़, शिक्षक संघ के नवरत्न शर्मा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

वरिष्ठ शिक्षाविद् चंद्र प्रकाश जोशी, अशोक चास्टा सहित अन्य लोगों ने भी रामलीला में भाग लिया। अतिथियों ने प्रभु श्रीराम की मंगल आरती की। आरती के दौरान महलों का चौक भक्ति और श्रद्धा के वातावरण से भर गया।

6 अक्टूबर तक चलेगी रामलीला

आयोजकों ने बताया कि श्रीरामलीला का मंचन प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक किया जा रहा है। 10 दिवसीय रामलीला का समापन 6 अक्टूबर को होगा। आगामी दिनों में रामचरितमानस के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।

रामलीला को लेकर नगरवासियों में खासा उत्साह है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु महलों के चौक पहुंच रहे हैं। आयोजन समिति का कहना है कि रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

आयोजन की व्यवस्थाओं में राजेंद्र बोहरा, सुभाष व्यास, नरेश व्यास और अनुज कांटिया सहित समिति के सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

रविवार को राम जन्म से शुरू हुई रामकथा अब वनगमन और राक्षसों के संहार के प्रसंग तक पहुंच गई है। आने वाले दिनों में रामलीला के मंच पर होने वाले प्रसंगों के साथ शाहपुरा का महलों का चौक भक्ति, मर्यादा और रामनाम के जयघोष से लगातार गूंजता रहेगा।

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