इफको का अनूठा अभियान: किसान सभा के साथ 2,000 नीम पौधों का रोपण
नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग की दी जानकारी

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) भीलवाड़ा द्वारा सोमवार को श्री राम नंदी गोशाला, ढिकोला में किसान हित, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन को समर्पित किसान सभा एवं नीम वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसानों ने भाग लेकर आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए करीब 2,000 नीम के पौधों का रोपण किया।

कार्यक्रम में इफको भीलवाड़ा के उप क्षेत्रीय प्रबंधक लाला राम चौधरी, ग्राम सेवा सहकारी समिति ढिकोला के आरजीबी सदस्य राजकुमार शर्मा, श्री राम नंदी गोशाला के अध्यक्ष बसंतीलाल वर्मा, सचिव सुरेश भाट, कोषाध्यक्ष लक्ष्मण खारोल, इफको के एसएफए ईश्वरचंद्र प्रजापत सहित अनेक प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।
किसान सभा को संबोधित करते हुए इफको के उप क्षेत्रीय प्रबंधक लाला राम चौधरी ने किसानों को नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के वैज्ञानिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बुवाई से पूर्व बीजों का उपचार नैनो डीएपी की 5 से 10 मिली प्रति किलोग्राम बीज की दर से किया जाना चाहिए। इसके बाद जब फसल 30 से 35 दिन की हो जाए तो 4 मिली नैनो डीएपी प्रति लीटर पानी के अनुपात में घोल बनाकर छिड़काव करें। इस तकनीक से परंपरागत दानेदार डीएपी की आवश्यकता 30 से 40 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि फसल की इसी अवस्था में नैनो यूरिया (4 मिली प्रति लीटर पानी) को नैनो डीएपी के साथ मिलाकर छिड़काव करने से पौधों को संतुलित पोषण मिलता है, उत्पादन क्षमता बढ़ती है तथा उर्वरकों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होता है।
लाला राम चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित एवं अत्यधिक प्रयोग से मृदा, जल एवं वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर पड़ रहा है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने तथा उनके स्थान पर नैनो उर्वरक, हरी खाद एवं अन्य जैविक विकल्पों को वैज्ञानिक तरीके से अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण नीम वृक्षारोपण अभियान रहा। किसान, इफको अधिकारियों एवं गोशाला प्रबंधन के संयुक्त प्रयास से श्री राम नंदी गोशाला परिसर में लगभग 2,000 नीम के पौधे लगाए गए। उपस्थित सभी किसानों ने इन पौधों के संरक्षण एवं नियमित देखभाल का भी संकल्प लिया।

कृषि जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने वाला यह आयोजन किसानों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक साबित हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से आधुनिक, संतुलित एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने तथा हरित पर्यावरण के निर्माण का प्रभावी संदेश दिया गया।




