
शाहपुरा। श्री खान्या के बालाजी मंदिर प्रांगण में महंत श्री श्री 108 श्री रामदास जी त्यागी की असीम अनुकम्पा से चल रही सप्त दिवसीय श्री शिवमहापुराण कथा का अंतिम सोमवार श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं से सराबोर रहा। कथा वाचक पंडित श्री देवकिशन जी शास्त्री ने कथा के अंतिम दिन भक्तों को भक्ति और भगवान की प्राप्ति का गहरा संदेश देते हुए कहा कि दुनिया में बिना रोए कभी भगवान नहीं मिलते। भगवान की प्राप्ति के लिए भक्त को सुख-दुःख, मोह-माया और सांसारिक बंधनों से ऊपर उठकर सच्ची भक्ति करनी पड़ती है।
पंडित देवकिशन शास्त्री ने कहा कि भगवान को पाने के लिए केवल हंसी-खुशी में नाम लेना पर्याप्त नहीं है। जब इंसान जीवन के संघर्षों और कठिन परिस्थितियों में भी भगवान का स्मरण करता है, तब उसकी भक्ति में गहराई आती है। उन्होंने भक्तों से कहा कि जीवन में आने वाले दुखों को भगवान की परीक्षा मानकर धैर्य और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
मीरा ने सहा दुख, तब मिले गिरधर गोपाल
कथा के दौरान शास्त्री ने भक्तिमती मीराबाई का उदाहरण देते हुए कहा कि श्रीकृष्ण की भक्ति के मार्ग में मीरा ने भी अनेक कठिनाइयां सहीं। उन्होंने सांसारिक सुख-सुविधाओं और परिवार तक का मोह छोड़कर गांव-गांव जाकर श्रीकृष्ण के भजन गाए और उनकी भक्ति में स्वयं को समर्पित कर दिया। मीरा ने अनेक दुख सहे, लेकिन उनकी कृष्ण भक्ति कभी कमजोर नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि यही सच्ची भक्ति की पहचान है। भक्त जब अपने आराध्य के प्रति पूरी तरह समर्पित हो जाता है तो कठिनाइयां भी उसके मार्ग को रोक नहीं पातीं। मीरा की भक्ति इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भगवान अक्सर सुख की घड़ी में नहीं, बल्कि दुख की घड़ी में याद आते हैं और उसी समय भक्त के हृदय में भगवान की अनुभूति गहरी होती है।

गणेशजी के परिवार का सुनाया प्रसंग
कथा के दौरान पंडित देवकिशन शास्त्री ने भगवान श्री गणेशजी के परिवार से जुड़े प्रसंग भी सुनाए। उन्होंने भगवान गणेश की पत्नियों के रूप में सिद्धि और बुद्धि तथा उनके पुत्रों शुभ और लाभ का उल्लेख किया। शुभ-लाभ के आगे आमोद और प्रमोद को गणेशजी के पौत्र के रूप में बताया।
कथा के इन प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को धार्मिक ज्ञान के साथ पारिवारिक और आध्यात्मिक संस्कारों से भी जोड़ा। मंदिर परिसर में बैठे श्रद्धालु कथा को पूरी तन्मयता से सुनते रहे।
भजनों पर झूमीं महिलाएं, मंदिर परिसर बना भक्तिमय
सप्त दिवसीय कथा के अंतिम सोमवार को बालाजी महिला मंडल एवं भक्तगणों ने विशेष उत्साह के साथ भाग लिया। कथा के दौरान भक्ति गीतों और भजनों का दौर चला तो महिलाएं स्वयं को रोक नहीं सकीं। भजनों की मधुर धुन पर महिलाएं नाचती-गाती नजर आईं। पूरा मंदिर परिसर तालियों, भजनों और जयकारों से गूंज उठा।
एक दिन पूर्व नर्बदेश्वर महादेव मंडल की ओर से 151 किलो खीर की प्रसादी का वितरण किया गया था। वहीं कथा के अंतिम दिन सोमवार को सभी भक्तजनों के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।
सप्त दिवसीय शिवमहापुराण कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कथा के सात दिनों में भगवान शिव की महिमा, भक्ति, धर्म और जीवन के आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़े विभिन्न प्रसंगों ने भक्तों को भाव-विभोर किया। अंतिम दिन भी श्रद्धालु कथा के संदेश को आत्मसात करते हुए भगवान शिव की भक्ति में लीन नजर आए।




