
शाहपुरा। रक्षाबंधन का पर्व केवल भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक नहीं, बल्कि जीवन में बुराइयों से रक्षा और सदाचार की राह पर चलने का संकल्प लेने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ उपकारागृह शाहपुरा में रक्षाबंधन का पर्व श्रद्धा, आध्यात्मिकता और सकारात्मक ऊर्जा के वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय केंद्र शाहपुरा की बहन संगीता दीदी ने कारागृह में निरुद्ध बंदियों एवं कारागृह स्टाफ को रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुखमय, शांतिपूर्ण और सकारात्मक जीवन की कामना की।
राखी के इस पावन अवसर पर जेल परिसर में माहौल कुछ अलग ही नजर आया। जहां आमतौर पर बंदियों के बीच अपराध और सजा की बातें होती हैं, वहीं रक्षाबंधन के दिन आध्यात्मिकता, आत्मचिंतन और जीवन में बदलाव की बातें सुनाई दीं। रक्षा सूत्र बांधते हुए संगीता दीदी ने बंदियों को अपने भीतर झांकने और बीते जीवन की गलतियों से सीख लेकर बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का संदेश दिया।
‘मन बदलेगा तो जीवन बदलेगा’
संगीता दीदी ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि अपराध का मूल कारण अक्सर मनोविकार और बदले की भावना होती है। क्रोध, लोभ, द्वेष, नशा और नकारात्मक सोच व्यक्ति को धीरे-धीरे गलत रास्ते की ओर ले जाती है। ऐसे में जरूरी है कि व्यक्ति दूसरों को बदलने से पहले स्वयं के भीतर बदलाव लाने का प्रयास करे।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से आत्मचिंतन करना चाहिए और अपने मन में उत्पन्न होने वाले नकारात्मक विचारों को पहचानकर उन्हें समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए। मन पर नियंत्रण और विचारों में सकारात्मकता व्यक्ति को गलत निर्णयों से बचा सकती है।

राजयोग के जरिए मन की शांति का संदेश
कार्यक्रम में संगीता दीदी ने उपस्थित बंदियों को राजयोग का अभ्यास भी कराया। उन्होंने बताया कि मनुष्य यदि अपने विचारों और व्यवहार पर संयम रखे तथा सर्वशक्तिमान परमात्मा का स्मरण करे तो मन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
उन्होंने कहा कि शांत मन ही सही निर्णय लेने की शक्ति देता है। जब व्यक्ति का मन क्रोध, द्वेष और नशे जैसी बुराइयों से मुक्त होता है तो वह अपने जीवन को नई दिशा देने में सक्षम होता है।
संगीता दीदी ने बंदियों से कहा कि जेल की चारदीवारी जीवन का अंत नहीं, बल्कि आत्ममंथन और नई शुरुआत का अवसर भी हो सकती है। व्यक्ति यदि अपनी गलतियों को स्वीकार कर उनसे सीख ले तो वह भविष्य में सम्मानजनक और सकारात्मक जीवन जी सकता है।
रक्षा सूत्र के साथ बुराइयों से रक्षा का संकल्प
रक्षाबंधन के अवसर पर बंदियों और कारागृह स्टाफ को रक्षा सूत्र बांधते हुए संगीता दीदी ने कहा कि राखी केवल भाई की कलाई पर बंधने वाला धागा नहीं है। यह व्यक्ति को अपने जीवन में अच्छाई, संयम, सदाचार और आत्मसंयम अपनाने की प्रेरणा देने वाला पवित्र सूत्र भी है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है, उसी प्रकार हर व्यक्ति को स्वयं को बुराइयों से बचाने का संकल्प लेना चाहिए। जब व्यक्ति स्वयं की रक्षा करने के लिए दृढ़ संकल्पित होता है और सही मार्ग पर चलता है, तब परमात्मा की कृपा और शक्ति भी उसका साथ देती है।
नशे और अपराध से दूरी की अपील
कार्यक्रम के दौरान बंदियों को नशामुक्त जीवन, सकारात्मक सोच और अपराध से दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें बताया गया कि नशा और नकारात्मक संगत व्यक्ति के विवेक को कमजोर कर सकते हैं तथा उसे गलत निर्णय लेने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
संगीता दीदी ने बंदियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लें और भविष्य में समाज में सम्मानजनक जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ें।
रक्षाबंधन के इस आयोजन ने कारागृह में मानवीय संवेदना और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया। रक्षा सूत्र की डोर ने बंदियों को यह एहसास कराया कि जीवन में सुधार और नई शुरुआत का रास्ता हमेशा खुला रहता है।
कार्यक्रम में उपकारापाल किशन लाल मीणा सहित समस्त कारागृह स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।




