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खामोर में हॉकी की हॉंकी, ग्रामीण बेटियों ने थामी स्टिक; 70वीं जिला स्तरीय बालिका हॉकी प्रतियोगिता का आगाज

24 से 27 सितंबर तक चलेगी प्रतियोगिता, विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने किया शुभारंभ; बोले- खेल बेटियों में आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व की भावना पैदा करता है

शाहपुरा। शहरों की खेल सुविधाओं से दूर ग्रामीण अंचल की बेटियों ने गुरुवार को हॉकी मैदान पर अपने हुनर की दस्तक दी। राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, खामोर में 70वीं जिला स्तरीय बालिका हॉकी प्रतियोगिता 2026-27 का आगाज हुआ तो मैदान पर खिलाड़ियों का उत्साह देखते ही बना। 24 से 27 सितंबर तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में विभिन्न टीमों की बालिका खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। प्रतियोगिता ने ग्रामीण क्षेत्र में बेटियों को खेलों से जोड़ने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में उम्मीद जगाई है।

प्रतियोगिता का शुभारंभ शाहपुरा-बनेड़ा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने किया। उद्घाटन अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केवीएसएस शाहपुरा अध्यक्ष ठा. राजेंद्र सिंह खामोर, शिक्षाविद सूर्यप्रकाश शर्मा, भाजपा अध्यक्ष जीवराज गुर्जर सहित विद्यालय परिवार, आयोजन समिति, खेल प्रशिक्षक, शिक्षक और बड़ी संख्या में खिलाड़ी मौजूद रहे।

मैदान पर बेटियों का जोश, विधायक ने बढ़ाया हौसला

प्रतियोगिता के शुभारंभ के दौरान विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने विभिन्न टीमों से प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंची बालिका खिलाड़ियों से मुलाकात की। उन्होंने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और उनके खेल अनुभवों के बारे में जाना। ग्रामीण क्षेत्र से खेल मैदान तक पहुंची इन बेटियों का उत्साह बढ़ाते हुए विधायक ने उन्हें उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं।

उद्घाटन समारोह में खिलाड़ियों के चेहरों पर प्रतियोगिता को लेकर उत्साह साफ नजर आया। खेल मैदान पर हॉकी स्टिक थामे खिलाड़ी अपने प्रदर्शन के लिए तैयार दिखीं। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। उचित मंच और प्रोत्साहन मिले तो ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां भी जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकती हैं।

खेल केवल पदक नहीं, व्यक्तित्व निर्माण का माध्यम

विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने कहा कि खेल विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है। खेलों से बच्चों में अनुशासन के साथ आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को खेलों के लिए भी पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से बेटियों को खेलों में आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि परिवार, विद्यालय और समाज को बालिकाओं को खेलों के लिए निरंतर प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

ग्रामीण क्षेत्र से निकलेंगी खेल प्रतिभाएं

खामोर जैसे ग्रामीण क्षेत्र में जिला स्तरीय बालिका हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन अपने आप में महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को न केवल प्रतिस्पर्धात्मक खेल का अनुभव देते हैं, बल्कि उन्हें अपनी प्रतिभा को पहचानने और आगे बढ़ने का मंच भी उपलब्ध कराते हैं।

ग्रामीण अंचल में कई प्रतिभाएं संसाधनों और अवसरों के अभाव में आगे नहीं बढ़ पातीं। जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं इन खिलाड़ियों को बेहतर टीमों और खिलाड़ियों के साथ खेलने का अवसर देती हैं। इससे उनमें प्रतिस्पर्धा की भावना के साथ खेल के प्रति गंभीरता भी बढ़ती है।

हॉकी से मैदान तक, मैदान से पहचान तक

बालिका हॉकी प्रतियोगिता का यह आयोजन केवल चार दिवसीय खेल कार्यक्रम भर नहीं है। यह ग्रामीण क्षेत्र में बेटियों को खेल के माध्यम से आत्मनिर्भर, अनुशासित और आत्मविश्वासी बनाने की दिशा में एक प्रयास भी है। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को जीत-हार के साथ खेल भावना, टीमवर्क और अनुशासन सीखने का अवसर मिलेगा।

आयोजकों और खेल प्रशिक्षकों की जिम्मेदारी भी इस आयोजन के साथ बढ़ जाती है कि प्रतियोगिता में सामने आने वाली प्रतिभाओं को आगे के स्तर के लिए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिले। यदि ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित खेल प्रतियोगिताएं, प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन और आवश्यक खेल सुविधाएं उपलब्ध होती रहें तो यहां से भविष्य के कई प्रतिभावान खिलाड़ी निकल सकते हैं।

चार दिन मैदान पर दिखेगा खेल कौशल

24 से 27 सितंबर तक चलने वाली प्रतियोगिता में खिलाड़ी मैदान पर अपने कौशल का प्रदर्शन करेंगी। विद्यालय परिवार और आयोजन समिति ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए व्यवस्थाएं की हैं। खेल प्रशिक्षकों और शिक्षकों की मौजूदगी में खिलाड़ियों को आवश्यक मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

शुभारंभ समारोह के दौरान मौजूद अतिथियों ने भी खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें खेल भावना के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने का संदेश दिया।

खामोर के मैदान से शुरू हुई यह खेल यात्रा ग्रामीण बेटियों के लिए सिर्फ चार दिनों की प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की एक नई उम्मीद है। हॉकी की स्टिक थामे ये बेटियां अब अपने खेल से पहचान बनाने की कोशिश में हैं—और जरूरत है तो बस निरंतर अवसर, बेहतर प्रशिक्षण और समाज के प्रोत्साहन की।

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