
शाहपुरा। बाल मन की कल्पनाओं को जब रंग और कैनवास का साथ मिलता है तो भावनाएं चित्रों के रूप में जीवंत हो उठती हैं। चित्रकला केवल रंगों और रेखाओं का संयोजन नहीं, बल्कि बच्चों की कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता और सृजनात्मक सोच को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। इसी उद्देश्य को लेकर संचिना कला संस्थान के तत्वावधान में 2 अक्टूबर को आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लेने वाली छात्राओं में से विजेताओं का सम्मान समारोह राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, तहनाल गेट, शाहपुरा में आयोजित किया गया।
समारोह की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल कुमार बघेरवाल ने की। कार्यक्रम में संचिना कला संस्थान के अध्यक्ष राम प्रसाद पारीक का सान्निध्य रहा, जबकि समाजसेवी एवं शिक्षाविद् राज कुमार बैरवा तथा ब्लॉक साक्षरता कोऑर्डिनेटर हनुमान प्रसाद शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
समारोह में अतिथियों ने विजेता छात्राओं को सम्मानित करते हुए उनकी प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने कहा कि चित्रकला बाल मन की कल्पनाओं और भावनाओं को सहज एवं प्रभावी ढंग से सामने लाने का माध्यम है। ऐसी रचनात्मक प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में छिपी प्रतिभा को पहचानने और उसे मंच देने का कार्य करती हैं। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है तथा उनकी सृजनशीलता को नई दिशा मिलती है।
प्रधानाचार्य अनिल कुमार बघेरवाल ने कहा कि शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम और परीक्षा तक सीमित नहीं रखा जा सकता। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ कला, संस्कृति, खेल और अन्य रचनात्मक गतिविधियों का समावेश आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्यालय छात्राओं की प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करता रहेगा।
अवसर मिले तो प्रतिभा बनती है प्रेरणा
संचिना कला संस्थान के अध्यक्ष राम प्रसाद पारीक ने प्रतियोगिता में शामिल छात्राओं की रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे के भीतर कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है। आवश्यकता इस बात की है कि उसे अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए उचित अवसर और प्रोत्साहन मिले। सही दिशा और मार्गदर्शन मिलने पर यही प्रतिभा आगे चलकर समाज के लिए प्रेरणा बन सकती है।
विशिष्ट अतिथि हनुमान प्रसाद शर्मा और राज कुमार बैरवा ने भी छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में जीत से अधिक महत्वपूर्ण उसमें भाग लेकर अपनी प्रतिभा को अभिव्यक्त करना है। विद्यार्थियों को सफलता-असफलता से परे निरंतर सीखने और आगे बढ़ने की भावना बनाए रखनी चाहिए।
इन छात्राओं ने हासिल किए स्थान
चित्रकला प्रतियोगिता में लुबानी रेगर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। नेहा बैरागी एवं परिधि नरूका ने द्वितीय तथा सरिता गुर्जर एवं लक्ष्मी कहार ने तृतीय स्थान हासिल किया। विजेता छात्राओं को अतिथियों ने सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया। सम्मान प्राप्त करने के दौरान छात्राओं के चेहरों पर खुशी और उपलब्धि का भाव साफ दिखाई दिया।
कार्यक्रम का संचालन अध्यापक सूर्य प्रकाश शर्मा ने किया। समारोह में विद्यालय स्टाफ की लीला व्यास, सुमन राठौर, शकुंतला मीणा, गुलाबचंद रेगर, चंद्रकला टाक, अनीता शर्मा, प्रेम देवी मीणा एवं पूजा धाकड़ सहित विद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का माध्यम है। बच्चों के हाथों में थमाए गए रंग उनकी कल्पनाओं को आकार देने के साथ उनमें आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और स्वतंत्र सोच विकसित करते हैं। ऐसे आयोजनों से विद्यालयी शिक्षा को रचनात्मक विस्तार मिलता है और प्रतिभाओं को अपनी पहचान बनाने का अवसर मिलता है।



