
अभिजीत मुहूर्त में हुई घट स्थापना, दानपात्र से निकले 21 लाख 37 हजार 355 रुपए; मंदिर विकास में खर्च होगी राशि
धनोप। आस्था की ज्योत प्रज्वलित होते ही धनोप माता शक्तिपीठ में नवरात्र महोत्सव की शुरुआत हो गई। शनिवार को अभिजीत मुहूर्त में विधि-विधान से घट स्थापना के साथ ही मां भगवती की आराधना का क्रम शुरू हुआ। पहले दिन से ही श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। आगामी 21 अक्टूबर तक शक्तिपीठ में धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-अर्चना और महाआरती के बीच भक्तिमय वातावरण रहेगा। नवरात्र के 12 दिनों में माता के जयकारों के साथ श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर दरबार में पहुंचेंगे और सुख-समृद्धि, शांति तथा परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे।
धनोप माता शक्तिपीठ लंबे समय से क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। नवरात्र के अवसर पर यहां माता की आराधना का विशेष महत्व रहता है। घट स्थापना के साथ मंदिर में शुरू हुई धार्मिक गतिविधियां अब महोत्सव के समापन तक जारी रहेंगी। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले भक्त माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना करेंगे और धार्मिक परंपराओं में भागीदारी निभाएंगे।
अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना के साथ शुरू हुई आराधना
नवरात्र के पहले दिन पुजारी प्रदीप पंडा ने अभिजीत मुहूर्त में विधि-विधान से घट स्थापना कर महोत्सव का शुभारंभ किया। घट स्थापना के साथ ही मंदिर में शक्ति उपासना का क्रम प्रारंभ हो गया। सनातन धर्म में नवरात्र को मां दुर्गा की आराधना, साधना और आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से माता के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।
पुजारी प्रदीप पंडा ने बताया कि धनोप माता मंदिर में 10 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक नवरात्र महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस अवधि में प्रतिदिन सुबह और शाम महाआरती होगी। दसवीं तिथि पर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ महोत्सव का समापन किया जाएगा।
सुबह-शाम महाआरती में शामिल होंगे श्रद्धालु
नवरात्र के दौरान मंदिर में प्रतिदिन होने वाली महाआरती आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगी। सुबह और शाम माता की आरती में शामिल होकर श्रद्धालु पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिर में दर्शन के लिए दूर-दराज से भक्तों के पहुंचने के कारण नवरात्र के दौरान शक्तिपीठ में धार्मिक गतिविधियां बनी रहेंगी।
माता के दरबार में आने वाले श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना करेंगे। नवरात्र का पर्व धार्मिक आस्था के साथ पारिवारिक और सामाजिक परंपराओं को भी मजबूती देता है। ऐसे में धनोप माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भागीदारी महोत्सव के धार्मिक महत्व को और विशेष बनाएगी।
दानपात्र की गणना में सामने आई 21.37 लाख रुपए की राशि
नवरात्र महोत्सव के शुभारंभ के बीच मंदिर से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आई है। प्रसिद्ध श्री धनोप माताजी मंदिर में शुक्रवार को ट्रस्ट अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह राणावत और सभी ट्रस्टियों की उपस्थिति में दानपात्र खोला गया। दानपात्र की राशि की गणना करने पर कुल 21 लाख 37 हजार 355 रुपए प्राप्त हुए।
इस प्रक्रिया के दौरान मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी और श्रद्धालु भी मौजूद रहे। मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार दान अर्पित करते हैं। दानपात्र से प्राप्त राशि श्रद्धालुओं के विश्वास और शक्तिपीठ के प्रति उनकी आस्था को दर्शाती है। मंदिर में दूर-दराज के क्षेत्रों से भक्तों के पहुंचने के कारण यहां नियमित रूप से धार्मिक गतिविधियां संचालित होती हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर विकास पर होगा खर्च
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार दानपात्र से प्राप्त राशि को मंदिर परिसर के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार पर खर्च किया जाएगा। मंदिर में आने वाले भक्तों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से इस राशि का उपयोग किया जाएगा।
धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्थाओं का विस्तार महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में दानराशि मंदिर विकास कार्यों के लिए उपयोगी साबित होगी। ट्रस्ट अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह राणावत और ट्रस्टियों की मौजूदगी में दानपात्र खोलने तथा राशि की गणना की प्रक्रिया पूरी की गई।
एक ओर धनोप माता शक्तिपीठ में घट स्थापना के साथ नवरात्र की धार्मिक गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर दानपात्र से प्राप्त राशि मंदिर विकास की दिशा में महत्वपूर्ण संसाधन उपलब्ध कराएगी। श्रद्धालुओं की आस्था और सहयोग से शक्तिपीठ की धार्मिक गतिविधियों का संचालन जारी रहेगा।
आगामी 21 अक्टूबर तक चलने वाले नवरात्र महोत्सव में माता के दर्शन, सुबह-शाम की महाआरती और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहेगा। धनोप माता के दरबार में पहुंचने वाले श्रद्धालु मां का आशीर्वाद लेकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे।




