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संतों की कृपा दूर करती जीवन से अज्ञान का अंधकार-आचार्य रामदयालजी महाराज

रामद्वारा धाम में पंचमी महोत्सव पर 15 अक्टूबर को निकलेंगी गोटकाजी महाराज की शोभायात्रा

भीलवाड़ा, । अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज के ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत गुरूवार 15 अक्टूबर को माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में श्रद्धा एवं भक्ति भाव से पंचमी महोत्सव मनाया जाएगा। सुबह 9 बजे माणिक्यनगर रामद्वारा धाम से पंचमी गोटकाजी महाराज की शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा रामद्वारा धाम पहुंचने के बाद पंचमी महोत्सव का आयोजन होगा।
रामद्वारा धाम में बुधवार को सत्संग में आचार्यश्री ने कहा कि नवरात्र की पंचमी को होने वाला महोत्सव चातुर्मास का समापन पर्व होता है। इसमें शामिल होने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु आते है ओर अगले चातुर्मास के लिए अर्जी (प्रार्थना) लगाते है।
उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में अज्ञान का अंधकार छाया हुआ है। महापुरूषों व संतों की कृपा से सृष्टि बदल जाती है। संतों की दृष्टि भोग से योग की ओर, काम से राम की ओर एवं अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली होती है। उन्होंने कहा कि जीवन चार तरह के अवसर मिलते है प्रकाश से अंधकार की ओर, प्रकाश से प्रकाश की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर एवं अंधकार से अंधकार की ओर बढ़ना। धर्म से अधर्म की तरफ बढ़ना प्रकाश से अंधकार की तरफ जाना है। मानव जीवन पाकर संयम का तानाबाना पहन साधना से साध्य तक पहुंच जाना एवं ज्ञानी परम ब्रह्मज्ञानी व तत्वज्ञानी बने तो प्रकाश से प्रकाश की ओर बढ़ना है। विकृति से विकृति की तरफ बढ़ना अंधकार से अंधकार की तरफ बढ़ना है लेकिन विकृति से संस्कृति की तरफ बढ़ना अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना है।

आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि दुनिया में सब कार्यो के लिए समय है पर व्यक्ति को धर्म के लिए समय नहीं मिलता। धर्म के पास भी तुम्हारे लिए समय नहीं हुआ तो मुश्किल हो जाएगी। पद, सत्ता, संपति, सौन्दर्य पाकर कभी इतराना नहीं चाहिए। व्यक्ति की नहीं पद व गुण की पूजा होती है। उन्होंने कहा कि जीवन गंगा की तरह निर्मल एवं पावन होना चाहिए। गंगा निष्काम व निश्चल है जो हिमालय से निकलती है ओर गंगासागर में जाकर मिल जाती है। गंगा की महानता इसी से समझ सकते है कि सागर में गंगा मिलती है तो उसे सागरगंगा नहीं बल्कि गंगा सागर कहते हैं।

आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। दैनिक सत्संग सुबह 9 बजे से हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।

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