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अंतरराष्ट्रीय काव्य मंच पर गूंजा शाहपुरा के बालकवि दीपांश का स्वर

वर्चुअल काव्य गोष्ठी में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर बाल प्रतिभा ने रचा नया अध्याय, अवसर मिले तो छोटे शहरों के बच्चे भी छू सकते हैं बड़े आसमान

शाहपुरा। प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती और उसे अवसर मिल जाए तो छोटी-सी उम्र में भी बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है। शाहपुरा के बालकवि मास्टर दीपांश पारीक ने इसी सोच को अपनी काव्य प्रतिभा के माध्यम से साकार कर दिखाया है। बाल मंच राष्ट्रीय के तत्वावधान में महिला काव्य मंच द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल काव्य गोष्ठी में दीपांश पारीक को राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। शाहपुरा से पहली बार किसी बालकवि का अंतरराष्ट्रीय काव्य मंच तक पहुंचना क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बना है।

30 सितंबर को आयोजित इस विशेष अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठी में दीपांश ने वर्चुअल माध्यम से अपनी कविता का प्रभावी पाठ प्रस्तुत किया। बाल सुलभ भावनाओं, आत्मविश्वास और अपने अलग अंदाज में कविता को प्रस्तुत करने की शैली ने कार्यक्रम में मौजूद प्रतिभागियों और आयोजकों का ध्यान आकर्षित किया। दीपांश ने केवल कविता का पाठ ही नहीं किया, बल्कि अपनी प्रस्तुति के अंदाज में नवाचार का परिचय देते हुए यह संदेश भी दिया कि बच्चों की रचनात्मक क्षमता को मंच और प्रोत्साहन मिले तो वे अपनी कल्पनाशक्ति को अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बना सकते हैं।

बाल मंच से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची प्रतिभा

बाल प्रतिभाओं के लिए मंच उपलब्ध कराना आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। बच्चों में छिपी रचनात्मकता को केवल पाठ्यक्रम और परीक्षा के दायरे में सीमित करने के बजाय साहित्य, कला, संस्कृति और अभिव्यक्ति के क्षेत्रों में अवसर दिए जाएं तो उनके व्यक्तित्व का बहुआयामी विकास संभव है। इसी उद्देश्य की दिशा में बाल मंच जैसी पहलें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

महिला काव्य मंच द्वारा बाल मंच को लेकर आयोजित इस विशेष अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों की बाल प्रतिभाओं को अपनी रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिला। निर्धारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से शाहपुरा के दीपांश पारीक का राजस्थान प्रतिनिधि के रूप में चयन होना अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि है। इससे शाहपुरा ही नहीं, बल्कि भीलवाड़ा जिले की बाल प्रतिभाओं को भी एक नया मंच मिला है।

भीलवाड़ा की ललिता नवीन शर्मा ने बताया कि इस बार राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने का अवसर भीलवाड़ा जिले को मिलना पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि चयन की निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से शाहपुरा के मास्टर दीपांश पारीक का चयन क्षेत्र की बाल प्रतिभाओं के लिए उत्साहवर्धक है। दीपांश की प्रस्तुति ने आयोजकों और गोष्ठी में शामिल प्रतिभागियों को प्रभावित किया। उन्होंने अपने विशिष्ट अंदाज में कविता प्रस्तुत कर काव्य पाठ में नवीनता का अनुभव कराया।

वर्चुअल मंच ने बदली मंच की परिभाषा

डिजिटल दौर ने प्रतिभाओं के लिए मंच की सीमाएं भी बदल दी हैं। कभी किसी बड़े साहित्यिक मंच तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, लेकिन आज वर्चुअल माध्यम से घर बैठे देश-दुनिया के रचनाकारों और श्रोताओं के बीच अपनी प्रतिभा प्रस्तुत की जा सकती है। दीपांश का अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठी में वर्चुअल माध्यम से शामिल होना इसी बदलाव का उदाहरण है।

शाहपुरा जैसे छोटे शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय काव्य मंच पर राजस्थान का प्रतिनिधित्व करना यह संकेत देता है कि प्रतिभा के लिए अब भौगोलिक सीमाएं बाधा नहीं हैं। जरूरत है तो केवल ऐसे मंचों की, जहां बच्चों को अपनी बात कहने, अपनी कल्पना को कविता में ढालने और आत्मविश्वास के साथ उसे प्रस्तुत करने का अवसर मिले।

परिवार की साहित्यिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का भी मिला लाभ

मास्टर दीपांश पारीक शाहपुरा के ख्यातनाम रंगकर्मी एवं संचिना कला संस्थान के अध्यक्ष रामप्रसाद पारीक के पौत्र तथा एडवोकेट दीपक पारीक के पुत्र हैं। परिवार में कला और सांस्कृतिक गतिविधियों का वातावरण होने से दीपांश को भी रचनात्मक अभिव्यक्ति का परिवेश मिला है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने में उसकी अपनी प्रतिभा, रुचि और प्रस्तुति क्षमता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

दीपांश की उपलब्धि को केवल एक बालकवि की व्यक्तिगत सफलता के रूप में देखना इस उपलब्धि को सीमित कर देना होगा। यह शाहपुरा की उन तमाम बाल प्रतिभाओं के लिए संदेश है, जो अपनी प्रतिभा को मंच मिलने का इंतजार कर रही हैं। कविता हो, कहानी हो, संगीत हो, चित्रकला हो या अभिनय—बच्चों को यदि समय रहते मंच, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले तो वे अपनी प्रतिभा को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

शाहपुरा की धरती से निकली आवाज पहुंची अंतरराष्ट्रीय मंच तक

दीपांश की काव्य प्रस्तुति ने एक बार फिर यह साबित किया है कि बड़े सपनों के लिए बड़े शहर जरूरी नहीं होते। छोटे शहरों और कस्बों में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है। आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने और सही अवसर उपलब्ध कराने की है।

अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल काव्य गोष्ठी में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर दीपांश ने शाहपुरा का नाम साहित्यिक मंच पर पहुंचाया है। उसकी यह उपलब्धि क्षेत्र के अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के लिए भी प्रेरणा है कि वे बच्चों की प्रतिभाओं को केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें लगातार मंच और प्रोत्साहन दें।

दीपांश की सफलता का संदेश साफ है—बाल प्रतिभा को यदि अवसर का मंच मिल जाए तो उसकी आवाज स्थानीय गलियों से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्षितिज तक पहुंच सकती है। शाहपुरा के इस बालकवि की उपलब्धि आने वाले समय में क्षेत्र की अन्य बाल प्रतिभाओं के लिए भी नए रास्ते खोलने की उम्मीद जगाती है।

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