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अष्टान्हिका पर्व पर दिगंबर जैन मंदिरों में उमड़ी श्रद्धा कलशाभिषेक, शांतिधारा और नंदीश्वर द्वीप विधान मंडल का हुआ आयोजन

शाहपुरा के सभी जैन मंदिरों में धर्ममय वातावरण, श्रद्धालुओं की रही सहभागिता

शाहपुरा संवाददाता। सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में चल रहे अष्टान्हिका महापर्व के अंतर्गत आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी के पावन अवसर पर शाहपुरा के सभी दिगंबर जैन मंदिरों में धार्मिक आस्था और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। वेदों का मंदिर, कालाभाटा जैन मंदिर, ऊपर चंद्रप्रभु मंदिर, नया जैन मंदिर तथा नसियांजी जैन मंदिर सहित सभी जिनालयों में श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र की विधिवत पूजा-अर्चना कर कलशाभिषेक, शांतिधारा एवं नंदीश्वर द्वीप विधान मंडल का आयोजन किया।

समाज के सदस्य महेन्द्र जैन ने बताया कि अष्टान्हिका पर्व के उपलक्ष्य में सभी मंदिरों में प्रातःकाल भगवान का कलशाभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। इसके पश्चात वेदों के मंदिर में धार्मिक विधि-विधान के साथ नंदीश्वर द्वीप विधान मंडल का आयोजन किया गया, जिसमें चार जोड़ों ने श्रद्धापूर्वक मंडल विधान में सहभागिता निभाई। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर भक्ति, आराधना और धार्मिक उल्लास से सराबोर रहा।

विधान के उपरांत आयोजित शास्त्र सभा में धर्मोपदेश देते हुए कहा गया कि धर्म की साधना जीवन को पवित्र और सार्थक बनाती है। प्रत्येक श्रावक-श्राविका, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, उसे प्रतिदिन भगवान जिनेंद्र का अभिषेक एवं शांतिधारा करने का संकल्प लेना चाहिए। नियमित पूजा-अर्चना से आत्मिक शांति, सद्गुणों का विकास और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

धर्मसभा में यह भी प्रेरणादायी संदेश दिया गया कि “मनुष्य को पद केवल संबोधन देता है, लेकिन सम्मान पाने के लिए उसे अपने आचरण और गुणों से योग्य बनना पड़ता है।” वक्ताओं ने कहा कि वास्तविक प्रतिष्ठा धन, पद या अधिकार से नहीं, बल्कि विनम्रता, सेवा, सदाचार और धर्ममय जीवन से प्राप्त होती है।

पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति-भाव से भगवान जिनेंद्र की आराधना की तथा धर्मलाभ अर्जित किया। मंदिरों में मंगलाचरण, पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठानों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।

इस अवसर पर महेन्द्र जैन, राजेन्द्र जैन, भागचंद जैन, प्रभाचंद जैन, पारसमल जैन, नवीन जैन, मुकेश जैन, नितिन जैन, अंजना जैन, भंवरी देवी सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं और सभी ने अष्टान्हिका महापर्व की आराधना में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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