शाहपुरा में रामस्नेही संप्रदाय का गौरवशाली इतिहास
शाहपुरा की बात, हर हफ्ते आपके साथ
क्या आप जानते हैं कि शाहपुरा केवल एक ऐतिहासिक नगर ही नहीं, बल्कि रामस्नेही संप्रदाय की विश्वविख्यात मुख्य पीठ भी है?
आख़िर क्यों संत रामचरणजी महाराज ने शाहपुरा को अपनी कर्मस्थली बनाया? कैसे यहाँ से राम नाम का संदेश पूरे देश में पहुँचा? और किस प्रकार शाहपुरा आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बन गया?
शाहपुरा संवाद के विशेष साप्ताहिक बुलेटिन “शाहपुरा की बात, हर हफ्ते आपके साथ” में इस रविवार हम लेकर आ रहे हैं एक विशेष प्रस्तुति— “शाहपुरा में रामस्नेही संप्रदाय का गौरवशाली इतिहास”।
जानिए संत रामानंद से लेकर संत रामचरणजी महाराज तक की आध्यात्मिक परंपरा, वर्ष 1760 में रामस्नेही संप्रदाय की स्थापना और 1769 में शाहपुरा आगमन की ऐतिहासिक कथा। देखिए कैसे शाहपुरा में संप्रदाय की मुख्य पीठ स्थापित हुई और कुछ ही दशकों में देशभर में 1600 से अधिक रामद्वारों का विस्तार हुआ।
साथ ही जानिए संप्रदाय के मूल सिद्धांत, ‘राम नाम ही ब्रह्म’ की साधना, मुख्य ग्रंथ अनुभव वाणी का महत्व, चार प्रमुख धामों का इतिहास और वर्तमान पीठाधीश्वर आचार्य श्री रामदयालजी महाराज से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
इतिहास, अध्यात्म और संस्कृति का यह विशेष अंक देखना बिल्कुल न भूलें।
📅 रविवार, 12 जुलाई 2026
🕗 सुबह 8:00 बजे
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