
माई भारत केंद्र की चयन प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी, मेरिट से लेकर इंटरव्यू और आरक्षण तक जांच की मांग
भीलवाड़ा। माई भारत केंद्र के राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक (NYV) चयन प्रक्रिया को लेकर युवाओं के बीच असंतोष के स्वर अब प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच गए हैं। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए युवाओं के एक समूह ने जिला कलेक्टर के समक्ष ज्ञापन सौंपकर चयन प्रक्रिया की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। युवाओं का कहना है कि चयन जैसे महत्वपूर्ण मामले में हर पात्र अभ्यर्थी को समान अवसर मिलना चाहिए और पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से संपन्न होनी चाहिए।
युवाओं ने ज्ञापन में चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को लेकर कई बिंदुओं पर जांच की मांग उठाई है। उनका आरोप है कि निर्धारित नियमों के पालन, पात्र अभ्यर्थियों के चयन और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। कुछ अभ्यर्थियों के आवेदन तथा इंटरव्यू प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। ऐसे में युवाओं ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
आवेदन से इंटरव्यू तक हर कदम की जांच की मांग
ज्ञापन में युवाओं ने कहा कि NYV जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सेवा और जनभागीदारी से जोड़ना है। ऐसे में स्वयंसेवकों का चयन भी निष्पक्ष और भरोसेमंद प्रक्रिया के जरिए होना जरूरी है। यदि चयन प्रक्रिया को लेकर ही सवाल उठने लगें तो इससे न केवल अभ्यर्थियों में निराशा पैदा होती है, बल्कि पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।
युवाओं ने मांग की कि चयन प्रक्रिया में प्राप्त सभी आवेदनों, पात्रता से संबंधित दस्तावेजों तथा दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया की जांच की जाए। इसके साथ ही मेरिट तैयार करने के आधार और अभ्यर्थियों को दिए गए अंकों का भी परीक्षण किया जाए, ताकि किसी प्रकार की विसंगति होने पर उसे सामने लाया जा सके।
इंटरव्यू पैनल की निष्पक्षता पर भी सवाल
युवाओं ने स्थानीय नेहरू युवा केंद्र के अधिकारियों की भूमिका और इंटरव्यू पैनल की निष्पक्षता को लेकर भी आशंका जताई है। उनका कहना है कि इंटरव्यू चयन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसमें पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए।
ज्ञापन में इंटरव्यू में उपस्थित अभ्यर्थियों का रिकॉर्ड, उन्हें दिए गए अंक, पैनल की कार्यवाही और चयन के अंतिम आधार की भी जांच कराने की मांग की गई है। युवाओं का कहना है कि यदि चयन प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई है तो संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
पुराने स्वयंसेवकों की उपेक्षा का मुद्दा भी उठा
युवाओं ने लंबे समय से माई भारत एवं नेहरू युवा केंद्र की गतिविधियों से जुड़े स्वयंसेवकों की कथित उपेक्षा का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि जो युवा लंबे समय से सामाजिक एवं युवा गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे हैं, उनके अनुभव और योगदान को भी चयन प्रक्रिया में उचित महत्व मिलना चाहिए।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ मामलों में अनुभव और प्रमाण-पत्रों को अपेक्षित महत्व नहीं दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। युवाओं ने मांग की कि अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत प्रमाण-पत्रों और अनुभव संबंधी दस्तावेजों के आधार पर दिए गए अंकों की भी निष्पक्ष समीक्षा की जाए।
महिला प्रतिनिधित्व और आरक्षण पर भी नजर
चयन प्रक्रिया में महिला अभ्यर्थियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने का मुद्दा भी युवाओं ने उठाया। इसके साथ ही आरक्षण संबंधी प्रावधानों के पालन की जांच कराने की मांग की गई है।
युवाओं का कहना है कि सरकारी एवं सार्वजनिक संस्थानों से जुड़ी चयन प्रक्रियाओं में निर्धारित नियमों और आरक्षण प्रावधानों का पालन होना जरूरी है। इसलिए चयनित अभ्यर्थियों की सूची से लेकर आरक्षण व्यवस्था तक सभी पहलुओं की जांच की जानी चाहिए।
मेरिट सूची से जॉइनिंग तक पूरा रिकॉर्ड खंगालने की मांग
युवाओं ने जिला प्रशासन से मांग की कि मामले की जांच केवल चयन सूची तक सीमित न रखी जाए, बल्कि आवेदन, मेरिट सूची, प्रमाण-पत्रों के आधार पर दिए गए अंक, इंटरव्यू में उपस्थिति, आरक्षण व्यवस्था, अंतिम चयन सूची और जॉइनिंग से जुड़े समस्त रिकॉर्ड की जांच कराई जाए।
उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड सामने आने से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और यदि कहीं कोई गलती या अनियमितता हुई है तो उसे भी चिन्हित किया जा सकेगा। युवाओं ने यह भी मांग की कि जांच के दौरान सभी पक्षों को अपनी बात रखने का उचित अवसर दिया जाए।
किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
ज्ञापन सौंपने वाले युवाओं ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है। उनकी मांग केवल इतनी है कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप हो तथा योग्य युवाओं को उनका अधिकार मिले।
उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य ऐसे अवसरों से जुड़ा होता है। इसलिए चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की शंका या विवाद की स्थिति पैदा होने पर प्रशासन को स्वयं आगे बढ़कर मामले की जांच करनी चाहिए। युवाओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
ज्ञापन सौंपने के दौरान मनफूल चौधरी बबराना, बबलू, दुर्गेश मीणा, नीलेश शर्मा, विनोद, किशन, कमलेश, किशन सिंह सहित कई युवा मौजूद रहे।
अब युवाओं की नजर जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। सवाल सिर्फ कुछ पदों पर चयन का नहीं, बल्कि उस विश्वास का है जिसके आधार पर युवा सरकारी एवं सामाजिक संस्थाओं से जुड़कर सेवा और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की उम्मीद रखते हैं।




