शाहपुरा में चुनावी रणभेरी बजते ही सियासी पारा चढ़ा, भाजपा ने मारी बाजी तो कांग्रेस खेमे में अभी मंथन जारी
35 वार्ड, अध्यक्ष की कुर्सी और सियासत का महासंग्राम… भाजपा ने मारी बढ़त, कांग्रेस की चाल बाकी!”

शाहपुरा। नगर पालिका शाहपुरा के चुनावी रण की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे शहर की सियासत में हलचल तेज होती जा रही है। नगर निकाय चुनाव के दूसरे चरण में शाहपुरा नगर पालिका के 35 वार्डों के लिए 11 सितम्बर को मतदान होगा। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो चुकी है और अब राजनीतिक दलों की असली परीक्षा शुरू हो गई है। प्रशासन चुनावी तैयारियों में जुटा है तो राजनीतिक दल टिकट के दावेदारों की नब्ज टटोलने और अपने-अपने सियासी समीकरण साधने में लग गए हैं।
फिलहाल चुनावी तैयारियों के लिहाज से सत्तारूढ़ भाजपा संगठनात्मक स्तर पर कांग्रेस से एक कदम आगे दिखाई दे रही है। भाजपा ने न केवल चुनाव संयोजक और संगठनात्मक जिम्मेदारियां तय कर दी हैं, बल्कि वार्डवार संभावित उम्मीदवारों से आवेदन लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। दूसरी ओर कांग्रेस में संभावित उम्मीदवार व्यक्तिगत संपर्क और सोशल मीडिया के जरिए अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं, लेकिन पार्टी स्तर पर अभी वह सक्रियता नजर नहीं आ रही, जिसकी राजनीतिक हलकों में उम्मीद की जा रही थी।
27 अगस्त से शुरू होगा नामांकन का दौर
शाहपुरा नगर पालिका के 35 वार्डों में चुनावी प्रक्रिया का औपचारिक आगाज 27 अगस्त को लोक सूचना जारी होने के साथ होगा। इसी दिन से नामांकन पत्र दाखिल करने का सिलसिला शुरू होगा, जो 31 अगस्त तक चलेगा। 1 सितम्बर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 3 सितम्बर को नाम वापसी की अंतिम तारीख रहेगी। 4 सितम्बर को प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे।
इसके बाद प्रत्याशियों के प्रचार का दौर जोर पकड़ेगा और 11 सितम्बर को मतदान होगा। 14 सितम्बर को मतगणना के बाद तस्वीर साफ होगी कि शहर की जनता ने किस राजनीतिक दल या उम्मीदवार के पक्ष में अपना फैसला सुनाया। अध्यक्ष पद के लिए 21 सितम्बर तथा उपाध्यक्ष पद के लिए 22 सितम्बर को चुनाव होगा।
अध्यक्ष पद सामान्य हुआ तो बढ़ी दावेदारों की धड़कन
इस बार शाहपुरा नगर पालिका अध्यक्ष पद सामान्य वर्ग के लिए अनारक्षित होने से चुनाव की राजनीतिक अहमियत और बढ़ गई है। पिछले चुनाव में अध्यक्ष पद ओबीसी वर्ग के लिए था, लेकिन इस बार आरक्षण की तस्वीर बदलते ही सामान्य वर्ग के दावेदारों में टिकट को लेकर जबरदस्त उत्साह दिखाई दे रहा है।
सामान्य वर्ग के लिए अनारक्षित वार्डों में वार्ड संख्या 3, 4, 6, 7, 11, 14, 16, 25, 26, 28, 29, 30 और 34 शामिल हैं। इन वार्डों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भाजपा और कांग्रेस के साथ एसडीपीआई तथा निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
यही वजह है कि इस बार पार्षद का टिकट महज वार्ड की जीत-हार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई दावेदारों की नजर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर भी टिकी हुई है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए उम्मीदवारों का चयन सबसे बड़ी चुनौती बनने वाला है।

भाजपा ने संगठन को मैदान में उतारा, टिकट के लिए 22 अगस्त तक आवेदन
भाजपा ने जिला स्तर पर बैठक के बाद शाहपुरा नगर पालिका चुनाव के लिए संगठनात्मक जिम्मेदारियां लगभग तय कर दी हैं। शाहपुरा के लिए सुरेश मूंदड़ा को चुनाव संयोजक बनाया गया है। प्रदेश संगठन की ओर से रतन तिवाड़ी को प्रभारी, हरीश भट्ट को समन्वयक तथा नरेश सांड को पालक की जिम्मेदारी दी गई है।
समन्वयक और पालक के शाहपुरा पहुंचने के बाद भाजपा के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक हुई, जिसमें चुनावी रणनीति, संभावित प्रत्याशियों और वार्डवार राजनीतिक समीकरणों पर मंथन किया गया। पार्टी ने पार्षद पद के दावेदारों से आवेदन लेने के लिए आवेदन पत्र भी अंतिम रूप देकर सार्वजनिक कर दिया है।
भाजपा नगर अध्यक्ष पंकज सुगंधी के अनुसार दावेदार 22 अगस्त शाम 5 बजे तक विधायक कार्यालय में अपना आवेदन जमा करा सकेंगे। इसके बाद पार्टी स्तर पर आवेदनों की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
वहीं शाहपुरा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा भी चुनावी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। बताया जा रहा है कि विधायक स्तर पर वार्डवार राजनीतिक स्थिति, संभावित प्रत्याशियों की पकड़ और स्थानीय समीकरणों की समीक्षा की जा रही है। भाजपा के लिए इस चुनाव में संगठन के साथ विधायक की सक्रियता भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कांग्रेस में दावेदार सक्रिय, लेकिन संगठनात्मक तस्वीर अभी धुंधली
भाजपा के मुकाबले कांग्रेस की चुनावी तैयारियां फिलहाल धीमी दिखाई दे रही हैं। हालांकि कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार पीछे नहीं हैं। कई दावेदार सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ाने के साथ-साथ व्यक्तिगत संपर्क के जरिए टिकट की दावेदारी मजबूत करने में जुटे हुए हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस के भीतर अलग-अलग गुटों के बीच समन्वय की चुनौती अभी बनी हुई है। जिले में कथित तौर पर रामलाल जाट और धीरज गुर्जर खेमों के बीच दिखाई देने वाली राजनीतिक खींचतान का असर शाहपुरा की स्थानीय राजनीति पर भी पड़ने की चर्चा है। हालांकि पार्टी के अंदर संभावित दावेदारों की सूची तैयार करने और वार्डवार समीकरणों को समझने का काम अंदरखाने जारी बताया जा रहा है।
खास बात यह है कि इस बार कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों में पिछले चुनाव की तुलना में अधिक उत्साह नजर आ रहा है। कांग्रेस को उम्मीद है कि राज्य सरकार के खिलाफ कथित माहौल और स्थानीय स्तर पर लोगों की नाराजगी का फायदा पार्टी को मिल सकता है। कांग्रेस का लक्ष्य भाजपा के कब्जे को चुनौती देकर नगर पालिका में अपना बोर्ड बनाना है।

भाजपा को सरकार, संगठन और विधायक के काम का भरोसा
दूसरी तरफ भाजपा का चुनावी गणित भी कम दिलचस्प नहीं है। पार्टी अपने मजबूत संगठनात्मक ढांचे, राज्य सरकार की उपलब्धियों और शाहपुरा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। भाजपा नेताओं का मानना है कि संगठन की सक्रियता और सरकार के कामकाज के साथ स्थानीय स्तर पर कराए गए विकास कार्यों को जनता के बीच ले जाकर चुनावी लाभ हासिल किया जा सकता है।
ऐसे में शाहपुरा का नगर पालिका चुनाव केवल 35 वार्डों में पार्षद चुनने का चुनाव नहीं रह गया है। यह चुनाव भाजपा बनाम कांग्रेस की स्थानीय राजनीतिक ताकत, संगठन की पकड़, नेताओं के प्रभाव और संभावित अध्यक्ष पद के दावेदारों की लोकप्रियता का भी इम्तिहान बनने जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि टिकट की दौड़ में कौन बाजी मारता है, किसके समर्थक किस खेमे में खड़े होते हैं और कौन सा राजनीतिक समीकरण मतदान के दिन मतदाताओं के मन को प्रभावित करता है। फिलहाल शाहपुरा की गलियों में चुनावी चर्चा शुरू हो चुकी है और आने वाले दिनों में यह चर्चा धीरे-धीरे टिकट, प्रत्याशी, गुटबाजी और अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने वाली है।
शाहपुरा की सियासत में फिलहाल पहला दांव भाजपा ने चल दिया है, अब कांग्रेस की चाल का इंतजार है।




