शाहपुरा की सियासत में नया मोर्चा! निकाय चुनाव में ‘जिला बहाल करो’ आंदोलन की एंट्री के संकेत
22 अगस्त को भाणा गणेशजी मंदिर में जुटेगा संघर्ष समिति का कुनबा, चुनाव लड़ने से लेकर समर्थन-विरोध तक होगा मंथन

शाहपुरा संवाद ब्यूरो
शाहपुरा को फिर से जिले का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर पिछले 1 वर्ष 7 माह से लगातार आंदोलनरत जिला बहाल करो संघर्ष समिति अब नगर निकाय चुनाव के अखाड़े में अपनी भूमिका तय करने की तैयारी में है। आंदोलन की तपिश के बीच समिति की नजर अब चुनावी रण पर है। सवाल बड़ा है क्या जिला बहाल करो संघर्ष समिति खुद चुनाव मैदान में उतरेगी, किसी राजनीतिक दल या प्रत्याशी का समर्थन करेगी अथवा विरोध का बिगुल बजाएगी? इन तमाम सवालों का जवाब 22 अगस्त को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में तलाशा जाएगा।
समिति की ओर से शनिवार 22 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे भाणा गणेशजी मंदिर परिसर में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा करेंगे, जबकि संचालन संयोजक रामप्रसाद जाट करेंगे। बैठक में नगर निकाय चुनाव में संघर्ष समिति की भूमिका को लेकर खुलकर मंथन होगा और सर्वसम्मति से आगे की रणनीति तय किए जाने की तैयारी है।
चुनाव लड़ेगी या किसी को मैदान में उतारेगी?
नगर निकाय चुनाव में समिति की भूमिका को लेकर कई संभावनाएं सामने हैं। बैठक में प्रमुख रूप से यह मुद्दा रखा जाएगा कि क्या संघर्ष समिति स्वयं चुनाव मैदान में उतरे? यदि चुनाव लड़ा जाता है तो प्रत्याशियों के चयन का आधार क्या हो? क्या समिति ऐसे प्रत्याशियों को समर्थन देगी जो शाहपुरा को जिला बनाने की मांग के साथ मजबूती से खड़े हों? किन प्रत्याशियों या राजनीतिक ताकतों का विरोध किया जाए और किनका समर्थन किया जाए इन सवालों पर भी चर्चा होगी।
इसके साथ ही समिति के सदस्यों की चुनाव में जिम्मेदारियां तय करने के लिए एक विशेष कमेटी गठित किए जाने की संभावना है। यानी आंदोलन की सड़क से निकली रणनीति अब चुनावी चौसर पर किस तरह उतरेगी, इसकी तस्वीर बैठक के बाद काफी हद तक साफ हो सकती है।
‘जिला नहीं तो चुनाव में हिसाब’ का बन सकता है मुद्दा
शाहपुरा को जिला बनाने की मांग को लेकर आंदोलन लगातार जारी है। समिति का कहना है कि जिला समाप्त किए जाने के बाद से ही जनता की भावनाओं को लेकर संघर्ष जारी है और जब तक शाहपुरा को वापस जिले का दर्जा नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार की ओर से अब तक शाहपुरा को पुनः जिला घोषित नहीं किए जाने से आमजन में नाराजगी बनी हुई है। यही नाराजगी नगर निकाय चुनाव में बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकती है। समिति से जुड़े लोगों का मानना है कि जिले की बहाली का सवाल अब केवल आंदोलन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चुनावी विमर्श का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।
सर्वसमाज की भागीदारी पर जोर
बैठक को व्यापक बनाने के लिए सभी समाजों के प्रतिनिधियों, विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों, व्यापारियों, अधिवक्ताओं, संघर्ष समिति के सदस्यों तथा आंदोलन को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोग देने वाले आमजन से भाग लेने का आह्वान किया गया है। समिति का प्रयास है कि चुनावी रणनीति किसी एक वर्ग या समूह की नहीं, बल्कि शाहपुरा की सामूहिक आवाज के रूप में सामने आए। बैठक में सभी पक्षों से विचार लेकर सर्वसम्मति से निर्णय लेने पर जोर रहेगा।
आंदोलन से चुनाव तक बदलते तेवरों पर टिकी नजर
शाहपुरा की राजनीति में यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब तक जिला बहाली का आंदोलन मुख्य रूप से धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन और जनजागरण के जरिए चलाया जाता रहा है। नगर निकाय चुनाव के बहाने समिति यदि सीधे राजनीतिक भूमिका में आती है तो शाहपुरा की चुनावी तस्वीर में नया कोण जुड़ सकता है।
समिति ने अपने संदेश में स्पष्ट तेवर दिखाते हुए कहा है “शाहपुरा जिले के सम्मान में जिला बहाल करो संघर्ष समिति चुनावी मैदान में।” साथ ही नारा दिया गया है “याचना नहीं, अब रण होगा जीवन जय या मरण होगा।”
अब निगाहें 22 अगस्त की बैठक पर टिक गई हैं। भाणा गणेशजी मंदिर परिसर में होने वाला यह मंथन तय करेगा कि जिला बहाली की लड़ाई आने वाले नगर निकाय चुनाव में किस रूप में दिखाई देगी। चुनावी रण में उतरने का फैसला होता है तो शाहपुरा की सियासत में संघर्ष समिति की भूमिका निश्चित रूप से सबसे चर्चित मुद्दों में शामिल हो सकती है।
बैठक में अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा, संयोजक रामप्रसाद जाट, सह संयोजक सूर्यप्रकाश ओझा एवं महासचिव कमलेश मुण्डेतिया ने सभी से समय से पांच मिनट पूर्व पहुंचने की अपील की है।




