BHILWARAE-Paperधर्मराजस्थानरामस्नेहीलोकल न्यूज़शाहपुरा

94 यूनिट रक्त… 94 उम्मीदें! शिक्षक बोले—किताब भी देंगे, जिंदगी भी बचाएंगे

2011 से लगातार जारी पहल का 15वां शिविर : हर रक्तदाता को गमले सहित पौधा भेंट, ‘एक पेड़ मां के नाम’ से रक्तदान और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ा

किताब थमाने वाले शिक्षक अब बचा रहे जिंदगी, 15 साल की ‘जिद’ ने बना दी सेवा की मिसाल

शाहपुरा में 15वां रक्तदान शिविर : 94 यूनिट रक्त संग्रह, हर रक्तदाता को गमले सहित पौधा; 40वीं बार रक्तदान कर रामचंद्र बैरवा ने बढ़ाया सेवा का संकल्प

शाहपुरा।
कक्षा में बच्चों के हाथों में किताबें थमाने वाला शिक्षक जब समाज के हाथों में जीवन बचाने का संकल्प थमा दे, तो शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहती, वह सामाजिक चेतना का रूप ले लेती है। शाहपुरा के शिक्षकों और राज्य कर्मचारियों की एक ऐसी ही जिद अब डेढ़ दशक से सामाजिक सरोकारों की पहचान बन चुकी है। 5 सितंबर 2011 से शुरू हुआ रक्तदान और पौधारोपण का यह सिलसिला 15वें पड़ाव तक पहुंच गया है।

स्थानीय निकाय चुनावों के कारण इस बार शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाला शिविर 17 सितंबर को राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कुंड गेट में आयोजित किया गया। यहां शिक्षकों, राज्य कर्मचारियों और समाजसेवियों ने मिलकर 94 यूनिट रक्तदान किया। खास बात यह रही कि रक्त देने वाले प्रत्येक व्यक्ति को गमले सहित पौधा भेंट किया गया। यानी एक ओर किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी बचाने के लिए रक्त दिया गया तो दूसरी ओर आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली का संकल्प भी लिया गया।

यह आयोजन महज एक दिन का रक्तदान शिविर नहीं था। इसके पीछे वर्षों से चलती आ रही वह सोच दिखाई दी, जिसमें सरकारी स्कूल का शिक्षक स्वयं को केवल बच्चों को पढ़ाने तक सीमित नहीं मानता। आयोजकों की यह पहल बताती है कि विद्यालय समाज से अलग कोई संस्था नहीं, बल्कि समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण पाठशाला है।

प्रधानाध्यापक की जिद बनी अभियान की पहचान

शाहपुरा के शिक्षकों और राज्य कर्मचारियों का यह अभियान एक छोटी-सी पहल के रूप में शुरू हुआ था। लेकिन आयोजकों ने इसे एक कार्यक्रम बनाकर छोड़ने के बजाय लगातार आगे बढ़ाने की जिद रखी। हर वर्ष रक्तदान और पौधारोपण को साथ जोड़कर इसे सामाजिक आंदोलन का रूप दिया गया।

इसी जिद का परिणाम है कि आज 15वां शिविर आयोजित हो चुका है। बदलते समय, व्यस्तताओं और अलग-अलग परिस्थितियों के बावजूद अभियान की निरंतरता नहीं टूटी। इस बार निकाय चुनावों के कारण 5 सितंबर के बजाय 17 सितंबर को आयोजन हुआ, लेकिन सेवा का सिलसिला जारी रहा।

शिक्षक का यह रूप इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह विद्यार्थियों को केवल किताबों में सेवा, त्याग और जिम्मेदारी के पाठ नहीं पढ़ा रहा, बल्कि स्वयं समाज के सामने उसका उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

‘अक्षरदान’ से ‘रक्तदान’ तक पहुंचा शिक्षक का सरोकार

अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने कहा कि रक्तदान जैसे आयोजन समाज में सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं। वहीं ब्लॉक शिक्षा अधिकारी महेश कुमार व्यास ने कहा कि शाहपुरा ब्लॉक के शिक्षक विद्यार्थियों को अक्षर ज्ञान देने के साथ अब रक्तदान के माध्यम से लोगों का जीवन बचाने में भी योगदान दे रहे हैं।

यह बात इस आयोजन की मूल भावना को सामने रखती है। शिक्षक की भूमिका केवल ब्लैकबोर्ड, किताब और परीक्षा तक सीमित नहीं है। वह बच्चों के व्यवहार और जीवन मूल्यों का भी निर्माण करता है। जब विद्यार्थी अपने शिक्षक को रक्तदान करते और पौधा लगाते देखते हैं तो सेवा उनके लिए किसी किताब की परिभाषा नहीं, बल्कि आंखों के सामने घटित होने वाला अनुभव बन जाती है।

पुलिस उपाधीक्षक नाना लाल सालवी ने कहा कि विद्यालयों में विद्यार्थियों को संस्कार दिए जाते हैं। ऐसे सामाजिक कार्यक्रमों को देखकर छात्र-छात्राओं में भी सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी तथा वे भविष्य में समाज और देश के अच्छे नागरिक बनेंगे।

एक बोतल रक्त, किसी परिवार की उम्मीद

रक्तदान की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि रक्तदाता को अक्सर यह पता भी नहीं होता कि उसके रक्त से किसकी जिंदगी बचेगी। किसी अस्पताल में दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को इसकी जरूरत हो सकती है, किसी प्रसूता को, किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज को या किसी ऐसे परिवार को जिसकी सारी उम्मीद अस्पताल की एक यूनिट रक्त पर टिकी हो।

ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. चेनाराम कुमावत ने शिक्षकों और कर्मचारियों की इस पहल की सराहना करते हुए रक्तदान को महत्वपूर्ण सामाजिक सेवा बताया। शाहपुरा जिला चिकित्सालय के प्रभारी अधिकारी डॉ. अशोक जैन भी कार्यक्रम में मौजूद रहे और उन्होंने आयोजन में सहयोग किया।

रक्त की एक बूंद के साथ धरती के नाम भी संदेश

इस शिविर की दूसरी खासियत पौधारोपण रही। अतिथियों ने विद्यालय परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण किया। इसके साथ ही रक्तदाताओं को गमले सहित पौधे भेंट किए गए।

इस तरह आयोजकों ने रक्तदान को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर संदेश दिया कि समाज के लिए जीवन बचाना जितना जरूरी है, उतना ही आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को बचाना भी।

उपखंड अधिकारी बनवारी लाल सिनसिनवार ने कहा कि रक्तदान और पौधारोपण दोनों मानवीय कार्य हैं। उन्होंने कहा कि अपने सेवा कार्यकाल के दौरान उन्होंने शाहपुरा के शिक्षकों और राज्य कर्मचारियों की इस सराहनीय पहल को लगातार देखा है। यह पहल अन्य लोगों के लिए भी अनुकरणीय है।

जन्मदिन भी मनाया, संदेश भी दिया

रक्तदान शिविर में जुड़वा बच्चों दिव्यांश और देवांशु का जन्मदिन भी खास अंदाज में मनाया गया। दोनों बच्चे अपने शिक्षक माता-पिता के साथ शिविर में पहुंचे और वहीं जन्मदिन मनाया।

एक तरफ बच्चों के जीवन का नया वर्ष शुरू हो रहा था और दूसरी तरफ उसी स्थान पर लोग किसी अनजान व्यक्ति को नया जीवन देने के लिए रक्तदान कर रहे थे। जन्मदिन के इस आयोजन ने शिविर के मानवीय पक्ष को और गहरा कर दिया।

शाहपुरा के बेटे का संदेश—यह काम प्रदेश के लिए गौरव

शाहपुरा मूल के निवासी और राजस्थान सरकार में प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया ने आयोजक देवीलाल बैरवा तथा सभी कर्मचारियों को बधाई संदेश भेजा। उन्होंने इस पुनीत कार्य को लगातार जारी रखने को शाहपुरा के लिए प्रदेश में गौरव की बात बताया।

यह संदेश इस बात का भी संकेत है कि स्थानीय स्तर पर शुरू हुई छोटी पहल जब निरंतरता और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ती है तो उसकी पहचान स्थानीय सीमाओं से बाहर तक पहुंचती है।

40वीं बार रक्तदान—सेवा अब आदत बन चुकी है

शिविर की सबसे प्रेरक तस्वीर शाहपुरा निवासी रामचंद्र बैरवा ने पेश की। उन्होंने 40वीं बार रक्तदान किया। किसी व्यक्ति का चार दशक तक रक्तदान के प्रति प्रतिबद्ध रहना अपने आप में सेवा की निरंतरता का उदाहरण है।

40वीं बार रक्तदान करने वाले रामचंद्र बैरवा की मौजूदगी ने शिविर में यह संदेश दिया कि रक्तदान केवल एक बार किया जाने वाला पुण्य कार्य नहीं, बल्कि नियमित सामाजिक जिम्मेदारी भी बन सकता है।

शिक्षक दिवस से शुरू हुआ सफर, अब समाज की पहचान

15वें रक्तदान शिविर तक पहुंचा यह अभियान शाहपुरा के लिए इसलिए खास है क्योंकि इसकी बुनियाद दिखावे पर नहीं, निरंतरता पर टिकी है। शिक्षक दिवस से शुरू हुई पहल अब रक्तदान, पौधारोपण, सामाजिक समरसता और विद्यार्थियों में संस्कार निर्माण का माध्यम बन गई है।

राजकीय स्कूल के शिक्षक जब कक्षा के बाहर निकलकर समाज के लिए रक्त देते हैं, पौधे लगाते हैं और दूसरों को भी प्रेरित करते हैं तो उनकी भूमिका ‘सरकारी कर्मचारी’ से आगे बढ़कर समाज निर्माता की हो जाती है।

शाहपुरा की इस पहल का सबसे बड़ा संदेश शायद यही है—किताब से ज्ञान दिया जा सकता है, लेकिन रक्त देकर किसी को जिंदगी दी जा सकती है। और पौधा लगाकर उस जिंदगी के लिए बेहतर भविष्य भी तैयार किया जा सकता है।

कार्यक्रम में क्षेत्रीय वन अधिकारी चतुर्भुज जटिया, शंकर सिंह राठौड़, किसान केसरी संघ अध्यक्ष सूर्य प्रकाश ओझा, पुखराज जोशी, नारायण लाल जाट, सलीम डायर, इस्माइल खान कायमखानी, नयन बुला, हरित शाहपुरा के प्रताप सिंह राणावत, जयप्रकाश शर्मा, महेश कोहली, सत्यनारायण खटीक, रमेश घूसर, पुष्पेंद्र कुमार घूसर, पूर्व मुख्य लेखा अधिकारी उदय लाल बैरवा, इकरामुल हक अंसारी, कैलाश कोली, आशीष राय, धनराज मीणा, मौलाना मुमताज, जगदीश जाट, स्नेहलता बैरवा, वर्षा व्यास, लाड़ कंवर, धर्मेंद्र सिंह सोदा, मदन माली, चंद्र प्रकाश जोशी, पूर्व मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी द्वारका प्रसाद जोशी, महावीर प्रसाद भील सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. परमेश्वर प्रसाद कुमावत ने किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!