54 इंच बाल बढ़ाए, कैंसर पीड़ित महिलाओं की मुस्कान के लिए किया दान; मंजू धाबाई ने पेश की मानवता की मिसाल

दो साल तक नहीं लगने दी बालों में कैंची, अब दूसरों के आत्मविश्वास के लिए समर्पित किया अपना संकल्प; भीलवाड़ा के राजेश सेन चला रहे हेयर डोनेशन का मिशन
शाहपुरा संवाद | मूलचन्द पेसवानी
शाहपुरा। किसी के लिए बाल खूबसूरती का प्रतीक होते हैं, तो किसी के लिए आत्मविश्वास और व्यक्तित्व की पहचान। लेकिन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही महिलाओं के लिए कीमोथेरेपी के दौरान बालों का झड़ना केवल शारीरिक बदलाव नहीं, बल्कि गहरी मानसिक पीड़ा का कारण भी बन सकता है। इलाज के दौरान आईने में बदलता चेहरा, सामाजिक जीवन में लोगों के बीच जाने की झिझक और अपनी पुरानी पहचान खोने का अहसास कई महिलाओं को भीतर तक प्रभावित करता है। ऐसी परिस्थितियों में यदि कोई अपने बालों को ही उनके आत्मविश्वास की नई वजह बनाने का संकल्प ले, तो यह सेवा की ऐसी मिसाल बन जाती है, जो समाज को संवेदनशीलता का वास्तविक अर्थ समझाती है।
भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा की बेटी और नर्सिंग ऑफिसर मंजू धाबाई ने इसी संवेदनशील सोच को अपने जीवन का मिशन बना लिया। कैंसर पीड़ित महिलाओं की पीड़ा को करीब से महसूस करने के बाद उन्होंने दो साल तक अपने बाल नहीं कटवाए। इस दौरान उनके बाल करीब 54 इंच तक लंबे हो गए। अब उन्होंने अपने लंबे बाल कैंसर पीड़ित महिलाओं के लिए दान कर दिए हैं, ताकि उनसे विग तैयार कर जरूरतमंद महिलाओं को उपलब्ध कराई जा सके। मंजू की यह पहल बताती है कि दूसरों के जीवन में उम्मीद जगाने के लिए हमेशा धन की ही जरूरत नहीं होती, कई बार अपना एक छोटा-सा त्याग भी किसी के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकता है।
अस्पताल में देखी पीड़ा, मन में जगा सेवा का संकल्प
मंजू धाबाई बताती हैं कि करीब दो साल पहले भीलवाड़ा के चिकित्सालय में उन्होंने कैंसर पीड़ित महिलाओं को देखा। उनसे बातचीत की और उनकी परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया। बीमारी से लड़ने के साथ-साथ बाल झड़ने के कारण होने वाली मानसिक परेशानी ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उन्हें महसूस हुआ कि बीमारी का इलाज कराना ही नहीं, बल्कि इस संघर्ष के दौरान मरीजों के आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को बनाए रखना भी बेहद जरूरी है।
यहीं से उनके मन में कैंसर पीड़ित महिलाओं के लिए कुछ करने की इच्छा पैदा हुई। उन्होंने परिवार के सदस्यों और अस्पताल में अपने स्टाफ साथियों से भी इस विषय पर चर्चा की। कई बार विचार किया कि आखिर वह ऐसा क्या कर सकती हैं, जिससे जरूरतमंद महिलाओं को वास्तविक मदद मिल सके।
इसी चिंतन के बीच उनके मन में अपने बाल दान करने का विचार आया। उन्होंने तय किया कि वह अपने बाल बढ़ाएंगी और फिर उन्हें कैंसर पीड़ित महिलाओं के लिए समर्पित कर देंगी। इसके बाद दो साल तक उन्होंने अपने बालों में कैंची नहीं लगवाई। यह इंतजार केवल बाल लंबे करने का नहीं था, बल्कि एक ऐसे संकल्प को पूरा करने की तैयारी थी, जिसका लाभ किसी अनजान महिला के जीवन में खुशी बनकर पहुंच सकता है।
अब अपने बाल दान करने के बाद मंजू संतुष्ट और उत्साहित हैं। उनके चेहरे पर खुशी इस बात की है कि जिस उद्देश्य के लिए उन्होंने लंबे समय तक धैर्य रखा, उस दिशा में वह अपना योगदान दे सकी हैं।
54 इंच बालों में छिपा है त्याग, धैर्य और संवेदना का संदेश
मंजू के बाल करीब 54 इंच लंबे हुए। हेयर एवं मेकअप आर्टिस्ट राजेश सेन के अनुसार, इनमें से लगभग 30 इंच बाल कैंसर पीड़ित महिलाओं के लिए उपयोग किए जा सकते हैं। उनके मुताबिक, इन बालों से करीब दो विग तैयार करने की संभावना है।
बाल दान करना देखने में भले ही एक साधारण कदम लगे, लेकिन इसके पीछे लंबे समय तक धैर्य रखना, अपने व्यक्तिगत आकर्षण से ऊपर उठकर दूसरों की जरूरत के बारे में सोचना और बिना किसी निजी लाभ के सेवा करना शामिल है। मंजू ने अपने इस कार्य से यही संदेश दिया है कि मानवता की सेवा के लिए बड़े पद, बड़े संसाधन या किसी संस्था से जुड़ा होना अनिवार्य नहीं है। यदि मन में संवेदना हो, तो व्यक्ति अपने स्तर पर भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है।
इलाज का खर्च भारी, विग की कीमत भी बनती है चुनौती
कैंसर का इलाज मरीज और उसके परिवार के लिए आर्थिक, शारीरिक तथा मानसिक रूप से कठिन दौर होता है। जांच, दवाइयों, अस्पताल में उपचार और आने-जाने के खर्च के बीच परिवारों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बाल झड़ने के बाद विग खरीदना भी कई मरीजों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है।
राजेश सेन के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाली विग की कीमत करीब 30 हजार रुपए तक हो सकती है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इसे खरीदना मुश्किल हो जाता है। प्राकृतिक बालों के दान से जरूरतमंद मरीजों के लिए विग तैयार करने की पहल उन्हें आर्थिक राहत देने के साथ सामाजिक जीवन में सहज महसूस करने में भी मदद कर सकती है।
हालांकि, हर कैंसर मरीज की जरूरत और पसंद अलग होती है। विग पहनना किसी के लिए आत्मविश्वास का सहारा हो सकता है, जबकि कोई अन्य विकल्प चुन सकता है। इसलिए ऐसी पहल का उद्देश्य मरीजों को विकल्प उपलब्ध कराना और उनकी इच्छा तथा गरिमा का सम्मान करना होना चाहिए।
राजेश सेन का मिशन, 100 से अधिक महिलाओं को किया प्रेरित
भीलवाड़ा के हेयर एवं मेकअप आर्टिस्ट राजेश सेन भी इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने हेयर डोनेशन को एक मिशन के रूप में आगे बढ़ाया है। उनके अनुसार, अब तक वह 100 से अधिक महिलाओं को कैंसर पीड़ितों के लिए बाल दान करने के लिए प्रेरित कर चुके हैं।
राजेश सेन बताते हैं कि मंजू धाबाई उनके संपर्क में आईं, तो उनके लंबे बाल देखकर उन्होंने उन्हें इस पुनीत कार्य के लिए प्रोत्साहित किया। मंजू का संकल्प और सेवा भावना इस अभियान के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया।
राजेश का मानना है कि समाज में ऐसे अनेक लोग हैं, जो कैंसर पीड़ितों की मदद करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि वे किस प्रकार योगदान दे सकते हैं। हेयर डोनेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाकर ऐसे लोगों को सेवा से जोड़ा जा सकता है। उनका प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाएं आगे आएं और अपने बाल दान कर जरूरतमंद मरीजों के लिए विग तैयार करवाने की प्रक्रिया में सहयोग करें।
नर्सिंग सेवा से आगे बढ़कर मानवता की सेवा
मंजू धाबाई वर्तमान में भीलवाड़ा के शास्त्रीनगर स्वास्थ्य केंद्र पर नर्सिंग ऑफिसर के पद पर सेवाएं दे रही हैं। इससे पहले वह शाहपुरा के राजकीय चिकित्सालय में भी सेवाएं दे चुकी हैं। उनके पति नारायणलाल गुर्जर भी नर्सिंग ऑफिसर के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। उनका इकलौता पुत्र आशीष चिकित्सक है और वर्तमान में एमडी की पढ़ाई कर रहा है।
शाहपुरा निवासी उनके पिता रामकिशन धाबाई मध्यमवर्गीय परिवार से थे। पारिवारिक संस्कारों और सेवा की भावना से प्रेरित होकर मंजू ने जो पहल की है, उससे उनके पीहर और ससुराल के साथ पूरे समाज को गौरवान्वित होने का अवसर मिला है।
मंजू का कहना है कि बाल दान करना उनके लिए इस मिशन का अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है। अब वह अन्य महिलाओं को भी हेयर डोनेशन के लिए प्रेरित करना चाहती हैं, ताकि कैंसर पीड़ितों की मदद का यह प्रयास व्यापक रूप ले सके।
कैसे बन सकते हैं हेयर डोनेशन अभियान का हिस्सा?
मंजू धाबाई और राजेश सेन की पहल से प्रेरित होकर अन्य लोग भी इस अभियान से जुड़ सकते हैं। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है—
- पहले जानकारी लें: बाल दान स्वीकार करने वाली विश्वसनीय संस्था, हेयर डोनेशन अभियान या विग तैयार करने वाले विशेषज्ञ से संपर्क करें।
- बालों की लंबाई और गुणवत्ता की पुष्टि करें: बालों की न्यूनतम लंबाई, कटिंग और पैकिंग के नियम संस्था के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए बाल कटवाने से पहले दिशा-निर्देश जान लें।
- बालों को सही तरीके से तैयार करें: निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार साफ, पूरी तरह सूखे और सुरक्षित तरीके से बांधे गए बाल ही दान करें। कटिंग से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
- विग जरूरतमंद तक पहुंचाने की व्यवस्था समझें: यह जानकारी लें कि दान किए गए बालों से विग कहां तैयार होगी और वह जरूरतमंद मरीजों तक किस प्रक्रिया से पहुंचेगी।
- जागरूकता फैलाएं: परिवार, मित्रों, सहकर्मियों और सोशल मीडिया के माध्यम से हेयर डोनेशन के बारे में जानकारी साझा करें, ताकि इच्छुक लोग सही प्रक्रिया से जुड़ सकें।
यह भी समझना जरूरी है कि हर प्रकार के बाल हर विग के लिए उपयुक्त नहीं होते। इसलिए दान से पहले संबंधित संस्था के मानकों की पुष्टि करना आवश्यक है।
एक छोटी पहल, किसी के लिए बड़ी उम्मीद
मंजू धाबाई की कहानी केवल 54 इंच लंबे बालों के दान की कहानी नहीं है। यह उस संवेदना की कहानी है, जो किसी दूसरे की पीड़ा देखकर मन में जन्म लेती है और फिर संकल्प, धैर्य तथा कर्म के जरिए समाज के सामने उदाहरण बन जाती है।
कैंसर से जूझ रही महिलाओं को उपचार के साथ सम्मान, अपनापन और भावनात्मक सहयोग की भी जरूरत होती है। ऐसे में मंजू जैसी महिलाओं की पहल यह विश्वास जगाती है कि समाज उनके संघर्ष में सहभागी बन सकता है। एक ओर डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी बीमारी से लड़ने में मदद करते हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे सामाजिक प्रयास मरीजों को अपने आत्मविश्वास और सामान्य जीवन की ओर लौटने का सहारा दे सकते हैं।
मंजू अब अपने बाल दान कर चुकी हैं, लेकिन उनका मिशन आगे बढ़ना बाकी है। यदि उनकी कहानी पढ़कर कुछ और महिलाएं बाल दान करने का संकल्प लेती हैं, कुछ लोग जरूरतमंद मरीजों के लिए विग उपलब्ध कराने में सहयोग करते हैं और समाज कैंसर पीड़ितों के प्रति अधिक संवेदनशील बनता है, तो यही इस पहल की सबसे बड़ी सफलता होगी।
संदेश साफ है—बाल दोबारा बढ़ सकते हैं, लेकिन किसी के चेहरे पर लौटाई गई मुस्कान और उसके भीतर जगाया गया आत्मविश्वास अनमोल है। मंजू धाबाई ने अपने बालों का दान कर यह साबित किया है कि सच्ची सुंदरता चेहरे या बालों में नहीं, बल्कि उस भावना में होती है जो किसी दूसरे के दर्द को अपना समझकर उसे कम करने का प्रयास करती है।




