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धर्मध्वजा स्थापना के साथ गूंजा हरि सेवा उदासीन आश्रम, वार्षिक वर्सी उत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन बोलेकृ सेवा, सुमिरन और विनम्रता से ही मिलता है ईश्वर का सान्निध्य

भीलवाड़ा। मूलचन्द पेसवानी
हरि सेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में आयोजित चार दिवसीय 79वें वार्षिक वर्सी उत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को धर्म, भक्ति और श्रद्धा का अनुपम संगम देखने को मिला। आश्रम परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन, संत समागम एवं धर्मध्वजा (झंडा साहब) की स्थापना के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने संत-महात्माओं के सान्निध्य में धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
सायंकाल आयोजित धर्मध्वजा स्थापना समारोह में उदासीन परंपरा के अनुसार झंडा साहब का विधि-विधान से पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संत-महात्माओं ने धर्मध्वजा की स्थापना कर सनातन संस्कृति की रक्षा और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश दिया। भजनों और बैंड की मधुर धुनों पर श्रद्धालु भक्ति भाव से झूम उठे तथा उदासीन निर्वाण मंडल के संतों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर उदासीन निर्वाण मंडल के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने कहा कि धर्मध्वजा केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि सनातन धर्म की मर्यादाओं, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक श्रद्धालु का कर्तव्य है कि वह धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलते हुए समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे।

उत्सव के दौरान बाबा हरीराम साहब की 79वीं वार्षिक वर्सी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाई गई। संतों एवं श्रद्धालुओं ने गुरुजनों की विशेष स्तुति कर उनके आदर्शों को स्मरण किया। नगर की विभिन्न बस्तियों में अन्नक्षेत्र सेवा के माध्यम से जरूरतमंदों को भोजन प्रसाद वितरित किया गया।
प्रातःकालीन सत्र में महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में संत मयाराम, संत राजाराम, संत गोविंदराम, संत ईशानराम, संत केशवराम, संत सुयज्ञराम, बालक मिहिर सहित ट्रस्टीगण, पदाधिकारी एवं श्रद्धालुओं ने गुरु वंदना, ध्यान एवं नितनेम किया। इसके पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-यज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें विश्व शांति, समाज कल्याण एवं मानवता की मंगलकामना की गई।
सत्संग के दौरान स्वामी हंसराम उदासीन ने भजन ष्नामे प्रीत नारायण लागी, जैसे सुभाय बनो बैरागीष् प्रस्तुत करते हुए कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जब व्यक्ति में अभिमान उत्पन्न होता है तो ईश्वर स्वयं उसका अहंकार दूर करते हैं। उन्होंने कहा कि जिसके हृदय में नारायण का वास होता है, उसे किसी अन्य सहारे की आवश्यकता नहीं रहती। सेवा, सुमिरन और गुरु कृपा से वह भी प्राप्त हो सकता है जो भाग्य में लिखा नहीं होता।
संत-महात्माओं एवं भगत मंडलियों ने बाबा हरीराम, बाबा शेवाराम, बाबा गंगाराम तुहिंजा बचड़ा आहियूं तुहिंजे चरणन में सिर था निवायूं तथा याद करूं था हरदम तोखे सुबह ऐहिं शाम सहित अनेक भक्तिमय सिंधी एवं हिंदी भजनों की प्रस्तुति देकर गुरु महिमा का गुणगान किया। पूरे आश्रम परिसर में राम नाम की धुन गूंजती रही और श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे रहे।


उत्सव में महंत स्वरूपदास उदासीन (अजमेर), महंत हनुमानराम उदासीन (पुष्कर), स्वामी मोहनदास चंदन (इंदौर), स्वामी तुलसी कलतारी (भोपाल) सहित उदासीन निर्वाण मंडल के अनेक संत-महात्माओं ने उपस्थित संगत को दर्शन एवं आशीर्वाद प्रदान किया। सायंकाल नितनेम, हनुमान चालीसा, श्री मात्रा साहब पाठ, सत्संग तथा विभिन्न भगत मंडलियों के भजन-कीर्तन देर रात तक चलते रहे। संत-महात्माओं के सम्मान में भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

आज होंगे ये प्रमुख आयोजन
उत्सव के तृतीय दिवस गुरूवार को प्रातः नित्य हवन-यज्ञ, मंडल पूजन, अन्नक्षेत्र सेवा एवं संतों के प्रवचन आयोजित होंगे। प्रथम दिवस से प्रारंभ हुए श्री श्रीचंद्र सिद्धांत सागर पाठ की पूर्णाहुति के बाद भोग लगाया जाएगा तथा श्रीरामचरितमानस के अखंड पाठ का शुभारंभ होगा। संत-महात्माओं के भंडारे के साथ सायंकाल श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के आश्रम पहुंचने पर भव्य स्वागत किया जाएगा। भगवान श्री जगन्नाथ एकादशी तक आश्रम में विश्राम हेतु विराजमान रहेंगे, जिसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

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