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शिक्षक के तबादले पर फूटा छात्रों का गुस्सा, हाईवे पर दो घंटे तक लगा जाम

एनएच-148डी पर अरवड़ के विद्यार्थियों का उग्र प्रदर्शन, बोले—‘शिक्षक नहीं तो पढ़ाई कैसे होगी?’

शाहपुरा। शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक की कमी और प्रिय शिक्षक के तबादले के विरोध में मंगलवार सुबह अरवड़ गांव के विद्यार्थियों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, अरवड़ के छात्र-छात्राओं ने ग्रामीणों के समर्थन से शाहपुरा–बिजयनगर–केकड़ी मार्ग स्थित नेशनल हाईवे-148डी पर शनि महाराज चौराहे पर चक्का जाम कर दिया। करीब दो घंटे तक चले इस प्रदर्शन के कारण हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और लगभग दो किलोमीटर तक जाम की स्थिति बन गई।

विद्यार्थियों का कहना था कि विद्यालय में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसे में शिक्षक रामेश्वर चौधरी का स्थानांतरण कर दिए जाने से उनकी पढ़ाई पर सीधा असर पड़ेगा। छात्रों ने आरोप लगाया कि पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। यदि मौजूदा शिक्षकों का भी तबादला कर दिया जाएगा तो शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी।

मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं विद्यालय से निकलकर शनि महाराज चौराहे पर पहुंचे और सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते ग्रामीण भी आंदोलन में शामिल हो गए। विद्यार्थियों ने सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए शिक्षक का स्थानांतरण निरस्त करने तथा विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की।

प्रदर्शन के चलते भीम–उनियारा मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। हाईवे के दोनों ओर ट्रकों, बसों, निजी वाहनों और अन्य यात्री वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन विद्यार्थियों का कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

घटना की सूचना मिलते ही फुलियाकलां से तहसीलदार, थाना अधिकारी पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने विद्यार्थियों, ग्रामीणों और विद्यालय प्रशासन से बातचीत कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। काफी देर तक चली समझाइश के बाद विद्यालय के प्रधानाचार्य, तहसीलदार एवं पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों और ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों तक गंभीरता से पहुंचाया जाएगा तथा शिक्षक की कमी और स्थानांतरण के मुद्दे का सकारात्मक समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।

प्रशासन के आश्वासन के बाद करीब दो घंटे से जारी चक्का जाम समाप्त कराया गया और यातायात को सुचारु रूप से बहाल किया गया। इसके बाद हाईवे पर फंसे वाहनों की आवाजाही शुरू हुई और लोगों ने राहत की सांस ली।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा प्रमुखता से सामने ला दिया है। विद्यार्थियों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें आंदोलन का शौक नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा का अधिकार चाहिए। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि वह विद्यार्थियों की इस जायज मांग पर कितना शीघ्र और प्रभावी निर्णय लेता है।

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