पटवारियों का आंदोलन शुरू, कलेक्टर पर तानाशाही का आरोप
30 जुलाई से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी, आज से काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध

शाहपुरा। भीलवाड़ा जिले में पटवारियों और कानूनगों ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजस्थान पटवार-कानूनगो संघ के आह्वान पर सोमवार से जिलेभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू हो गया। आंदोलन के तहत सभी पटवारी एवं गिरदावर (कानूनगो) काली पट्टी बांधकर विरोध जता रहे हैं तथा प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक एक घंटे का सांकेतिक कार्य बहिष्कार करेंगे। यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो 30 जुलाई से पूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
संघ के पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर पर “तानाशाहीपूर्ण रवैया” अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासनिक निर्णयों में कर्मचारियों के पक्ष को सुने बिना कठोर कार्रवाई की जा रही है, जिससे राजस्व कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
आंदोलन का मुख्य कारण शाहपुरा तहसील के नरसिंहपुरा स्थित कोटड़ी भट्टी कांड से जुड़े मामले में हल्का पटवारी हरदेव बैरवा को जिला कलेक्टर द्वारा सेवा से बर्खास्त किए जाने की कार्रवाई है। संघ का कहना है कि बिना निष्पक्ष जांच और समुचित प्रक्रिया अपनाए की गई इस कार्रवाई से पूरे पटवारी वर्ग में असंतोष व्याप्त है। संगठन ने इस निर्णय को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

सोमवार से शुरू हुए आंदोलन के तहत जिलेभर के पटवारी एवं कानूनगो अपने-अपने कार्यालयों में काली पट्टी बांधकर कार्य कर रहे हैं। साथ ही प्रतिदिन दोपहर 12 से 1 बजे तक सांकेतिक कार्य बहिष्कार कर प्रशासन के प्रति अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। इस दौरान आवश्यक कार्यों का भी सीमित रूप से ही निष्पादन किया जा रहा है।
संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि 30 जुलाई से जिलेभर के सभी पटवारी एवं कानूनगो पूर्ण कार्य बहिष्कार पर चले जाएंगे, जिससे राजस्व रिकॉर्ड संधारण, नामांतरण, सीमांकन, गिरदावरी, प्रमाण-पत्रों के सत्यापन सहित अनेक राजस्व कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
पटवार-कानूनगो संघ ने प्रशासन से कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए बर्खास्तगी के आदेश पर पुनर्विचार करने तथा संवाद के माध्यम से विवाद का समाधान निकालने की मांग की है। वहीं आंदोलन शुरू होने से जिले के राजस्व कार्यों पर असर पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है।




