भामाशाह रामेश्वर काबरा ने दी सेवा की सौगात ऑपरेशन थिएटर की सुविधाओं को मिलेगा विस्तार
भारत विकास परिषद की पहल, मरीजों को होगा लाभ सेवा की मिसाल बनी पहल, आयुर्वेद को मिला संबल

आयुर्वेद को आधुनिक उपचार की नई ताकत- शाहपुरा अस्पताल को 80 हजार के शल्य उपकरण
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
आयुर्वेद केवल उपचार की प्राचीन पद्धति नहीं, बल्कि भारतीय जीवन दर्शन और स्वस्थ जीवन की वैज्ञानिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। इसी परंपरा को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ते हुए शाहपुरा में समाजसेवा की एक सराहनीय पहल सामने आई है। राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय, शाहपुरा में आयोजित गरिमामयी समारोह में भारत विकास परिषद के प्रांतीय संरक्षक एवं भामाशाह रामेश्वर काबरा ने करीब 80 हजार रुपए की लागत के शल्य कक्ष (ऑपरेशन थिएटर) के अत्याधुनिक उपकरण चिकित्सालय को भेंट किए।
इस पहल से जहां राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय की चिकित्सा सुविधाओं को मजबूती मिलेगी, वहीं शाहपुरा और आसपास के रोगियों को उपचार के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। खास बात यह रही कि सेवा की यह सौगात किसी औपचारिक घोषणा तक सीमित नहीं रही, बल्कि उपकरणों के रूप में सीधे चिकित्सालय की व्यवस्था का हिस्सा बन गई।

भगवान धनवंतरी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान धनवंतरी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं फीता काटकर किया गया। भारतीय चिकित्सा परंपरा में भगवान धनवंतरी को आरोग्य और चिकित्सा का देवता माना जाता है। ऐसे में उनके समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुआ कार्यक्रम आयुर्वेद, सेवा और सामाजिक सरोकारों के त्रिवेणी संगम का प्रतीक बना।
उपकरण भेंट किए जाने के बाद चिकित्सालय स्टाफ की ओर से भामाशाह रामेश्वर काबरा का अभिनंदन एवं सम्मान किया गया। चिकित्सालय में लंबे समय से सेवा और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की जरूरत को देखते हुए इस सहयोग को महत्वपूर्ण माना गया।
भारत विकास परिषद की प्रेरणा बनी सेवा की वजह
भारत विकास परिषद शाखा शाहपुरा के अध्यक्ष पवन बांगड़ ने बताया कि परिषद की प्रेरणा से रामेश्वर काबरा द्वारा शल्य कक्ष के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि इस सहयोग का सीधा लाभ शाहपुरा सहित आसपास के क्षेत्र से आने वाले रोगियों को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सामाजिक संस्थाओं और भामाशाहों के सहयोग से सरकारी चिकित्सा संस्थानों में सुविधाओं का विस्तार किया जा सकता है। इससे सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलती है और आमजन को अपने ही क्षेत्र में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने की राह आसान होती है।
‘सेवा कार्य में भारत विकास परिषद का महत्वपूर्ण स्थान’
मुख्य अतिथि एवं भामाशाह रामेश्वर काबरा ने भारत विकास परिषद के सेवा कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सेवा के क्षेत्र में परिषद की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में वे पिछले कई वर्षों से कार्य कर रहे हैं और समाज के जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना हमेशा उनकी प्राथमिकताओं में रहा है।
काबरा ने शाहपुरा के आयुर्वेद चिकित्सालय में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली और आयुष सेंटर की व्यवस्थाओं को सराहनीय बताते हुए कहा कि यहां आने वाले रोगियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए समाज के लोगों को भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शाहपुरा के आयुर्वेद चिकित्सालय से अब मरीजों को इन नए उपकरणों के माध्यम से और अधिक लाभ मिल सकेगा। उनका उद्देश्य केवल उपकरण देना नहीं, बल्कि चिकित्सा सेवा को मजबूत करने में अपनी ओर से योगदान देना है।
‘सेवा के लिए चाहिए संवेदना, कोई पैमाना नहीं’
कार्यक्रम में रजनीकांत आचार्य ने सेवा की भावना को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि सेवा कार्य करने का कोई निश्चित पैमाना नहीं होता। इसके लिए धन से ज्यादा जरूरी है मन में सेवा का जज्बा और पीड़ित व्यक्ति के प्रति करुणा का भाव।
उन्होंने कहा कि रामेश्वर काबरा ने चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग देकर केवल एक संस्था की मदद नहीं की है, बल्कि समाज को सेवा के लिए प्रेरित करने का काम किया है। ऐसे प्रयासों से समाज में सहयोग और संवेदनशीलता की भावना मजबूत होती है।
आयुर्वेद के साथ आधुनिक सुविधा का मेल
चिकित्सालय के डॉ. नारायण सिंह एवं डॉ. विनीत कुमार ने शाहपुरा के आयुर्वेद चिकित्सालय में उपलब्ध संसाधनों और रोगियों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने चिकित्सालय की वर्तमान चिकित्सा व्यवस्था, उपचार सुविधाओं और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने शाहपुरा में स्वीकृत संभागीय स्तर के आयुष चिकित्सालय की जानकारी भी दी। इस परियोजना के आकार लेने के साथ शाहपुरा और आसपास के क्षेत्र में आयुष एवं आयुर्वेद चिकित्सा सुविधाओं के और अधिक विस्तार की उम्मीद है।
नए शल्य उपकरणों की उपलब्धता को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आयुर्वेद की परंपरागत चिकित्सा पद्धति को आधुनिक चिकित्सा संसाधनों से जोड़ने से चिकित्सालय की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और मरीजों को उपचार के लिए अधिक सुविधाजनक वातावरण मिल सकेगा।
भामाशाहों की भागीदारी से मजबूत होगी सरकारी चिकित्सा व्यवस्था
शाहपुरा जैसे क्षेत्र में सरकारी चिकित्सालयों को आधुनिक संसाधनों से लैस करने में समाज की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। सरकारी बजट से मिलने वाली सुविधाओं के साथ यदि स्थानीय भामाशाह, सामाजिक संगठन और सेवा संस्थाएं भी आगे आएं तो चिकित्सा व्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।
रामेश्वर काबरा की ओर से करीब 80 हजार रुपए के उपकरण उपलब्ध कराना इसी सोच का उदाहरण है। यह सहयोग न केवल वर्तमान मरीजों के लिए उपयोगी होगा, बल्कि आने वाले समय में भी चिकित्सालय की सेवाओं को बेहतर बनाने में काम आएगा।
आयुर्वेद के प्रति बढ़ती रुचि के दौर में ऐसे प्रयासों की अहमियत और बढ़ जाती है। जरूरत इस बात की है कि आयुर्वेद चिकित्सा को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक सुविधाओं और मजबूत आधारभूत संसाधनों के साथ आगे बढ़ाया जाए।
सेवा सम्मान से नहीं, संस्कार से चलती है
कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि समाज सेवा किसी पुरस्कार या सम्मान की अपेक्षा से नहीं, बल्कि संस्कार और संवेदना से संचालित होती है। किसी अस्पताल में उपकरण उपलब्ध कराना बाहर से देखने पर भले ही आर्थिक सहयोग लगे, लेकिन उसके पीछे कई मरीजों को बेहतर इलाज मिलने की संभावनाएं जुड़ी होती हैं।
समारोह में भारत विकास परिषद के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर काबरा, प्रांतीय सदस्य रजनीकांत आचार्य, सत्यनारायण झंवर, सुमित जागोटिया, चिकित्सालय के डॉ. नारायण सिंह, डॉ. विनीत कुमार, पुष्पेन्द्र जीनगर, भूपेन्द्र धोबी, रिंकू धाकड़, शीतल शर्मा, कालूराम महावर, राकेश रेगर एवं सीताराम बैरवा सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
भारत विकास परिषद शाखा शाहपुरा के अध्यक्ष पवन बांगड़, प्रांतीय सदस्य जयदेव जोशी, सचिव कैलाश गोठवाल, सत्यनारायण सेन, जयशंकर पाराशर, सोमेश्वर व्यास, यशपाल पाटनी, रामेश्वर लाल बसेर एवं प्रियकांत शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
शाहपुरा के आयुर्वेद चिकित्सालय में हुआ यह आयोजन इस बात का संदेश दे गया कि जब चिकित्सा, आयुर्वेद और समाजसेवा एक साथ कदम बढ़ाते हैं तो सुविधा का लाभ केवल एक मरीज को नहीं, बल्कि पूरे समाज को मिलता है। सेवा की यह पहल निश्चित रूप से आयुर्वेद को प्रोत्साहन देने के साथ अन्य भामाशाहों और सामाजिक संगठनों को भी जनहित के कार्यों में आगे आने की प्रेरणा देगी।




