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“कैंसर से बचाव की शुरुआत अस्पताल नहीं, आपकी रसोई से!”

हंसराज चौधरी ने खान-पान से लेकर तनाव और नियमित जांच तक समझाए बचाव के तरीके

कैंसर से डरिए नहीं, अपनी रसोई और दिनचर्या बदलिए!

हंसराज चौधरी ने खोले बचाव के कई राज, बोले—‘प्रकृति के जितना करीब रहेंगे, कैंसर से उतना ही दूर रहेंगे’

शाहपुरा। कैंसर… नाम सुनते ही आज भी अधिकांश लोगों के मन में डर, चिंता और बेचैनी पैदा हो जाती है। लेकिन क्या कैंसर से बचाव केवल दवाइयों और अस्पतालों तक सीमित है? क्या हमारी रसोई, खान-पान, दिनचर्या और जीवनशैली भी इस बीमारी से बचाव में बड़ी भूमिका निभा सकती है? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए भारत विकास परिषद, शाखा शाहपुरा की ओर से ‘कैंसर रोग : बचाव, जागरूकता एवं उपचार’ विषय पर महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

शाहपुरा के गांधीपुरी स्थित आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित इस संगोष्ठी में मुख्य वक्ता वैद्य हंसराज चौधरी, संस्थापक अध्यक्ष श्रीनवग्रह आश्रम सेवा संस्थान, मोतीबोर का खेड़ा, रायला ने कैंसर के कारणों, बचाव, खान-पान, जीवनशैली, तनाव, शुद्धता और समय पर जांच सहित विभिन्न पहलुओं पर बेहद बारीकी से विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने एक-एक बिंदु को सरल भाषा में समझाते हुए लोगों को अपनी दिनचर्या और रसोई में बदलाव करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम में भारत विकास परिषद के प्रांतीय पदाधिकारी जयदेव जोशी तथा आदर्श विद्या मंदिर प्रबंध समिति के सचिव विजय सिंह मौजूद रहे।

‘कैंसर से बचना है तो शुरुआत रसोई से करें’

भारत विकास परिषद के अध्यक्ष पवन बांगड़ ने अतिथियों एवं उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक दौर में कैंसर की बढ़ती भयावहता चिंता का विषय है। इसी को ध्यान में रखते हुए परिषद ने नवाचार के रूप में यह संगोष्ठी आयोजित की है। उन्होंने कहा कि जागरूकता के ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि आमजन को बीमारी से बचाव के प्रति सजग किया जा सके।

कार्यक्रम का संचालन परमेश्वर कुमावत ने किया तथा उन्होंने मुख्य वक्ता वैद्य हंसराज चौधरी का परिचय प्रस्तुत किया।

इसके बाद जैसे ही हंसराज चौधरी ने कैंसर पर बोलना शुरू किया, उन्होंने बीमारी के उपचार से पहले बचाव और जीवनशैली पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वस्थ रहने की शुरुआत अस्पताल से नहीं, बल्कि हमारी रसोई से होती है।

उन्होंने लोगों को विशेष रूप से रिफाइंड तेल और बाजार के नमक के उपयोग को लेकर सावधान किया। उनका कहना था कि भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान देना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने घर में उपयोग होने वाली खाद्य सामग्री के चयन को लेकर लोगों को सजग रहने का आह्वान किया।

‘सीजनल, रीजनल और ऑरिजनल भोजन को बनाएं जीवन का हिस्सा’

हंसराज चौधरी ने कैंसर से बचाव के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संयमित जीवन और संयमित आहार स्वस्थ जीवन की बुनियाद हैं। उन्होंने विशेष रूप से सीजनल, रीजनल और ऑरिजनल आहार को अपनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि जिस मौसम में जो खाद्य पदार्थ प्रकृति उपलब्ध कराती है, उसका सेवन शरीर के लिए अधिक अनुकूल होता है। स्थानीय और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को भोजन का हिस्सा बनाने की जरूरत है। बाजार में उपलब्ध अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और फास्ट फूड की बजाय घर तथा खेत से मिलने वाले उत्पादों को प्राथमिकता देने की उन्होंने सलाह दी।

उनका कहना था कि आज स्वाद और दिखावे के पीछे भागते हुए लोग अपनी सेहत को नजरअंदाज कर रहे हैं। जबकि स्वस्थ रहने के लिए बहुत बड़े खर्च की आवश्यकता नहीं, बल्कि सही चीज को सही समय पर अपनाने की समझ जरूरी है।

दिखावे पर खर्च कम, भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान ज्यादा

सामाजिक जीवन में बढ़ते दिखावे और आडंबर पर तंज कसते हुए चौधरी ने कहा कि लोग कई बार ऐसे आयोजनों और दिखावे में बड़ी राशि खर्च कर देते हैं, जिसका वास्तविक जीवन में कोई स्थायी लाभ नहीं होता। यदि इसी धन का कुछ हिस्सा अपने खान-पान की गुणवत्ता सुधारने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में लगाया जाए तो जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रकृति से दूरी बढ़ने के साथ जीवनशैली संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। उनका संदेश स्पष्ट था—प्रकृति के जितना करीब रहेंगे, उतना ही स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ेंगे।

‘बीमारी होने पर घबराएं नहीं, जागरूक होकर रास्ता तलाशें’

कैंसर रोग को लेकर समाज में व्याप्त भय का उल्लेख करते हुए हंसराज चौधरी ने कहा कि बीमारी का नाम सुनकर घबराने के बजाय जागरूकता और उचित मार्गदर्शन के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने आयुर्वेद के माध्यम से उपलब्ध उपायों और जीवनशैली सुधार की संभावनाओं की जानकारी दी।

उन्होंने लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच के प्रति जागरूक करते हुए कैंसर से संबंधित रक्त जांच कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि समय रहते शरीर में होने वाले बदलावों का पता चल जाए तो व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को लेकर आवश्यक कदम उठा सकता है।

उन्होंने कहा कि जांच केवल बीमारी खोजने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को सुधारने और संवारने का अवसर भी है।

महिलाओं और युवतियों को भी किया जागरूक

संगोष्ठी में महिलाओं और युवतियों के स्वास्थ्य को लेकर भी विशेष रूप से चर्चा की गई। हंसराज चौधरी ने खान-पान, पहनावे, स्वच्छता, तनावमुक्त जीवन और जागरूकता जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने महिलाओं और युवतियों से कैंसर की रोकथाम को लेकर भारत सरकार की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों से जुड़ने और अपने आसपास भी जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि परिवार में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यदि घर की महिला खान-पान और स्वास्थ्य को लेकर जागरूक होगी तो उसका सकारात्मक असर पूरे परिवार पर पड़ेगा।

हजारों मरीजों को उपचार और मार्गदर्शन का दावा

श्रीनवग्रह आश्रम सेवा संस्थान, मोतीबोर का खेड़ा, रायला में अब तक हजारों कैंसर रोगियों के सफल उपचार एवं मार्गदर्शन का अनुभव होने की जानकारी भी संगोष्ठी में साझा की गई। चौधरी ने अपने अनुभवों के आधार पर लोगों को बीमारी के प्रति भयभीत होने की बजाय जागरूक रहने और समय पर उचित मार्गदर्शन लेने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ लड़ाई केवल अस्पतालों और चिकित्सकों की जिम्मेदारी नहीं है। हर व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में सुधार कर इस लड़ाई में भागीदार बनना होगा।

संगोष्ठी का संदेश—इलाज से पहले बचाव जरूरी

पूरी संगोष्ठी का सार यही रहा कि कैंसर को लेकर डरने की बजाय उसके प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है। खान-पान में संयम, प्राकृतिक और स्थानीय खाद्य पदार्थों का उपयोग, फास्ट फूड से दूरी, तनाव कम करना, स्वच्छता का ध्यान रखना, प्रकृति के करीब रहना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना स्वस्थ जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

भारत विकास परिषद की इस पहल ने शाहपुरा में कैंसर जैसे गंभीर विषय पर बात को अस्पताल की चारदीवारी से निकालकर घर की रसोई और रोजमर्रा की जिंदगी तक पहुंचाने का काम किया।

कार्यक्रम के अंत में भारत विकास परिषद के प्रांतीय पदाधिकारी जयदेव जोशी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।

संगोष्ठी ने एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर छोड़ दिया—हम बीमारी आने का इंतजार करेंगे या बीमारी से बचने की शुरुआत आज से ही करेंगे?

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