
कोटड़ी।राजेन्द्र बबलू पोखरना
मेवाड़ के ऐतिहासिक धाम कोटड़ी श्याम परिसर में शीतल गच्छ के मेवाड़ केसरी पूज्य प्रवर्तक श्री मोहनलाल जी मसा का 39वां पुण्य स्मृति दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया। मेवाड़ गौरव एवं प्रखर वक्ता रवीन्द्र मुनि जी मसा के सानिध्य में आयोजित गुणानुवाद सभा में विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और संतश्री के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मीठा लाल सिंघवी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में राजेन्द्र गोखरू, कंवर लाल सूर्या, लक्ष्मण सिंह बाबेल एवं धर्मचन्द रातड़िया उपस्थित रहे। विशेष वक्ता भूपेन्द्र पगारिया, चन्द्र सिंह खारीवाल, शिव पगारिया एवं सुशील आंचलिया कनेरा ने संतश्री के जीवन, व्यक्तित्व, त्याग, तपस्या और धर्म प्रभावना पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ निशा डांगी, ममता पोखरना, दिव्या रूगलेचा एवं अनिता सिंघवी द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ। अनिता पोखरना, अंजू लोढ़ा, सुनीता पोखरना एवं सुलेखा पोखरना ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

गुरु के आदर्शों को जीवन में उतारना ही वास्तविक श्रद्धांजलि
गुणानुवाद सभा को संबोधित करते हुए मेवाड़ गौरव रवीन्द्र मुनि जी मसा ने कहा कि संतों की स्मृति केवल किसी एक दिन उन्हें याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का अवसर है। पूज्य प्रवर्तक श्री मोहनलाल जी मसा ने अपने जीवन में त्याग, तपस्या, संयम और मानव सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया। उनके विचार और संस्कार आज भी समाज को दिशा देने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति की पहचान धन-दौलत से नहीं, बल्कि उसके विचार, व्यवहार और संस्कारों से होती है। गुरु के चरणों में सच्ची श्रद्धा तभी सार्थक है, जब उनके सिद्धांतों को जीवन में उतारा जाए। समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और एकता बनाए रखना तथा जरूरतमंदों की सेवा करना ही संतों के प्रति वास्तविक सम्मान है।
रवीन्द्र मुनि ने कहा कि आज मनुष्य भौतिक सुखों की दौड़ में मानसिक शांति खोता जा रहा है। ऐसे समय में संतों की वाणी जीवन को सही दिशा देने का कार्य करती है। धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि आचरण की शुद्धता, अहिंसा और दूसरों के प्रति करुणा ही धर्म का वास्तविक स्वरूप है।
उन्होंने युवाओं से संतों के जीवन और आदर्शों से प्रेरणा लेकर संस्कारवान समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरु शरीर से भले ही हमारे बीच नहीं हों, लेकिन उनके विचार और आदर्श सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
रवीन्द्र मुनि को ‘युवा प्रणेता, क्रांतिवीर’ पदवी से अलंकृत किया
कार्यक्रम के दौरान समस्त संघों की ओर से रवीन्द्र मुनि जी मसा को आदर की चादर ओढ़ाकर ‘युवा प्रणेता, क्रांतिवीर’ की पदवी से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष निर्मल लोढ़ा, संरक्षक नवरतनमल पोखरना सहित सीमा डांगा, विजय लक्ष्मी लोढ़ा, लक्ष्मी डांगी, श्रुति लोढ़ा, अविनाश लोढ़ा, सुरभी लोढ़ा, प्रथम जैन सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए पदाधिकारियों ने संबोधित करते हुए संतश्री के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित किए।
गुणानुवाद सभा का संचालन चातुर्मास समिति के अध्यक्ष शान्तिलाल पोखरना ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने आयोजन को भव्य एवं भावपूर्ण बना दिया।




