शिकागो से राष्ट्रपति भवन तक गूंजा शौर्य, अमली कलां में तिरंगे संग निकली सम्मान रैली

शाहपुरा। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के अमर नायक एवं युद्धवीर रामेश्वरलाल त्रिपाठी के शौर्य और बलिदान को नमन करते हुए उनके पैतृक गांव अमली कलां में सैन्य सम्मान तिरंगा रैली निकाली गई। रामेश्वरलाल त्रिपाठी को अमेरिका के शिकागो शहर में विशेष सम्मान मिलने तथा राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किए जाने की गौरवपूर्ण उपलब्धि पर आयोजित इस रैली में बारिश भी देशभक्ति के जज्बे को नहीं रोक सकी।
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय अमली कलां के विद्यार्थियों और विद्यालय स्टाफ ने बारिश के बीच पूरे उत्साह के साथ हाथों में तिरंगा थामकर रैली निकाली। नन्हे हाथों में लहराता तिरंगा और देशभक्ति से ओतप्रोत नारों ने गांव के माहौल को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया। विद्यार्थी पूरे जोश के साथ “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “अमली का एक ही लाल—रामेश्वरलाल” जैसे नारों का उद्घोष करते हुए आगे बढ़े।

बारिश में भी नहीं डिगा देशभक्ति का जज्बा
तिरंगा रैली विद्यालय परिसर से रवाना होकर गांव के प्रमुख मार्गों से गुजरी। बारिश के बावजूद विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। ग्रामीणों ने भी रैली का स्वागत करते हुए वीर सपूत की वीरगाथा को नमन किया। गांव की गलियों में तिरंगे और देशभक्ति नारों की गूंज ने वातावरण को भावुक और गौरवपूर्ण बना दिया।
रैली के दौरान विद्यार्थियों के चेहरों पर देश के वीर जवान के प्रति सम्मान साफ दिखाई दे रहा था। ग्रामीणों के लिए भी यह अवसर गर्व का रहा, क्योंकि अमली कलां की धरती से जुड़े युद्धवीर रामेश्वरलाल त्रिपाठी ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अदम्य साहस और वीरता का परिचय देकर गांव का नाम देशभर में गौरवान्वित किया।
विद्यार्थियों को सुनाई वीरता की गाथा
तिरंगा रैली वापस विद्यालय परिसर पहुंची, जहां व्याख्याताओं ने विद्यार्थियों को 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में युद्धवीर रामेश्वरलाल त्रिपाठी के अदम्य साहस, शौर्य और सर्वोच्च बलिदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विद्यार्थियों को बताया गया कि देश की रक्षा के लिए सैनिकों का समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
इस अवसर पर उनके अमेरिका के शिकागो शहर में हुए विशेष सम्मान तथा राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्वारा किए गए सम्मान की जानकारी भी विद्यार्थियों को दी गई। शिक्षकों ने कहा कि ऐसे वीरों की गाथाएं केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए राष्ट्रप्रेम, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा हैं।
अमली के लाल को नमन
कार्यक्रम का संचालन ऋतुराज दाधीच ने किया। इस दौरान प्रधानाचार्य नीलम, उप प्रधानाचार्य कृष्ण चंद्र पाठक, ऋतुराज दाधीच, जय प्रकाश, सरोज राठौड़, शत्रुघन सिंह, रेखा जैन, अन्नू कुमारी सहित विद्यालय स्टाफ, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
अमली कलां में आयोजित यह तिरंगा रैली केवल एक सम्मान कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस वीर सपूत की स्मृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प भी बनी। बारिश की बूंदों के बीच लहराता तिरंगा और गूंजते देशभक्ति के नारे यही संदेश दे रहे थे कि देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों की गाथा कभी भुलाई नहीं जा सकती।




