
मूलचन्द पेसवानी
शाहपुरा। वीरों, संतों, कला, संस्कृति और अध्यात्म की समृद्ध परंपरा से आलोकित ऐतिहासिक नगरी शाहपुरा ने एक बार फिर पूरे विश्व में अपनी पहचान दर्ज कराई है। इस बार यह गौरव किसी राजनीतिक या सामाजिक उपलब्धि से नहीं, बल्कि श्रीमद्भगवद्गीता की दिव्य वाणी के प्रति अद्भुत समर्पण और आध्यात्मिक साधना के कारण मिला है। शाहपुरा की बेटी एवं केकड़ी की बहू 56 वर्षीय राधा माहेश्वरी ने गीता के प्रति अपनी अटूट निष्ठा और वर्षों की तपस्या के बल पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान बनाकर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे राजस्थान और जन्मभूमि शाहपुरा का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित कर दिया है।
9 मई 2026 को चिन्मय मिशन ट्रस्ट (भारत) एवं गीता परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विश्वव्यापी ऑनलाइन गीता चैंटिंग कार्यक्रम में दुनिया के विभिन्न देशों से 8,277 साधकों ने एक साथ श्रीमद्भगवद्गीता का सामूहिक पाठ किया। इस अभूतपूर्व आयोजन ने नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की सहभागी राधा माहेश्वरी को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से आधिकारिक प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया गया है।
राधा माहेश्वरी शाहपुरा के प्रतिष्ठित व्यवसायी राधेश्याम झंवर की सुपुत्री हैं। परिवार में उन्हें स्नेहपूर्वक ‘अप्पी’ नाम से पुकारा जाता है। विज्ञान विषय में स्नातक होने के बावजूद उनका मन आधुनिकता की चकाचौंध में नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य संदेश में रमा। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा और आध्यात्मिकता जब साथ चलती हैं तो व्यक्ति स्वयं के साथ समाज को भी नई दिशा देता है।

उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर 2 अगस्त, रविवार को शाहपुरा के प्राचीन एवं आस्था के प्रमुख केंद्र गोविंद देव मंदिर में विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। मंदिर के पुजारी महावीर शर्मा के सान्निध्य में होने वाले प्रातःकालीन आध्यात्मिक कार्यक्रम में राधा माहेश्वरी का नागरिक अभिनंदन किया जाएगा। महावीर शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में गीता के प्रति इतना समर्पण और अनुशासित साधना विरले ही देखने को मिलती है।
राधा माहेश्वरी की आध्यात्मिक यात्रा वर्ष सितंबर 2022 में गीता परिवार से ऑनलाइन जुड़ने के साथ प्रारंभ हुई। उन्होंने निरंतर अध्ययन, अभ्यास और साधना को जीवन का हिस्सा बनाया। मार्च 2024 में उन्होंने ‘गीतावती’ की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद अगस्त 2024 में लोक क्रम आरोही तथा सितंबर 2024 में लोक क्रम अवरोही गीता विवेक्षण परीक्षाएं सफलता के साथ उत्तीर्ण कर अपनी विद्वता का परिचय दिया।

यहीं नहीं, लगातार पांच वर्षों के अनुशासित अभ्यास और अथक साधना के बाद उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 18 अध्याय कंठस्थ कर उनकी परीक्षा भी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। यह उपलब्धि केवल स्मरण शक्ति का परिणाम नहीं, बल्कि गीता के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा, समर्पण और साधना का जीवंत प्रमाण है।
वर्तमान में राधा माहेश्वरी केकड़ी गीता परिवार के माध्यम से ऑनलाइन बाल संस्कार कक्षाओं का संचालन कर रही हैं। वे बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और गीता के जीवनोपयोगी संदेशों से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। इसके साथ ही वे गीता परिवार की विभिन्न प्रशिक्षण कक्षाओं का संचालन एवं ऑनलाइन तकनीकी सहयोग भी प्रदान करती हैं। उनकी सेवाओं से अनेक परिवार भारतीय संस्कारों से पुनः जुड़ रहे हैं।
राधा माहेश्वरी का स्पष्ट मानना है कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की सर्वोत्तम कला का शाश्वत मार्गदर्शक है। वे स्वयं गीता के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाकर समाज को सकारात्मक सोच, कर्तव्यनिष्ठा और आत्मविश्वास का संदेश दे रही हैं।
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि शाहपुरा केवल ऐतिहासिक इमारतों और राजसी वैभव की नगरी ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, संस्कृति और संस्कारों की भी सशक्त भूमि है। राजपूताना इतिहास में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाला शाहपुरा अपने भव्य राजमहल, प्राचीन गोविंद देव मंदिर, ऐतिहासिक बावड़ियों, कलात्मक चित्रकला तथा धार्मिक परंपराओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध रहा है। यही सांस्कृतिक विरासत आज भी यहां की संतानों को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचने की प्रेरणा देती है।

राधा माहेश्वरी की यह उपलब्धि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो मानता है कि सफलता की कोई आयु नहीं होती। दृढ़ संकल्प, निरंतर अभ्यास और आध्यात्मिक विश्वास के बल पर कोई भी व्यक्ति विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकता है। शाहपुरा की इस बेटी ने गीता के संदेश को आत्मसात कर न केवल विश्व रिकॉर्ड बनाया है, बल्कि यह भी सिद्ध किया है कि भारत की सनातन संस्कृति आज भी पूरे विश्व का मार्गदर्शन करने की क्षमता रखती है।




