बारिश ने बदला गुरला का मिजाज… रणजीत सागर बना ‘राजस्थान का मिनी हिल स्टेशन’
हरी चादर ओढ़ी पहाड़ियों के बीच लबालब तालाब, चोटी पर विराजती कालिका माता… हाईवे से गुजरते ही ठहर जाती हैं निगाहें

गुरला। बद्रीलाल माली।
मानसून की बेरुखी ने भले ही इस बार शुरुआत में जिलेवासियों को मायूस किया हो, लेकिन आसमान से बरसी फुहारों ने अब प्रकृति की तस्वीर ही बदल दी है। सूखी धरती पर हरियाली की दस्तक हुई तो पहाड़ों ने मखमली चादर ओढ़ ली और तालाबों में पानी की चमक लौट आई। इसी बदले हुए मौसम में जिला मुख्यालय भीलवाड़ा से करीब 20 किलोमीटर दूर उदयपुर को जोड़ने वाले हाईवे पर स्थित गुरला का ऐतिहासिक रणजीत सागर तालाब इन दिनों प्रकृति के अनुपम सौंदर्य का ऐसा नजारा पेश कर रहा है कि यहां पहुंचते ही नजरें ठहर जाती हैं।
करीब 1800 बीघा क्षेत्र में फैला रणजीत सागर तालाब इन दिनों पानी से लबालब नजर आ रहा है। बारिश की बूंदों ने इसके शांत पानी में जैसे जिंदगी घोल दी है। तालाब के चारों ओर फैली हरियाली, दूर तक उठती पहाड़ियां, बादलों से अठखेलियां करता आसमान और बीच में चमकता पानी—यह पूरा दृश्य किसी प्राकृतिक चित्रकार की बनाई हुई विशाल पेंटिंग जैसा दिखाई दे रहा है।

हाईवे पर दौड़ते वाहन… और नजरें तालाब पर
भीलवाड़ा से राजसमंद और उदयपुर की ओर जाने वाले हाईवे से गुजरने वाले यात्रियों के लिए गुरला का यह इलाका इन दिनों खास आकर्षण का केंद्र बन गया है। एक ओर हाईवे पर तेज रफ्तार से दौड़ते वाहन और दूसरी ओर प्रकृति की गोद में शांत पड़ा रणजीत सागर तालाब… दोनों का यह विरोधाभासी दृश्य राहगीरों को कुछ पल के लिए ठहरने को मजबूर कर देता है।
मानसून की फुहारों के बाद आसपास की पहाड़ियों पर उगी हरी घास ने पूरे क्षेत्र को ऐसा रूप दे दिया है मानो पहाड़ों पर किसी ने हरे रंग की मखमली चादर बिछा दी हो। बादलों की आवाजाही के बीच जब सूरज की किरणें पानी की सतह पर पड़ती हैं तो तालाब का दृश्य और भी मनमोहक हो उठता है।
यही वजह है कि अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास से गुजरने वाले लोग भी इस प्राकृतिक सौंदर्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं।
कालिका माता मंदिर से दिखता है ‘कुदरत का पूरा कैनवास’
रणजीत सागर की खूबसूरती को चार चांद लगाने का काम करता है पहाड़ी की चोटी पर स्थित प्राचीन कालिका माता मंदिर। सफेद रंग का यह भव्य मंदिर दूर से ही अपनी ओर ध्यान खींचता है। मंदिर तक पहुंचने के बाद जब नीचे फैले रणजीत सागर और आसपास की हरी-भरी पहाड़ियों पर नजर पड़ती है तो पूरा क्षेत्र किसी विहंगम प्राकृतिक दृश्य में बदल जाता है।
मंदिर की ऊंचाई से आसपास का नजारा और भी अद्भुत दिखाई देता है। तालाब का विस्तृत जलक्षेत्र, हरियाली से ढकी पहाड़ियां, दूर-दूर तक फैला ग्रामीण परिवेश और हाईवे पर रेंगती वाहनों की कतार—यहां से देखने पर गुरला की पूरी तस्वीर एक साथ आंखों के सामने उतर आती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में इस स्थान की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। दूर-दराज से आने वाले लोग भी कालिका माता मंदिर पहुंचकर इस प्राकृतिक नजारे का आनंद लेते हैं।
तालाब के किनारे दिखती है गांव की असली तस्वीर
रणजीत सागर की खूबसूरती केवल पहाड़ियों और पानी तक सीमित नहीं है। तालाब के किनारे बसी गुरला की ग्रामीण बस्ती इस पूरे प्राकृतिक दृश्य को एक अलग ही रंग देती है। मिट्टी की सौंधी खुशबू, गांव की गलियां, खेतों में हरियाली और ग्रामीण जीवन की सहजता यहां आने वालों को राजस्थान के पारंपरिक गांवों की याद दिलाती है।
शहरी भागदौड़ से दूर कुछ पल सुकून की तलाश में निकलने वाले लोगों के लिए यह स्थान किसी खुले प्राकृतिक विश्राम स्थल से कम नहीं। बारिश के बाद वातावरण में घुली मिट्टी की खुशबू और चारों तरफ छाई हरियाली मन को अलग ही शांति देती है।
15 किलोमीटर दूर तक का नजारा कैमरे में कैद
कालिका माता मंदिर की पहाड़ी से आसपास का विहंगम दृश्य कई किलोमीटर तक दिखाई देता है। स्थानीय लोगों के अनुसार साफ मौसम में करीब 10 से 15 किलोमीटर दूर तक का क्षेत्र पहाड़ी से नजर आता है। मानसून के दौरान जब बादल पहाड़ियों के आसपास मंडराते हैं तो यह दृश्य और भी आकर्षक हो जाता है।
युवाओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान खास तौर पर आकर्षण का केंद्र बन रहा है। लोग पहाड़ी पर पहुंचकर तालाब, हरियाली और बादलों के बीच तस्वीरें और वीडियो बना रहे हैं। सोशल मीडिया के दौर में गुरला का यह प्राकृतिक सौंदर्य अब मोबाइल कैमरों से निकलकर लोगों की स्क्रीन तक भी पहुंच रहा है।
पर्यटन की संभावनाओं से भरा है रणजीत सागर
रणजीत सागर तालाब और कालिका माता मंदिर का यह प्राकृतिक एवं धार्मिक संगम स्थानीय पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यदि यहां मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएं, सुरक्षित पहुंच मार्ग, बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और पर्यटन संबंधी सुविधाएं उपलब्ध हों तो यह क्षेत्र भीलवाड़ा-राजसमंद मार्ग पर एक आकर्षक पर्यटन पड़ाव बन सकता है।
विशेषकर मानसून के दौरान यहां की प्राकृतिक खूबसूरती लोगों को आकर्षित कर सकती है। प्रकृति, आस्था और ग्रामीण संस्कृति—तीनों का एक साथ मिलना इस स्थान को विशिष्ट बनाता है।
फिलहाल बारिश ने रणजीत सागर को फिर से जीवंत कर दिया है। पहाड़ों पर हरियाली है, तालाब में पानी की चमक है, आसमान में बादलों की आवाजाही है और चोटी पर कालिका माता मंदिर अपनी सफेद आभा बिखेर रहा है।
कहने को यह गुरला का रणजीत सागर है, लेकिन मानसून में यहां पहुंचकर लगता है जैसे राजस्थान की धरती ने खुद अपना एक छोटा-सा हिल स्टेशन सजा लिया हो।




