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तिरंगे के बहाने शाहपुरा में शक्ति प्रदर्शन! विधायक बैरवा की अगुवाई में निकली यात्रा, सड़कों पर उमड़ा राष्ट्रप्रेम का सैलाब

‘हर घर तिरंगा-हर दिल तिरंगा’ के नारों से गूंजा शहर, जगह-जगह पुष्पवर्षा; राष्ट्रप्रेम के साथ सियासी संदेश भी छोड़ गई यात्रा

शाहपुरा संवाद | शाहपुरा।
शाहपुरा में स्वतंत्रता दिवस से पहले गुरुवार को तिरंगे की आन-बान-शान के बीच सियासत का रंग भी साफ नजर आया। ‘हर घर तिरंगा-हर दिल तिरंगा’ अभियान के तहत भाजपा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा की अगुवाई में निकली भव्य तिरंगा यात्रा ने पूरे शहर को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। हाथों में लहराते तिरंगे, भारत माता के जयकारे, वंदे मातरम् के उद्घोष, देशभक्ति गीत और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच निकली इस यात्रा ने जहां राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया, वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे विधायक के नेतृत्व में जनसंपर्क और शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा गया।

यात्रा में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, समर्थक और आमजन शामिल हुए। सड़कों पर तिरंगों की कतार और नारों की गूंज ने ऐसा माहौल बनाया कि शाहपुरा का बाजार कुछ देर के लिए मानो देशभक्ति के उत्सव में बदल गया।

धरती देवरा से उठा तिरंगा, शहर ने थाम लिया कारवां

तिरंगा यात्रा का शुभारंभ सुबह 10 बजे धरती देवरा से हुआ। विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने हरी झंडी दिखाकर यात्रा को रवाना किया। जैसे ही यात्रा आगे बढ़ी, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों ने वातावरण में जोश भर दिया।

देशभक्ति गीतों के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप ने यात्रा को और आकर्षक बना दिया। युवा हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़ते नजर आए तो कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह दिखाई दिया। यात्रा के दौरान राष्ट्रध्वज के सम्मान और देश की एकता-अखंडता का संदेश प्रमुखता से दिया गया।

तिरंगा यात्रा धरती देवरा से कालिंजरी गेट, बालाजी छतरी, मुख्य बाजार, त्रिमूर्ति चौराहा और रामद्वारा होते हुए पंचायत समिति परिसर स्थित विधायक कार्यालय पहुंची।

जहां से गुजरी यात्रा, फूलों से हुआ स्वागत

तिरंगा यात्रा के स्वागत के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने जगह-जगह मोर्चा संभाल रखा था। यात्रा के पहुंचते ही नगरवासियों और व्यापारियों ने पुष्पवर्षा कर तिरंगा यात्रा का स्वागत किया।

फूलों की बारिश के बीच लहराते तिरंगे और देशभक्ति के नारों ने माहौल को खास बना दिया। बाजार क्षेत्र में यात्रा के दौरान लोगों की नजरें भी इस कारवां पर टिकी रहीं।

राजनीतिक नजरिए से देखें तो यह यात्रा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा के लिए आमजन के बीच अपनी सक्रियता और संगठनात्मक पकड़ दिखाने का अवसर भी रही। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व से जुड़े कार्यक्रम में बड़ी भागीदारी जुटाकर भाजपा ने राष्ट्रवाद के अपने राजनीतिक एजेंडे को भी मजबूती से सामने रखा।

तिरंगे के साथ दिखाई दिया संगठन का दम

शाहपुरा में लंबे समय से स्थानीय राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला बना हुआ है। ऐसे में विधायक की अगुवाई में निकली यह यात्रा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही।

यात्रा में उमड़ी भीड़, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और शहर के प्रमुख मार्गों से होकर निकला कारवां आने वाले समय की राजनीतिक सक्रियता की झलक भी देता नजर आया। खासकर नगर निकाय और स्थानीय राजनीतिक मुद्दों के बीच इस तरह के जनसंपर्क कार्यक्रमों को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

हालांकि मंच से संदेश पूरी तरह राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता का रहा, लेकिन राजनीति में भीड़ और जनसंपर्क का अपना महत्व होता है। ऐसे में इस यात्रा ने विधायक खेमे को शहर के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का अवसर जरूर दिया।

विधायक बोले—तिरंगा सिर्फ कपड़ा नहीं, देश की पहचान है

यात्रा के समापन अवसर पर विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने कहा कि तिरंगा केवल तीन रंगों का कपड़ा नहीं, बल्कि देश की आन, बान, शान और संप्रभुता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को देश की एकता और अखंडता के लिए समर्पित रहना चाहिए।

उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर घर तिरंगा फहराएं और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करें।

राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन

विधायक कार्यालय पहुंचने के बाद यात्रा का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। विशाल जनसमुदाय ने एक स्वर में राष्ट्रगान गाया। इस दौरान पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत नजर आया।

शाहपुरा में निकली यह तिरंगा यात्रा कई मायनों में खास रही। एक ओर तिरंगे ने शहर को राष्ट्रप्रेम के रंग में रंगा, तो दूसरी ओर विधायक डॉ. लालाराम बैरवा के नेतृत्व ने भाजपा की राजनीतिक सक्रियता और संगठन की ताकत का संदेश भी दिया।

अब स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों के साथ शाहपुरा की राजनीति में भी हलचल बढ़ने के आसार हैं। खासकर आगामी नगर निकाय चुनाव और स्थानीय मुद्दों के बीच कौन नेता कितनी भीड़ जुटाता है, किसकी पकड़ कितनी मजबूत है और जनता के बीच किसका संदेश कितना असर छोड़ता है—इन सवालों के जवाब भी ऐसे आयोजनों में तलाशे जाएंगे।

फिलहाल शाहपुरा की सड़कों पर लहराया तिरंगा यह संदेश दे गया कि राष्ट्रभक्ति के उत्सव के साथ चुनावी राजनीति की जमीन भी धीरे-धीरे गर्म होने लगी है।

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