
भीलवाड़ा। स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ पर शनिवार को हरिशेवा संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालय में राष्ट्रभक्ति और उत्साह से ओतप्रोत समारोह आयोजित हुआ। परिसर में सुबह से ही देशभक्ति का माहौल नजर आया। तिरंगे की शान में सजे विद्यालय परिसर में जब राष्ट्रध्वज फहराया गया तो उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों और अतिथियों के चेहरों पर गर्व और उत्साह साफ दिखाई दिया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने ध्वजारोहण किया। राष्ट्रध्वज को सलामी के बाद राष्ट्रगान हुआ और पूरा परिसर देशभक्ति की भावना से गूंज उठा।
अनुशासन को बनाया राष्ट्रसेवा की पहली सीढ़ी
समारोह को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने अपने आशीर्वचन में युवाओं से अनुशासन को जीवन का आधार बनाने और राष्ट्रहित में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने युवाओं से देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाए रखने के लिए सक्रिय योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और यदि युवा अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रभावना के साथ आगे बढ़ें तो भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता।
प्रशिक्षणार्थियों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समारोह में प्रशिक्षणार्थियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। एकल गीत, एकल नृत्य, युगल नृत्य एवं सामूहिक नृत्य की देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों ने वातावरण को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया।
देशप्रेम से जुड़े गीतों और नृत्य प्रस्तुतियों के दौरान प्रशिक्षणार्थियों का उत्साह देखते ही बना। प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति, राष्ट्रप्रेम और युवाओं की ऊर्जा का सुंदर संगम दिखाई दिया।

पिरामिड प्रदर्शन बना खास आकर्षण
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण प्रशिक्षणार्थियों का पिरामिड प्रदर्शन रहा। विद्यार्थियों ने अनुशासन, संतुलन, साहस और टीम भावना का परिचय देते हुए शानदार पिरामिड बनाया। प्रस्तुति के दौरान उपस्थित दर्शकों की निगाहें विद्यार्थियों पर टिकी रहीं और प्रदर्शन पूरा होते ही तालियों से परिसर गूंज उठा।
पिरामिड प्रदर्शन ने यह संदेश भी दिया कि सामूहिक प्रयास, विश्वास और अनुशासन के साथ बड़ी से बड़ी चुनौती को पार किया जा सकता है।
संस्था पदाधिकारियों ने भी किया संबोधित
समारोह में संस्था के सचिव ईश्वरलाल आसनानी एवं प्राचार्य श्यामलाल सांगावत ने भी संबोधित किया। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रशिक्षणार्थियों को राष्ट्र और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने तथा शिक्षा एवं संस्कारों के माध्यम से समाज निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
समारोह में संस्था कार्यकारिणी के पदाधिकारी संत मया राम, श्रीमती पल्लवी बच्छानी, अम्बालाल, हीरालाल, श्री परियानी सहित अन्य अतिथिगण मौजूद रहे।
कार्यक्रम का मंच संचालन मोहनलाल शर्मा एवं प्राध्यापिका वसुन्धरा सक्सेना ने किया। दोनों ने कार्यक्रम की विभिन्न प्रस्तुतियों को प्रभावी ढंग से जोड़ा और समारोह को गरिमा प्रदान की।
मिठाई वितरण के साथ हुआ समापन
समारोह के अंत में छात्राध्यापकों एवं छात्राध्यापिकाओं को मिठाई वितरित की गई। स्वतंत्रता दिवस की खुशियां साझा करते हुए सभी ने एक-दूसरे को राष्ट्रीय पर्व की शुभकामनाएं दीं।
हरिशेवा संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालय का यह समारोह केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं को अनुशासन, राष्ट्रप्रेम, एकता और जिम्मेदारी का संदेश भी दे गया। तिरंगे की छांव में आयोजित कार्यक्रम ने यह भावना मजबूत की कि संस्कारवान और अनुशासित युवा ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर सकते हैं।




