
शाहपुरा। किसी महापुरुष ने कहा है कि “सच्ची श्रद्धांजलि फूल चढ़ाने से नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाने से होती है।” गुरुवार को रामनिवास धाम में ऐसा ही भावपूर्ण और प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला, जब स्वर्गीय बालकृष्ण सर्राफ (ग्वालियर) की पुण्य स्मृति को सेवा और परोपकार का स्वरूप देते हुए उनके सुपुत्र रामनारायण सर्राफ, रामप्रकाश सर्राफ, रामप्रताप (पप्पू) सर्राफ एवं समस्त मंगलम परिवार, ग्वालियर (मध्य प्रदेश) की ओर से 25 जरूरतमंद परिवारों को राशन सहायता सामग्री किट वितरित की गई।
रामनिवास धाम द्वारा प्रतिमाह संचालित किए जा रहे “जरूरतमंद परिवार राशन सहायता अभियान” के अंतर्गत अगस्त माह का यह वितरण कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, सेवा और मानवीय संवेदनाओं के वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में जरूरतमंद परिवारों के चेहरों पर राहत और संतोष की मुस्कान साफ दिखाई दी, जिसने पूरे आयोजन को भावनात्मक ऊंचाइयों तक पहुँचा दिया।
कार्यक्रम का आयोजन रामनिवास धाम के कार्यवाहक भंडारी संत श्री नवनिध राम जी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में किया गया। उनके सान्निध्य में वर्षों से धाम सेवा, संस्कार और समाजोत्थान के विविध आयामों पर कार्य कर रहा है। निर्धनों, असहायों और जरूरतमंदों की सहायता को उन्होंने केवल सेवा नहीं, बल्कि ईश्वर की आराधना का माध्यम माना है। यही कारण है कि रामनिवास धाम आज क्षेत्र में सामाजिक सरोकारों का एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरा है।
राशन सामग्री किट वितरण के दौरान शाहपुरा एवं आसपास के क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर, असहाय एवं जरूरतमंद परिवारों को दैनिक जीवन में उपयोग आने वाली आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। इस सहयोग से लाभान्वित परिवारों ने कहा कि ऐसे सेवा कार्य उनके जीवन में केवल आर्थिक राहत ही नहीं लाते, बल्कि यह विश्वास भी जगाते हैं कि समाज आज भी मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत है।
स्वर्गीय बालकृष्ण सर्राफ का जीवन सेवा, सद्भाव और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से प्रेरित रहा। उनकी पुण्यतिथि पर परिवार द्वारा जरूरतमंदों के बीच सहायता सामग्री वितरित कर उनकी स्मृति को जीवंत बनाए रखने का यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश देता है कि पूर्वजों की स्मृति में यदि सेवा का दीप प्रज्ज्वलित किया जाए तो वह अनेक परिवारों के जीवन में आशा का प्रकाश बन जाता है।
रामनारायण सर्राफ, रामप्रकाश सर्राफ, रामप्रताप (पप्पू) सर्राफ एवं समस्त मंगलम परिवार ने इस अवसर पर समाज के सक्षम वर्ग से भी जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब प्रत्येक सक्षम व्यक्ति अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों का हाथ थामे। छोटी-सी सहायता भी किसी परिवार के लिए बड़ा संबल बन सकती है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने रामनिवास धाम द्वारा निरंतर संचालित सेवा गतिविधियों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब अनेक परिवार आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में नियमित रूप से राशन सहायता उपलब्ध कराना अत्यंत सराहनीय एवं अनुकरणीय कार्य है। इससे समाज में सहयोग, समरसता और मानवीय मूल्यों को नई मजबूती मिलती है।
संत श्री नवनिध राम जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल स्वयं का कल्याण नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता और संवेदना पहुँचाना भी है। उन्होंने कहा कि जब किसी भूखे परिवार के घर अन्न पहुँचता है, तब वह केवल भोजन नहीं होता, बल्कि उसमें करुणा, अपनापन और ईश्वर की कृपा भी समाहित होती है। उन्होंने सभी दानदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा का यह क्रम भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा।
राशन सामग्री प्राप्त करने वाले परिवारों ने भावुक होकर दानदाता परिवार एवं रामनिवास धाम के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। कई लाभार्थियों ने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में इस प्रकार की सहायता उनके परिवार के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है। उनके अनुसार समाज के ऐसे सेवा कार्य मानवता में विश्वास को और मजबूत करते हैं।
समापन अवसर पर रामनिवास धाम परिवार ने स्वर्गीय बालकृष्ण सर्राफ को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके पुण्य स्मरण में किए गए इस सेवा कार्य के लिए रामनारायण सर्राफ, रामप्रकाश सर्राफ, रामप्रताप (पप्पू) सर्राफ एवं समस्त मंगलम परिवार के प्रति हार्दिक साधुवाद एवं आभार व्यक्त किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए संकल्प लिया कि सेवा, सहयोग और मानवता का यह अभियान निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।
रामनिवास धाम का यह मासिक राशन सहायता कार्यक्रम केवल सामग्री वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में संवेदनशीलता, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने का एक सशक्त अभियान बन चुका है। यह आयोजन एक बार फिर इस बात का प्रमाण बना कि जब श्रद्धा, सेवा और समर्पण एक साथ जुड़ते हैं, तब समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई इबारत लिखी जाती है। वास्तव में, स्वर्गीय बालकृष्ण सर्राफ की पुण्य स्मृति में आयोजित यह सेवा कार्य उन मूल्यों को जीवंत करता है, जिन पर एक संवेदनशील और सशक्त समाज की नींव टिकी होती है।




