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रामद्वारा में उमड़ा रक्तदाताओं का सैलाब, ‘रक्तदान महादान’ का संदेश हुआ बुलंद

शताब्दी वर्ष में सेवा की मिसाल: ‘रक्त किसी कारखाने में नहीं बनता’—सोड़ाणी

शाहपुरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सेवा, समर्पण और राष्ट्रभावना का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने शाहपुरा को रक्तदान की प्रेरणा से सराबोर कर दिया। श्री केशव स्मृति सेवा प्रन्यास, शाहपुरा इकाई की ओर से रामनिवास धाम स्थित रामद्वारा के डोम में आयोजित विशाल रक्तदान महोत्सव में सुबह से ही रक्तदाताओं की कतारें लगने लगीं। कोई अकेला पहुंचा तो कोई मित्रों के साथ, कहीं पिता-पुत्र की जोड़ी नजर आई तो कहीं एक ही परिवार की महिलाएं रक्तदान के लिए आगे आती दिखीं।

आयोजन का उद्देश्य केवल रक्त संग्रह करना नहीं, बल्कि समाज में यह संदेश पहुंचाना रहा कि किसी अनजान व्यक्ति के जीवन की डोर मजबूत करने के लिए दिया गया रक्त सबसे बड़ा मानवीय योगदान है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस सेवा अभियान ने राष्ट्रभक्ति को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

शिविर का उद्घाटन मुख्य अतिथि पुलिस उपाधीक्षक ओमप्रकाश विश्नोई ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने रक्तदान को मानव सेवा का सर्वोच्च माध्यम बताते हुए कहा कि वर्तमान दौर में रक्तदान ही महादान है।

उन्होंने कहा कि रक्त किसी फैक्ट्री में तैयार नहीं होता और न ही किसी मशीन से बनाया जा सकता है। जरूरत के समय एक स्वस्थ व्यक्ति का रक्त ही दूसरे व्यक्ति के जीवन की उम्मीद बनता है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे राष्ट्र निर्माण को केवल नारों तक सीमित न रखें, बल्कि सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

उन्होंने शिविर में शहरवासियों और विशेष रूप से युवाओं के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान जैसे सेवा कार्य समाज में संवेदनशीलता और भाईचारे को मजबूत करते हैं।

‘रक्त किसी कारखाने में नहीं बनता’—सोड़ाणी

समारोह में श्री केशव स्मृति सेवा प्रन्यास के कोषाध्यक्ष एवं भीलवाड़ा के समाजसेवी गोविंद सोड़ाणी ने कहा कि संघ के स्थापना शताब्दी वर्ष में इस प्रकार के सेवा आयोजन समाज को नई प्रेरणा देने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल एक व्यक्ति द्वारा किया गया दान नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद परिवार के लिए जीवन की उम्मीद है। रक्त किसी कारखाने या फैक्ट्री में नहीं बन सकता। यह केवल एक मनुष्य द्वारा दूसरे मनुष्य की जान बचाने के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। ऐसे में प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सेवा की भावना तभी सार्थक होती है, जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। रक्तदान शिविर इसी भावना का जीवंत उदाहरण है।

20 पलंग, दो ब्लड बैंक टीमों ने संभाली व्यवस्था

शिविर में रक्तदाताओं की सुविधा और सुचारू व्यवस्था के लिए करीब 20 पलंगों की व्यवस्था की गई। रक्त संग्रह के लिए रामसनेही चिकित्सालय ब्लड बैंक तथा महात्मा गांधी चिकित्सालय, भीलवाड़ा ब्लड बैंक की टीमों ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

चिकित्सकीय टीमों की मौजूदगी में रक्तदाताओं की आवश्यक जांच और रक्त संग्रह की प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से की गई। वहीं स्वयंसेवक पूरे आयोजन में व्यवस्थाओं को संभालते हुए रक्तदाताओं की सहायता में जुटे रहे।

शिविर संयोजक डॉ. परमेश्वर कुमावत ने बताया कि रक्तदाताओं की सेवा-सुश्रूषा के लिए स्वयंसेवकों की टीम लगातार सक्रिय है। सुबह से ही अलग-अलग क्षेत्रों से रक्तदाताओं के पहुंचने का क्रम बना हुआ है और हर आयु वर्ग के लोग उत्साह के साथ रक्तदान के लिए आगे आ रहे हैं। शिविर शाम तक चलेगा।

रामद्वारा में आध्यात्मिक वातावरण के बीच सेवा का उत्सव

रामनिवास धाम के डोम में आयोजित शिविर का वातावरण सामान्य रक्तदान शिविरों से अलग नजर आया। आध्यात्मिक वातावरण के बीच जब लोग रक्तदान के लिए आगे बढ़े तो सेवा और राष्ट्रभावना का अद्भुत संगम दिखाई दिया।

शहर और आसपास के गांवों से लोग रक्तदान के लिए पहुंचे। विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी आयोजन में भागीदारी निभाई। स्वयंसेवक न केवल रक्तदान कर रहे थे, बल्कि व्यवस्थाओं में भी अपना योगदान दे रहे थे।

सबसे भावुक और प्रेरक दृश्य तब सामने आए जब पिता-पुत्र एक साथ रक्तदान करने पहुंचे। वहीं एक परिवार की महिलाएं भी समूह में रक्तदान के लिए पहुंचीं। इन दृश्यों ने यह संदेश दिया कि रक्तदान किसी एक वर्ग या आयु तक सीमित सेवा नहीं है। स्वस्थ और सक्षम व्यक्ति आगे आए तो समाज में रक्त की जरूरत को पूरा करने में बड़ी मदद मिल सकती है।

रक्तदाताओं का सम्मान, सेवा के साथ सम्मान की भावना

श्री केशव स्मृति सेवा प्रन्यास की ओर से प्रत्येक रक्तदाता का अभिनंदन किया गया। रक्तदाताओं को सम्मान पत्र, दुपट्टा, की-चेन एवं कपड़े का बैग देकर सम्मानित किया गया। आयोजकों का कहना था कि रक्तदान करने वाला प्रत्येक व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है, क्योंकि उसने किसी अनजान व्यक्ति के जीवन को बचाने के लिए अपना अमूल्य योगदान दिया है।

शिविर स्थल पर पहुंचने वाले अतिथियों, अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने भी रक्तदाताओं का उत्साह बढ़ाया। कई लोग स्वयं रक्तदान करने के साथ दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते दिखाई दिए।

सेवा में जुटे संघ के कार्यकर्ता

आयोजन में संघ के जिला प्रचारक केशव नारायण, विभाग व्यवस्था प्रमुख सत्यप्रकाश काबरा, शिविर संयोजक डॉ. परमेश्वर कुमावत, नगर कार्यवाह कन्हैयालाल वर्मा, लोकतंत्र सेनानी देवेंद्र बेली, केशव प्रन्यास के सदस्य विजयपाल सिंह राणावत, भगवान सिंह सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं में सक्रिय भागीदारी निभाई।

नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष रघुनंदन सोनी, भारतीय मजदूर संघ की जिला अध्यक्ष तारादेवी शर्मा, पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष राजेश पारीक, एडवोकेट कैलाश धाकड़, विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री एडवोकेट विनोद सनाठ्य, एडवोकेट अंकित सनाठ्य, महेंद्र रायका सहित अनेक गणमान्य लोग शिविर में पहुंचे और रक्तदाताओं का उत्साह बढ़ाया।

शताब्दी वर्ष में सेवा का संदेश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित यह रक्तदान महोत्सव शाहपुरा में सेवा भावना की एक सशक्त तस्वीर बनकर सामने आया। यहां राष्ट्रभक्ति केवल मंच से बोले गए शब्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि रक्त की एक-एक बूंद के माध्यम से मानव सेवा का संकल्प जमीन पर उतरता दिखाई दिया।

रामद्वारा के डोम में दिनभर चलता रक्तदान अभियान यह संदेश देता रहा कि देशसेवा का रास्ता केवल सीमा पर नहीं जाता, बल्कि समाज के बीच भी खुलता है। किसी जरूरतमंद के जीवन की रक्षा के लिए दिया गया रक्त भी राष्ट्रसेवा का ही एक रूप है।

शिविर में उमड़े उत्साह ने यह साबित किया कि शाहपुरा में सेवा और सामाजिक सरोकारों की भावना अभी भी मजबूत है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि इस भावना को नियमित अभियान का रूप दिया जाए, ताकि किसी अस्पताल में रक्त की कमी के कारण किसी जिंदगी की उम्मीद कमजोर न पड़े।

चिकित्सालय की टीम भी पहुंची, रक्तदाताओं का बढ़ाया हौसला

रक्तदान महोत्सव में शाहपुरा जिला चिकित्सालय के पीएमओ डॉ. अशोक जैन, नर्सिंग अधीक्षक कैलाश गोठवाल एवं ओमप्रकाश शर्मा भी पहुंचे। उन्होंने रक्तदाताओं से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया और रक्तदान को मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। चिकित्सालय अधिकारियों ने शिविर में की गई व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए आयोजकों एवं रक्त संग्रह में जुटी चिकित्सा टीम के प्रयासों की सराहना की। उनके पहुंचने से रक्तदाताओं का उत्साह और बढ़ा तथा शिविर में सेवा और सहयोग का माहौल और मजबूत हुआ।

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