
हर लोट में आस्था, हर सांस में सांवरिया सेठ का नाम… मन्नत लेकर निकला भक्त, शाहपुरा में बरसा श्रद्धा का स्नेह
शाहपुरा। भक्ति जब मन में उतरती है तो रास्तों की दूरी मायने नहीं रखती और आस्था जब संकल्प बन जाती है तो कठिन से कठिन यात्रा भी साधना का स्वरूप ले लेती है। शाहपुरा तहसील के रहड़ गांव निवासी युवक सांवरा बैरवा इन दिनों ऐसी ही अद्भुत भक्ति और संकल्प की मिसाल पेश कर रहे हैं। सांवरिया सेठ के प्रति अपनी गहरी आस्था और मन्नत को लेकर सांवरा बैरवा अपने गांव रहड़ से लोटन यात्रा करते हुए श्री सांवलिया सेठ मंदिर की ओर रवाना हो चुके हैं।
शरीर को भूमि पर लिटाकर, फिर उठकर कुछ कदम आगे बढ़ना और दोबारा उसी क्रम को दोहराते हुए मंजिल की ओर बढ़ना—यह यात्रा केवल रास्ता तय करना नहीं, बल्कि भक्त के लिए अपने आराध्य के प्रति समर्पण, धैर्य और विश्वास की परीक्षा भी है। इसी संकल्प के साथ सांवरा बैरवा जब शाहपुरा पहुंचे तो श्रद्धालुओं और सांवरिया सेठ सेवा समिति के कार्यकर्ताओं ने उनका आत्मीय स्वागत किया। उनकी भक्ति देखकर रास्ते में मौजूद लोगों ने भी उन्हें सम्मान और स्नेह दिया।
लोटन यात्रा बनी श्रद्धा की जीवंत तस्वीर
सांवरा बैरवा की यात्रा सामान्य यात्रा नहीं है। वे हर कदम को सांवरिया सेठ की भक्ति से जोड़ते हुए आगे बढ़ रहे हैं। रास्ते में ग्रामीणों, स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं ने उनके प्रति श्रद्धा और अपनत्व प्रकट किया। कहीं पुष्पवर्षा कर अभिनंदन हुआ तो कहीं पानी और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर भक्त की थकान कम करने का प्रयास किया गया।
भक्तों का कहना रहा कि सांवरिया सेठ के प्रति समर्पित इस यात्रा में सांवरा बैरवा का दृढ़ संकल्प प्रेरणादायी है। लंबा रास्ता, शारीरिक परिश्रम और लगातार आगे बढ़ने की चुनौती के बावजूद उनके चेहरे पर आस्था और विश्वास दिखाई देता है।

शाहपुरा पहुंचते ही हुआ आत्मीय स्वागत
रहड़ से लोटन यात्रा करते हुए सांवरा बैरवा जब शाहपुरा पहुंचे तो सांवरिया सेठ सेवा समिति के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। त्रिमूर्ति चौराहे पर भी श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं ने उनका अभिनंदन किया।
इस दौरान सांवरिया सेठ सेवा समिति से जुड़े कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंचे। सांवरा बैरवा पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया गया। भक्तिभाव से किए गए इस स्वागत से कुछ समय के लिए माहौल भी श्रद्धा से सराबोर हो गया।
कार्यकर्ताओं ने सांवरा बैरवा की हौसला अफजाई करते हुए उनकी यात्रा के सफल होने की कामना की। रास्ते में भी ग्रामीणों और श्रद्धालुओं द्वारा उनका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। किसी ने पानी पिलाया, किसी ने रुककर हालचाल पूछा तो किसी ने अपने स्तर पर सेवा कर उनके पसीने की थकान को कम करने का प्रयास किया।
परिजनों का साथ, संकल्प में बनी ताकत
सांवरा बैरवा अकेले इस यात्रा पर नहीं हैं। उनके साथ उनके परिजन भी चल रहे हैं। यात्रा के दौरान परिजनों की मौजूदगी उनके लिए सहारा बनी हुई है। कठिन रास्ते और लगातार शारीरिक परिश्रम के बीच परिवार का साथ भक्त के संकल्प को मजबूती दे रहा है।
लोटन यात्रा के दौरान जहां सांवरा बैरवा अपनी साधना में जुटे हैं, वहीं उनके परिजन आवश्यक व्यवस्थाओं और उनकी सुविधा का ध्यान रख रहे हैं।
‘मन्नत पूरी हो, इसलिए निकली यात्रा’
शाहपुरा पहुंचने पर सांवरा बैरवा ने बताया कि वे अपनी मन्नत को लेकर यह लोटन यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ सांवरिया सेठ के चरणों में समर्पित है।
उन्होंने बताया कि गांव से सांवरिया सेठ मंदिर तक पहुंचने में करीब एक पखवाड़े का समय लगने की संभावना है। दूरी लंबी है और यात्रा कठिन भी है, लेकिन मन में अपने आराध्य के प्रति विश्वास हो तो कठिनाई भी साधना का हिस्सा बन जाती है।
उनका कहना है कि यात्रा का उद्देश्य केवल मंदिर तक पहुंचना नहीं, बल्कि अपने संकल्प को पूरा कर उसे सांवरिया सेठ के चरणों में अर्पित करना है।
भक्ति में सेवा का रंग भी घुला
सांवरा बैरवा की यात्रा ने जहां उनकी व्यक्तिगत आस्था को सामने रखा, वहीं रास्ते में लोगों की सेवा भावना भी दिखाई दे रही है। ग्रामीण और श्रद्धालु अपने-अपने स्तर पर उनकी मदद कर रहे हैं। लोटन यात्रा की कठिनाई को देखते हुए लोग पानी, विश्राम और अन्य आवश्यकताओं का ध्यान रख रहे हैं।
सांवरिया सेठ के प्रति श्रद्धा रखने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि भक्त की सेवा करना भी प्रभु की सेवा के समान भाव रखने वाली परंपरा है। इसी भावना के साथ रास्ते में लोगों द्वारा सांवरा बैरवा की आवभगत की जा रही है।
एक संकल्प, एक मंजिल और सांवरिया सेठ का नाम
सांवरा बैरवा की लोटन यात्रा अब शाहपुरा से आगे बढ़कर सांवरिया सेठ की नगरी की ओर जारी रहेगी। हर लोट के साथ मंजिल कुछ कदम और करीब आएगी और हर पड़ाव पर उनका विश्वास और मजबूत होता जाएगा।
भक्ति की इस यात्रा में न दिखावे का आग्रह है और न किसी प्रसिद्धि की चाह। यहां है तो केवल आराध्य के प्रति समर्पण, मन्नत पूरी होने का विश्वास और मंजिल तक पहुंचने का दृढ़ संकल्प।
शाहपुरा में उनके स्वागत के दौरान कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने उनकी यात्रा की सफलता और सकुशल मंदिर पहुंचने की कामना की।
रहड़ से शुरू हुआ यह संकल्प अब सांवरिया सेठ के दरबार की ओर बढ़ रहा है। रास्ता लंबा है, सफर कठिन है, लेकिन भक्त के मन में एक ही भरोसा है—सांवरिया सेठ का नाम। शायद इसी भरोसे की ताकत है, जो इंसान को पैरों से नहीं, बल्कि विश्वास से मंजिल तक पहुंचाती है।




