
भीलवाड़ा, मूलचन्द पेसवानी
जिंदगी की परीक्षा में अच्छे अंक केवल कागज पर नहीं, बल्कि इंसानियत, संस्कार और अच्छे कर्मों से मिलते हैं। डॉक्टर, इंजीनियर, सीए या अधिकारी बनना अच्छी उपलब्धि है, लेकिन इन सबसे पहले एक अच्छा इंसान बनना जरूरी है। यदि बड़ी-बड़ी डिग्रियां हासिल कर लीं, लेकिन जीवन में मानवता, संवेदना और संस्कार नहीं आए तो ऐसी सफलता अधूरी है। जिंदगी कागजों पर नहीं, इंसानियत में अच्छे नंबर लाने का नाम है।
यह प्रेरणादायी संदेश भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने मंगलवार को चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में विद्यार्थियों को दिया। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से आयोजित इस विशेष प्रवचन में भीलवाड़ा के विभिन्न स्कूलों के प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक के हजारों विद्यार्थी शामिल हुए।

आचार्यश्री ने विद्यार्थी जीवन को जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण दौर बताते हुए कहा कि पढ़ाई के लिए मिलने वाले 10-12 वर्ष जीवन की दिशा तय करते हैं। यदि इस समय मन लगाकर पढ़ लिया तो आगे की जिंदगी आसान और आनंदमय हो सकती है, लेकिन यदि पढ़ाई का समय मौज-मस्ती में गंवा दिया तो भविष्य में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने बच्चों से कहा कि “अक्षर की पढ़ाई में अव्वल आने से ज्यादा जरूरी जिंदगी की पढ़ाई में अव्वल आना है।” बच्चे अपने शिक्षकों का सम्मान करें और शिक्षक भी बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें जिंदगी जीने की कला, संस्कार, अनुशासन, मानवीयता और अच्छे-बुरे का फर्क भी समझाएं।
हजारों बच्चों ने उठाए हाथ, लिया जिंदगी का संकल्प-
प्रवचन के दौरान आचार्य पुलकसागर महाराज ने विद्यार्थियों को केवल सुनाया ही नहीं, बल्कि उनसे संवाद भी किया। उन्होंने बच्चों से हाथ खड़े करवाकर जीवन के प्रति कई महत्वपूर्ण संकल्प कराए। बच्चों ने संकल्प लिया कि कैसी भी परिस्थिति आए, वे कभी आतंकवादी या देशद्रोही नहीं बनेंगे और राष्ट्र के साथ गद्दारी नहीं करेंगे। जीवन में कितनी भी असफलताएं आएं, वे कभी आत्महत्या का रास्ता नहीं चुनेंगे तथा मरते दम तक अपने माता-पिता का सम्मान करेंगे।
आचार्यश्री ने कहा कि जिंदगी बहुत अनमोल है। परीक्षा में कम नंबर आ जाना जिंदगी का अंत नहीं है। एक परीक्षा में असफलता मिलने से व्यक्ति असफल नहीं हो जाता। एक असफलता कई सफलताओं के दरवाजे खोल सकती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को आत्महत्या जैसे घातक विचारों से दूर रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि कभी फांसी का फंदा लगाने, जहर खाने या पहाड़ से कूदकर जिंदगी खत्म करने का विचार मत करना। यह जिंदगी दोबारा नहीं मिलने वाली। आत्महत्या के अंधे कुएं में छलांग लगाने से पहले यह सोचना चाहिए कि नुकसान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे परिवार की खुशियों का होता है।
“फांसी पर बच्चा अकेला नहीं लटकता, उसके साथ पूरे परिवार की खुशियों को फंदा लग जाता है।” आचार्यश्री की इस मार्मिक बात ने विद्यार्थियों को भावुक कर दिया।
डिग्री नहीं, गुण तय करते हैं व्यक्ति की वेल्यू-
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि आज समाज में व्यक्ति की पहचान अक्सर उसकी डिग्री, नौकरी, पद और संपत्ति से की जाती है, लेकिन वास्तविक मूल्य उसके गुणों से होता है। व्यक्ति की वेल्यू उसकी डिग्री से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, संस्कार और कर्मों से तय होती है।
उन्होंने कहा कि बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। इसलिए विद्यार्थी जीवन को गंभीरता से लेना चाहिए। माता-पिता की मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन को समझते हुए पढ़ाई के इस दौर का पूरा उपयोग करना चाहिए।
माता-पिता के सम्मान पर जोर देते हुए आचार्यश्री ने कहा कि पैसा चला जाए तो वापस कमाया जा सकता है, शोहरत चली जाए तो दोबारा हासिल की जा सकती है, लेकिन माता-पिता एक बार दुनिया से चले गए तो फिर कभी वापस नहीं आएंगे। इसलिए उनके रहते उनका सम्मान, सेवा और स्नेह करना ही सच्ची सफलता है।
जन्म से नहीं, कर्म से बनता है महापुरुष-
आचार्यश्री ने विद्यार्थियों को महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने की सीख देते हुए कहा कि दुनिया में कोई व्यक्ति जन्म से महात्मा या महापुरुष बनकर नहीं आता। भगवान महावीर, गौतम बुद्ध, स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी भी सामान्य मनुष्य के रूप में जन्मे थे। वर्धमान, सिद्धार्थ, नरेंद्र और मोहनदास के रूप में पहचाने जाने वाले इन व्यक्तित्वों ने अपने कर्मों से दुनिया में ऐसी पहचान बनाई कि इतिहास ने उन्हें महापुरुष का दर्जा दे दिया।
उन्होंने कहा कि इंसान को महान बनने के लिए जन्म नहीं, बल्कि कर्म बड़े करने पड़ते हैं। यदि विद्यार्थियों ने भी महापुरुषों जैसे अच्छे कार्य शुरू कर दिए तो आने वाले समय में उनका नाम भी लोग सम्मान से लेंगे।
आचार्यश्री ने कहा कि जिंदगी यूं ही पूरी करने के लिए नहीं मिली है। जीवन में ऐसे काम करने चाहिए कि दुनिया आपको आपके जाने के बाद भी याद करे। ऊंचाई हासिल करने के लिए केवल रंग-रूप या धन की जरूरत नहीं होती, बल्कि मजबूत हौसले और दृढ़ संकल्प चाहिए।
गरीबी को कमजोरी नहीं, हौसले को ताकत बनाओ-
विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि गरीबी को कभी अपनी कमजोरी या बाधा नहीं मानना चाहिए। मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी सामान्य परिस्थितियों से आगे बढ़कर देश में सर्वाेच्च स्थान हासिल किया। परिस्थितियां व्यक्ति को रोक नहीं सकतीं, यदि उसके भीतर आगे बढ़ने का संकल्प हो।
उन्होंने कहा कि दुनिया आपको आपके नाम से नहीं, आपके काम से पहचानेगी। कई लोग जन्म लेते हैं और चले जाते हैं, लेकिन इतिहास उन्हें याद नहीं रखता। वहीं कुछ लोग अपने कर्मों से ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करते हैं कि उनके जाने के बाद भी दुनिया उन्हें याद करती है।
अच्छे कर्म किए तो मंदिर बनेंगे, बुरे किए तो पुतले जलेंगे-
आचार्यश्री ने राम और रावण, कृष्ण और कंस का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया अच्छे और बुरे दोनों कर्म करने वालों को जानती है। फर्क सिर्फ इतना है कि अच्छे कर्म करने वालों की पूजा होती है और बुरे कर्म करने वालों के पुतले जलाए जाते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि गुमनाम जिंदगी मत जीना। जीवन में ऐसे अच्छे कार्य करो कि इतिहास आपको याद करे। जीवन में केवल सफल व्यक्ति नहीं, बल्कि उपयोगी और संवेदनशील इंसान बनने का लक्ष्य रखो।
उन्होंने कबीर, रैदास और मीरा का उदाहरण देते हुए कहा कि इन महान व्यक्तित्वों ने आधुनिक अर्थों में बड़ी-बड़ी डिग्रियां हासिल नहीं कीं, लेकिन आज पढ़े-लिखे लोग भी उनके जीवन और विचारों पर पीएचडी करते हैं। इससे स्पष्ट है कि जिंदगी की महानता केवल डिग्री में नहीं, बल्कि विचार और कर्मों में होती है। प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद करते हुए उनके मन की बातें जानीं। कई मार्मिक प्रसंगों पर विद्यार्थी भावुक भी दिखाई दिए।
दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ-
प्रवचन से पूर्व दीप प्रज्वलन, आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य निहालचंदजी, ललित, पवन एवं लोकेश अजमेरा परिवार ने प्राप्त किया। विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने आचार्यश्री को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सौभाग्यशाली परिवारों एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह सहित समिति पदाधिकारियों ने किया। जैन ज्योति कॉलोनी महिला मंडल की सदस्यों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह ने किया।
शहर एवं आसपास के क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों श्रद्धालु ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने चित्रकूटधाम पहुंचे। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन होंगे। वहीं शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है। इसमें भीलवाड़ा शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर धर्म और ज्ञान का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।




