Welcome to शाहपुरा संवाद   Click to listen highlighted text! Welcome to शाहपुरा संवाद
BHILWARAE-Paperधर्मराजस्थानलोकल न्यूज़

भाई की कलाई पर राखी तो हर बहन ने बांधी… शाहपुरा की ‘ग्रीन लिटिल बेबी’ ने पेड़ों की कलाई सजा दी!

रक्षाबंधन पर श्रेया का अनोखा रक्षा-संकल्प—‘एक राखी अपनों के नाम, एक रक्षा संकल्प प्रकृति के नाम’

शाहपुरा संवाद | लाइव स्पेशल स्टोरी | मूलचन्द पेसवानी

शाहपुरा। राखी के धागे में इस बार सिर्फ भाई-बहन का प्यार नहीं था… इसमें धरती की सांसों की चिंता भी थी। रक्षाबंधन के दिन जहां घर-घर बहनें भाइयों की कलाई पर प्रेम और विश्वास का रक्षा सूत्र बांध रही थीं, वहीं शाहपुरा में एक नन्ही पर्यावरण प्रहरी ने इस परंपरा को ही प्रकृति की रक्षा से जोड़कर ऐसा संदेश दिया, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

नाम है श्रेया कुमावत… और पहचान है ‘ग्रीन लिटिल बेबी’।

श्रेया ने रक्षाबंधन को केवल भाई की कलाई तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने बच्चों के साथ मिलकर पीपल, नीम और बरगद जैसे जीवनदायी वृक्षों को राखी बांधी। वृक्षों की कलाई पर रक्षा सूत्र सजाया गया, दीप जलाए गए, आरती उतारी गई और फिर लिया गया ऐसा संकल्प, जिसकी जरूरत आज शायद हर इंसान को है—पेड़ लगाएंगे भी और उन्हें बचाएंगे भी।

पेड़ भी तो हमारे रक्षक हैं… फिर उनकी कलाई सूनी क्यों रहे?

रक्षाबंधन पर आमतौर पर सवाल होता है—‘किसकी रक्षा करोगे?’

श्रेया ने इसका जवाब बिल्कुल अलग अंदाज में दिया—जो हमें जीवन देता है, उसकी रक्षा कौन करेगा?

पीपल हमें सांसों का सहारा देता है, नीम स्वास्थ्य और पर्यावरण का प्रहरी है और बरगद अपनी विशाल छांव में पीढ़ियों को सुकून देता आया है। ऐसे वृक्षों की कलाई पर जब बच्चों ने रक्षा सूत्र बांधा तो यह महज एक रस्म नहीं रही, बल्कि प्रकृति और इंसान के रिश्ते की नई परिभाषा बन गई।

दीपक की रोशनी, राखी का रंग और पेड़ों की हरियाली के बीच बच्चों ने पौधारोपण भी किया। पौधे लगाने के साथ उन्हें केवल मिट्टी में छोड़ नहीं दिया गया, बल्कि उनकी देखभाल, सुरक्षा और संरक्षण का संकल्प भी लिया गया।

यही इस पहल की सबसे खास बात रही।

क्योंकि आज पौधारोपण की तस्वीर खिंचवाना आसान है, लेकिन उस पौधे को वर्षों तक सींचकर पेड़ बनाना असली पर्यावरण सेवा है।

‘एक राखी अपनों के नाम… एक रक्षा संकल्प प्रकृति के नाम’

श्रेया का संदेश बेहद सरल है, लेकिन इसकी गूंज बहुत दूर तक जाती है।

“एक राखी अपनों के नाम, एक रक्षा संकल्प प्रकृति के नाम… क्योंकि पेड़ बचेंगे, तभी जीवन और भविष्य बचेगा।”

उनका कहना है कि रक्षा का अर्थ सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं होना चाहिए। प्रकृति, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और पूरा पर्यावरण भी हमारी जिंदगी के रक्षक हैं। जब पेड़ हमें ऑक्सीजन देते हैं, धूप में छांव देते हैं, मिट्टी को बचाते हैं और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखते हैं, तो उनकी रक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है।

और यही बात बच्चों के माध्यम से समाज तक पहुंचाने की कोशिश की गई।

राखी बांधी… आरती उतारी… फिर लिया बड़ा संकल्प

इस अनूठे आयोजन में बच्चों ने वृक्षों को केवल राखी नहीं बांधी, बल्कि उन्हें अपना प्रकृति भाई मानकर उनकी रक्षा का वचन भी लिया।

राखी बांधते समय जिस तरह बहन भाई से रक्षा का वचन लेती है, उसी भावना को उलटकर बच्चों ने पेड़ों के सामने अपना संकल्प रखा—पेड़ नहीं काटेंगे, पौधों को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, नए पौधे लगाएंगे और लगाए गए पौधों को बड़ा होने तक उनकी देखभाल करेंगे।

यह दृश्य अपने आप में बेहद भावुक भी था और प्रेरक भी।

मानो बच्चों की छोटी-छोटी हथेलियां प्रकृति से कह रही हों—
“आपने हमें जीवन दिया है… अब आपकी रक्षा की जिम्मेदारी हमारी है।”

श्रेया के लिए पर्यावरण कोई ‘एक दिन’ का अभियान नहीं

श्रेया कुमावत के लिए पर्यावरण संरक्षण किसी कैलेंडर की एक तारीख का कार्यक्रम नहीं है। यह उनके जीवन का मिशन बन चुका है।

पढ़ाई के साथ-साथ श्रेया पौधारोपण, पौधों की देखभाल और बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने में लगातार सक्रिय रहती हैं। स्कूल की पढ़ाई खत्म होने के बाद भी पेड़-पौधों के बीच समय बिताना और उनकी देखभाल करना उनके लिए किसी शौक से कम नहीं।

वह पौधों को केवल पौधे नहीं, बल्कि अपने मित्र मानती हैं।

इसी सोच ने कम उम्र में उन्हें ऐसी पहचान दिलाई कि आज शाहपुरा ही नहीं, बल्कि दूसरे क्षेत्रों में भी लोग उन्हें ‘ग्रीन लिटिल बेबी’ के नाम से जानते हैं।

पर्यावरण के क्षेत्र में उनके प्रयासों की सार्वजनिक मंचों पर सराहना हो चुकी है। राजस्थान के मुख्यमंत्री द्वारा भी उनके पर्यावरणीय प्रयासों की खुले मंच से प्रशंसा की जा चुकी है। इतना ही नहीं, उनके जीवन और पर्यावरण के प्रति समर्पण पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई जा चुकी है।

शाहपुरा से निकली हरियाली की आवाज राजस्थान के बाहर भी

श्रेया का पर्यावरण संदेश शाहपुरा या राजस्थान तक ही सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश की एक सामाजिक संस्था की ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी वह बच्चों को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित कर रही हैं।

यानी एक नन्ही बच्ची का छोटा-सा संकल्प अब धीरे-धीरे बड़े अभियान का रूप ले रहा है।

और शायद यही किसी भी अच्छी पहल की सबसे बड़ी सफलता होती है—आप खुद पेड़ लगाएं और साथ में दस लोगों को पेड़ बचाने के लिए प्रेरित कर दें।

शाहपुरा संवाद की नजर से… यह सिर्फ राखी नहीं, भविष्य की कलाई है

रक्षाबंधन पर शाहपुरा से सामने आया यह नवाचार कई सवाल भी छोड़ता है।

हम हर साल राखियां खरीदते हैं, उपहार देते हैं, मिठाइयां बांटते हैं। लेकिन क्या हम एक राखी प्रकृति के नाम कर सकते हैं?

क्या इस बार एक पौधा अपने नाम लगा सकते हैं?

क्या उसे केवल फोटो खिंचवाने तक नहीं, बल्कि अगले पांच-दस साल तक बचाने का संकल्प ले सकते हैं?

अगर जवाब ‘हां’ है तो श्रेया की यह छोटी-सी पहल बहुत बड़ा संदेश बन सकती है।

क्योंकि पेड़ सिर्फ धरती पर खड़े तने और शाखाएं नहीं हैं। वे हमारी सांसों के साथी हैं, पक्षियों के घर हैं, मिट्टी के प्रहरी हैं, बारिश के सहायक हैं और आने वाली पीढ़ियों की विरासत हैं।

इसलिए इस रक्षाबंधन पर संदेश साफ है—

“कलाई पर राखी जरूर बांधिए… लेकिन एक रक्षा सूत्र प्रकृति के नाम भी बांधिए।”

एक राखी भाई-बहन के रिश्ते के नाम,
एक राखी पेड़ों के नाम।
एक वचन अपनों की रक्षा का,
एक संकल्प प्रकृति की रक्षा का।

क्योंकि पेड़ बचेंगे… तो सांसें बचेंगी।
सांसें बचेंगी… तो जीवन बचेगा।
और जीवन बचेगा… तभी हमारा भविष्य बचेगा।

शाहपुरा संवाद की यह लाइव स्पेशल स्टोरी सिर्फ एक खबर नहीं, एक सवाल है—
इस रक्षाबंधन… आपने प्रकृति की कलाई पर राखी बांधी या नहीं?
🌿🎀

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!