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स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, लाभार्थियों को मिले गुणवत्तापूर्ण सेवाएं

बीसीएमओ डॉ. चेना राम कुमावत ने ब्लॉक मासिक बैठक में योजनाओं की समीक्षा कर दिए निर्देश

शाहपुरा। स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्वक पहुंचाने के लिए चिकित्सा विभाग ने मैदानी अमले को सक्रियता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को जिला चिकित्सालय शाहपुरा के सभागार में आयोजित ब्लॉक मासिक बैठक में चिकित्सा विभाग की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।

बैठक की अध्यक्षता ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. चेना राम कुमावत ने की। उन्होंने अधिकारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब पात्र लाभार्थियों तक सेवाएं समय पर और पूरी गुणवत्ता के साथ पहुंचें। उन्होंने योजनाओं की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।

लाडो प्रोत्साहन योजना की समीक्षा

बैठक में मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी लाडो प्रोत्साहन योजना की समीक्षा की गई। डॉ. कुमावत ने बालिकाओं के जन्म से संबंधित प्रसूताओं के सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर पूर्ण करवाने तथा पात्र लाभार्थियों को योजना के तहत भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि दस्तावेजों के अभाव में किसी पात्र लाभार्थी को योजना का लाभ मिलने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन जरूरी

मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए बीसीएमओ ने सभी गर्भवती महिलाओं का 12 सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने गर्भवती महिलाओं की निर्धारित चारों स्वास्थ्य जांचें समय पर करवाने, टीडी टीकाकरण तथा आधार, जन आधार और बैंक खाते से संबंधित जानकारी समय पर दर्ज करने पर जोर दिया।

उन्होंने मां वाउचर योजना के तहत सोनोग्राफी के लिए वाउचर जारी करने तथा जारी किए गए सभी वाउचर की समय पर सोनोग्राफी करवाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

हाई रिस्क गर्भवतियों पर विशेष नजर

बैठक में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी यानी एचआरपी गर्भवती महिलाओं की विशेष देखभाल करने के निर्देश दिए गए। सभी गर्भवती महिलाओं की प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत स्वास्थ्य जांच करवाने तथा जिन महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी है, उन्हें आवश्यकतानुसार एफसीएम उपचार उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए।

डॉ. कुमावत ने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला का संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रसव के दौरान होने वाले जोखिम को कम किया जा सके और जच्चा-बच्चा दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

बच्चों का टीकाकरण समय पर हो

आरसीएच गतिविधियों की समीक्षा के दौरान सभी शिशुओं एवं बच्चों का निर्धारित समय पर शत-प्रतिशत टीकाकरण करवाने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्यकर्मियों से कहा गया कि टीकाकरण से वंचित बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर टीके लगाए जाएं।

परिवार कल्याण सेवाओं पर भी जोर

परिवार कल्याण कार्यक्रम की समीक्षा में दो बच्चों के बीच उचित अंतर रखने के लिए अंतरा इंजेक्शन जैसी अस्थायी गर्भनिरोधक सेवाओं को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। संस्थागत प्रसव के बाद प्रसूताओं को पीपीआईयूसीडी की सुविधा उपलब्ध करवाने तथा पात्र लाभार्थियों को परिवार कल्याण के अस्थायी एवं स्थायी साधनों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए।

साथ ही इच्छुक पात्र दंपतियों को नसबंदी के लिए प्रेरित कर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करवाने पर जोर दिया गया।

एनीमिया मुक्त राजस्थान अभियान की समीक्षा

एनीमिया मुक्त राजस्थान कार्यक्रम के तहत बच्चों और विद्यार्थियों में खून की कमी दूर करने के लिए निर्धारित गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए।

डॉ. कुमावत ने कहा कि 6 माह से 59 माह तक के सभी बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयोजित शक्ति दिवस के दौरान शत-प्रतिशत आयरन सिरप पिलाया जाए। सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को गुलाबी गोली तथा कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को नीली गोली सप्ताह में एक बार उपलब्ध करवाने तथा इसकी रिपोर्ट शाला दर्पण में दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने सभी सीएचओ एवं एएनएम को इस अभियान की नियमित निगरानी करने को कहा।

मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए घर-घर निगरानी

मौसमी बीमारियों को देखते हुए आशाओं को नियमित रूप से स्लाइड तैयार कर समय पर जमा करवाने तथा घर-घर जाकर लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए। आशाओं को प्रतिदिन कम से कम 10 घरों का भ्रमण करने के लिए निर्देशित किया गया।

30 वर्ष से अधिक आयु वालों की स्क्रीनिंग पर जोर

बैठक में एनसीडी कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई। डॉ. कुमावत ने 30 वर्ष से अधिक आयु के सभी लाभार्थियों की नियमित स्क्रीनिंग, आवश्यक जांच और फॉलोअप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान होने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को शुरुआती स्तर पर नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों को अपने क्षेत्र में अधिक सक्रियता से कार्य करने की जरूरत है।

ये रहे मौजूद

बैठक में चिकित्सा अधिकारी प्रभारी, बीएचएस, बीएनओ, एलएचवी, सीएचओ, डब्ल्यूएचओ प्रतिनिधि, सेक्टर हेल्थ सुपरवाइजर तथा एएनएम सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

रिपोर्ट : मूलचन्द पेसवानी

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