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‘स्वस्थ विद्यार्थी ही सशक्त भारत की पहचान’, शाहपुरा में शारीरिक शिक्षकों के वाक्पीठ का भव्य शुभारंभ

विधायक डॉ. लालाराम बैरवा बोले— शारीरिक शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण के वास्तविक शिल्पकार

तीन दिवसीय सत्रारंभ संगोष्ठी में शिक्षा, खेल और नवाचार पर हुआ मंथन, विधायक डॉ. लालाराम बैरवा बोले— शारीरिक शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण के वास्तविक शिल्पकार

शाहपुरा। शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ शरीर, अनुशासित जीवन और संस्कारित व्यक्तित्व के निर्माण का माध्यम भी है। इसी सोच को साकार करने के उद्देश्य से राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कजोड़िया के तत्वावधान में तीन दिवसीय सत्रारंभ शारीरिक शिक्षक वाक्पीठ एवं संगोष्ठी (सत्र 2026-27) का शुभारंभ गुरुवार को शाहपुरा स्थित राठौड़ फार्म हाउस में गरिमामय वातावरण में हुआ। शिक्षा विभाग के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और जिलेभर से पहुंचे शारीरिक शिक्षकों की उपस्थिति ने इस आयोजन को शिक्षा और खेल के समन्वय का प्रेरणादायी मंच बना दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने दीप प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “कक्षा में ज्ञान देने वाला शिक्षक जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही मैदान में जीवन जीने की कला सिखाने वाला शारीरिक शिक्षक भी। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है और यही राष्ट्र निर्माण की पहली शर्त है।”

उन्होंने कहा कि यह तीन दिवसीय संगोष्ठी केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला चिंतन मंच है। यहां होने वाला मंथन विद्यालयों में खेल संस्कृति, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और विद्यार्थियों के समग्र विकास को नई गति प्रदान करेगा।

‘मैं भी रहा हूं शारीरिक शिक्षक, इस दायित्व का महत्व जानता हूं’

विधायक डॉ. बैरवा ने अपने संबोधन में अपने सेवाकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वे स्वयं भी राजकीय सेवा में शारीरिक शिक्षक के पद पर कार्य कर चुके हैं। इसलिए वे इस जिम्मेदारी के महत्व और चुनौतियों को भलीभांति समझते हैं। उन्होंने कहा कि शारीरिक शिक्षक केवल खेल नहीं सिखाता, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और संघर्ष की शक्ति विकसित करता है।

उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिवेश का उल्लेख करते हुए कहा कि आज जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, तब खेल, योग और नियमित व्यायाम का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। उन्होंने सभी शारीरिक शिक्षकों से आग्रह किया कि वे पूरी निष्ठा, समर्पण और मनोयोग से अपनी सेवाएं दें, ताकि विद्यार्थियों के साथ-साथ ग्रामीण समाज भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित हो सके।

शिक्षा और खेल के समन्वय पर हुआ मंथन

संगोष्ठी में जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) रामेश्वर प्रसाद जीनगर, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी जग जितेंद्र, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी डॉ. सत्यनारायण कुमावत, विभागीय प्रतिनिधि एवं प्रधानाचार्य हेमराज खटीक सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने शारीरिक शिक्षा की वर्तमान चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने विचार रखे।

वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप अब शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना है। खेल गतिविधियां बच्चों में नेतृत्व, आत्मविश्वास, अनुशासन, सहयोग और सकारात्मक सोच विकसित करती हैं। इसलिए प्रत्येक विद्यालय में खेल संस्कृति को मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है।

तीन दिवसीय वाक्पीठ में शैक्षणिक सुधार, खेल गतिविधियों के प्रभावी संचालन, नवाचार, कुशल नेतृत्व, योग, फिटनेस, विद्यालय स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान तथा विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और विद्यालयों में खेलों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव भी प्रस्तुत किए।

अतिथियों का हुआ आत्मीय स्वागत

कार्यक्रम के प्रारंभ में शंकर सिंह राठौड़ के नेतृत्व में शारीरिक शिक्षकों ने विधायक डॉ. लालाराम बैरवा सहित सभी अतिथियों का पारंपरिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। स्वागत समारोह में आत्मीयता और सम्मान का वातावरण देखने को मिला। अतिथियों ने भी आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के मंच शिक्षकों के अनुभवों के आदान-प्रदान और नई कार्यशैली विकसित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं।

जनप्रतिनिधियों और शिक्षा जगत की रही उल्लेखनीय उपस्थिति

संगोष्ठी में पूर्व प्रधान गोपाल गुर्जर, भाजपा जिला मंत्री राजेंद्र बोहरा, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष पंकज सुगंधी, शिक्षा विभाग के अधिकारी, विभिन्न विद्यालयों के संस्था प्रधान, शारीरिक शिक्षक तथा बड़ी संख्या में शिक्षा से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

पूरे आयोजन के दौरान शिक्षा और खेल के समन्वय, विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक विकास तथा विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण खेल वातावरण विकसित करने को लेकर गंभीर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस संगोष्ठी से प्राप्त अनुभव और सुझाव नए शैक्षणिक सत्र में विद्यालयों की खेल गतिविधियों को नई ऊर्जा देंगे।

कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि यदि विद्यालयों में पढ़ाई के साथ खेल, योग और अनुशासन को समान महत्व दिया जाए तो विद्यार्थियों का व्यक्तित्व अधिक संतुलित, आत्मविश्वासी और राष्ट्रहित में समर्पित बन सकता है। यही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य भी है।

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