गुरु ही जीवन का सच्चा पथप्रदर्शक, वेदों के आदर्शों पर चलकर ही बनता है श्रेष्ठ व्यक्तित्व : जयदेव जोशी
श्रीमद दयानंद महिला शिक्षण केंद्र में भारत विकास परिषद के तत्वावधान में 'गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन' कार्यक्रम, मेधावी एवं अनुशासित विद्यार्थियों का हुआ सम्मान

शाहपुरा। भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और चरित्र निर्माण का आधार माना गया है। गुरु केवल शिक्षा देने वाला शिक्षक नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला पथप्रदर्शक होता है। इसी भाव को साकार करते हुए भारत विकास परिषद, शाहपुरा इकाई के तत्वावधान में श्रीमद दयानंद महिला शिक्षण केंद्र में ‘गुरु गौरवम्’ कार्यक्रम के अंतर्गत गुरु वंदन एवं छात्र अभिनंदन समारोह श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को रेखांकित करते हुए शिक्षकों का सम्मान किया गया तथा विद्यालय के उत्कृष्ट विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं भारत विकास परिषद मध्य प्रांत के सामूहिक सरल विवाह प्रांत प्रभारी जयदेव जोशी ने भारतीय संस्कृति में गुरु की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु ही वह शक्ति है, जो मनुष्य के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा प्रदान करती है। गुरु के मार्गदर्शन से ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास संभव होता है और वही उसे जीवन में सफलता के शिखर तक पहुंचाता है।
अपने प्रेरक उद्बोधन में श्री जोशी ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने समाज को वेदों की ओर लौटने का संदेश देते हुए सत्य, ज्ञान और नैतिकता पर आधारित जीवन जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि आर्य समाज की स्थापना के समय महर्षि दयानंद ने गुरु के महत्व को सर्वोच्च स्थान दिया तथा वेदों के अनुरूप आचार, विचार और व्यवहार अपनाने पर विशेष बल दिया। यदि वर्तमान पीढ़ी वेदों के आदर्शों और गुरु के उपदेशों का पालन करे तो एक सशक्त, संस्कारित और चरित्रवान समाज का निर्माण संभव है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने गुरुजनों का सम्मान करें, अनुशासन को जीवन का आधार बनाएं तथा शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को भी आत्मसात करें। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में ज्ञान के साथ संस्कारों का समावेश ही व्यक्ति को वास्तविक सफलता दिलाता है।
इस अवसर पर भारत विकास परिषद द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले ‘गुरु गौरवम्’ कार्यक्रम की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि परिषद विद्यार्थियों में संस्कार, राष्ट्रभक्ति और नैतिक मूल्यों के विकास के उद्देश्य से इकाई, प्रांत एवं अखिल भारतीय स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं और परीक्षाओं का आयोजन करती है। इनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विभिन्न स्तरों पर सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया जाता है।

इसी क्रम में श्रीमद दयानंद महिला शिक्षण केंद्र के छात्र ध्रुव सिंह को विद्यालय द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन और सक्रिय सहभागिता के लिए सम्मानित किया गया। वहीं छात्रा शीलू माली को विद्यालय में सर्वाधिक उपस्थिति एवं अनुशासित आचरण के लिए विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया। पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का उपस्थित जनों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अभिनंदन किया।
कार्यक्रम का सबसे भावपूर्ण क्षण तब आया, जब भारत विकास परिषद के पदाधिकारियों एवं विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों का गुरु वंदन किया। सभी शिक्षकों का नारियल एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया गया। गुरु सम्मान की इस परंपरा ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की और उपस्थित विद्यार्थियों के मन में गुरु के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान का भाव और अधिक प्रगाढ़ हुआ।
कार्यक्रम में भारत विकास परिषद, शाहपुरा इकाई के महावीर सोनी एवं जयसिंह कानावत ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। समारोह में आर्य समाज के मंत्री सुनील कुमार बेली, विद्यालय प्रबंध समिति के कार्यवाहक उपाध्यक्ष रामस्वरूप काबरा, विद्यालय मंत्री ओम चितलांगिया, कोषाध्यक्ष ज्ञानप्रकाश चेचाणी सहित विद्यालय परिवार के सदस्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में संस्था प्रधानाध्यापिका श्रीमती मिथिलेश कंवर राठौड़ ने सभी अतिथियों, भारत विकास परिषद के पदाधिकारियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में गुरु के प्रति सम्मान, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय भविष्य में भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और संस्कार निर्माण के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम निरंतर आयोजित करता रहेगा।




